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अब म्यूचुअल फंड से हर महीने पैसा निकालना होगा आसान, SEBI ने डीमैट निवेशकों को दी बड़ी सुविधा

इस कदम से निवेशकों को अपने निवेश को मैनेज करना आसान होगा और वे तय समय पर पैसे निकालने या एक स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करने की सुविधा हासिल कर सकेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डीमैट अकाउंट में रखे म्यूचुअल फंड निवेश को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब ऐसे निवेशक भी SWP और STP के लिए ऑटोमैटिक निर्देश दे सकेंगे. इससे डीमैट फॉर्म में म्यूचुअल फंड यूनिट रखने वाले निवेशकों को भी वही सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक केवल स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (SOA) के रूप में रखी गई यूनिट्स पर उपलब्ध थीं.

अभी तक निवेशक केवल उन म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए SWP और STP की सुविधा ले सकते थे, जो एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) या उनके रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट (RTA) के पास SOA के रूप में मौजूद होती थीं. डीमैट अकाउंट में रखी गई यूनिट्स के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी.

दो चरणों में लागू होगा नया नियम

SEBI के नए नियम को दो चरणों में लागू किया जाएगा. पहले चरण में निवेशक यूनिट आधारित SWP और STP का विकल्प चुन सकेंगे. इसके तहत वे तय समय पर म्यूचुअल फंड की एक निश्चित संख्या में यूनिट बेचकर पैसा निकाल सकेंगे या उसी फंड हाउस की किसी दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर सकेंगे.

दूसरे चरण में रकम आधारित SWP और STP की सुविधा शुरू की जाएगी. इसके तहत निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार एक तय राशि को नियमित अंतराल पर निकाल सकेंगे या दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर सकेंगे.

SEBI ने डिपॉजिटरीज को निर्देश दिया है कि यूनिट आधारित सुविधा 31 जनवरी 2027 तक शुरू की जाए. वहीं, रकम आधारित सुविधा को 30 अप्रैल 2027 तक लागू करना होगा. इसके अलावा डिपॉजिटरीज को 31 अक्टूबर तक अपनी वेबसाइट पर इस प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी.

क्या होता है SWP और STP?

सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) के जरिए निवेशक अपने म्यूचुअल फंड निवेश से नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि या कुछ यूनिट्स निकाल सकते हैं. यह सुविधा खासतौर पर उन निवेशकों के लिए उपयोगी होती है, जिन्हें नियमित आय की जरूरत होती है.

वहीं, सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए निवेशक एक ही फंड हाउस की एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में धीरे-धीरे अपना निवेश ट्रांसफर कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल निवेशक बाजार की स्थिति और अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से करते हैं.

निवेशकों को क्या फायदा मिलेगा?

SEBI के इस फैसले से डीमैट अकाउंट में म्यूचुअल फंड रखने वाले निवेशकों के लिए निवेश प्रबंधन आसान हो जाएगा. उन्हें अब पैसे निकालने या निवेश को दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करने के लिए अलग प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा.

यह बदलाव खासतौर पर उन निवेशकों के लिए फायदेमंद होगा, जो अपने म्यूचुअल फंड निवेश को डीमैट फॉर्म में रखते हैं और नियमित निकासी या निवेश ट्रांसफर की योजना बनाते हैं.

नॉमिनी को म्यूचुअल फंड यूनिट ट्रांसफर करना भी आसान

इसके अलावा, एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने निवेशक की मृत्यु के बाद म्यूचुअल फंड यूनिट्स को नॉमिनी के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है. AMFI ने निवेशक के नाम, पते और हस्ताक्षर में मामूली अंतर या छोटी गलतियों से जुड़े नियमों में राहत दी है. नए नियमों के तहत, यदि मृतक निवेशक के रिकॉर्ड में दर्ज पते और मौजूदा पते में अंतर है, तो एसेट मैनेजमेंट कंपनियां नए पते को स्वीकार कर सकती हैं, बशर्ते इसके लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. इन बदलावों का उद्देश्य म्यूचुअल फंड निवेशकों के अनुभव को बेहतर बनाना और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाना है.
 


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