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SEBI ने म्यूचुअल फंड्स को दी बड़ी राहत, इंट्राडे उधारी के नियम हुए आसान

कैश मैनेजमेंट, ट्रेड सेटलमेंट और डेरिवेटिव दायित्वों के लिए अब ले सकेंगे शॉर्ट-टर्म लोन, परिचालन दक्षता बढ़ने की उम्मीद

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव करते हुए इंट्राडे उधारी से जुड़े नियमों को आसान बना दिया है. नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड हाउस अब कारोबार के दौरान लिए जाने वाले अल्पकालिक ऋण का उपयोग केवल निवेशकों को भुगतान करने तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि कैश मैनेजमेंट, ट्रेड सेटलमेंट, विदेशी मुद्रा दायित्वों और डेरिवेटिव मार्जिन जरूरतों को पूरा करने के लिए भी कर सकेंगे. माना जा रहा है कि इससे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) की परिचालन क्षमता में सुधार होगा और निवेशकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी.

SEBI बोर्ड बैठक में मिली मंजूरी

शुक्रवार को हुई SEBI बोर्ड की बैठक में म्यूचुअल फंड विनियम, 2026 में संशोधन को मंजूरी दी गई. इसके तहत फंड हाउसों को इंट्राडे उधारी के उपयोग के लिए अधिक लचीलापन दिया गया है. नियामक का मानना है कि यह कदम बाजार की बदलती जरूरतों और परिचालन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

किन उद्देश्यों के लिए मिल सकेगी उधारी?

नए नियमों के अनुसार, म्यूचुअल फंड स्कीम्स अब एसेट क्लास के भीतर भुगतान और प्राप्तियों के बीच समय अंतराल को संभालने, विदेशी मुद्रा (FX) से जुड़े सेटलमेंट दायित्वों को पूरा करने और डेरिवेटिव पोजिशन में उतार-चढ़ाव से उत्पन्न मार्जिन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शॉर्ट-टर्म उधार ले सकेंगी. इससे फंड हाउसों को अचानक पैदा होने वाली नकदी जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी और निवेश संबंधी गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा.

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि विभिन्न म्यूचुअल फंड स्कीम्स में नकदी के प्रवाह और भुगतान के बीच अक्सर समय का अंतर होता है. कई बार इस वजह से भुगतान दायित्वों को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे में इंट्राडे उधारी की सुविधा फंड हाउसों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकती है.

उधारी पर रहेंगी सख्त शर्तें

हालांकि SEBI ने नियमों में ढील दी है, लेकिन इसके साथ कुछ नियामकीय सुरक्षा उपाय भी लागू रहेंगे. नियामक ने स्पष्ट किया है कि कारोबार के दौरान ली जाने वाली उधारी की राशि दिन के दौरान अपेक्षित प्राप्तियों तक ही सीमित होगी. यदि किसी स्कीम को निर्धारित सीमा से अधिक उधार की आवश्यकता पड़ती है, तो उसका उपयोग केवल मौजूदा नियमों के तहत अनुमत उद्देश्यों, जैसे निवेशकों को भुगतान, के लिए ही किया जा सकेगा.

उसी दिन चुकाना होगा पूरा लोन

SEBI ने यह भी अनिवार्य किया है कि कारोबार के दौरान लिया गया पूरा ऋण उसी कारोबारी दिन समाप्त होने से पहले चुका दिया जाए. यदि किसी कारणवश यह उधारी अगले दिन तक जारी रहती है, तो उसे नियामकीय सीमाओं के भीतर रहकर केवल अनुमत उद्देश्यों के लिए ही मान्य माना जाएगा.

उद्योग और निवेशकों को होगा फायदा

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI का यह फैसला म्यूचुअल फंड उद्योग की परिचालन दक्षता बढ़ाने, नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे फंड हाउसों को लेनदेन और सेटलमेंट से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में अधिक लचीलापन मिलेगा और पूरी प्रणाली की कार्यकुशलता मजबूत होगी.
 


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