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रिलायंस इंडस्ट्रीज के Q1 नतीजे: मुनाफा 22% घटा, लेकिन रेवेन्यू में 27% की दमदार बढ़त

ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C), डिजिटल सेवाओं और टेलीकॉम कारोबार के बेहतर प्रदर्शन ने आय को मजबूती दी, जबकि बढ़ती लागत, ब्याज और मूल्यह्रास के खर्च का असर मुनाफे पर देखने को मिला.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया. कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 22.4 फीसदी घटकर 20,946 करोड़ रुपये रहा. पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 26,994 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. हालांकि, यह आंकड़ा ब्रोकरेज फर्मों के 18,570 करोड़ रुपये के अनुमान से बेहतर रहा.

अगर एकमुश्त अन्य आय को अलग कर देखें तो कंपनी का कर-पूर्व परिचालन मुनाफा (EBIT) सालाना आधार पर 9.3 फीसदी बढ़कर 24,080 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, पिछली तिमाही की तुलना में शुद्ध मुनाफे में 5.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी को 8,924 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों की बिक्री से एकमुश्त लाभ मिला था.

रेवेन्यू में 27 फीसदी की बढ़ोतरी

पहली तिमाही में रिलायंस का कुल राजस्व 27 फीसदी बढ़कर करीब 3.09 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 2.44 लाख करोड़ रुपये था, जबकि पिछली तिमाही में कंपनी का राजस्व 2.94 लाख करोड़ रुपये रहा था.

EBITDA घटा, लेकिन मुख्य परिचालन मुनाफा बढ़ा

कंपनी का समेकित EBITDA सालाना आधार पर 6.8 फीसदी घटकर 54,067 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 58,024 करोड़ रुपये था. हालांकि, तिमाही आधार पर इसमें 11.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.

वहीं, मुख्य परिचालन EBITDA 10.7 फीसदी बढ़कर 47,517 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 42,905 करोड़ रुपये था. इसके बावजूद EBITDA मार्जिन घटकर 15.25 फीसदी रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 17.61 फीसदी था. हालांकि, पिछली तिमाही के 15.01 फीसदी की तुलना में इसमें हल्का सुधार हुआ.

बढ़ती लागत ने डाला दबाव

तिमाही के दौरान कंपनी के कुल परिचालन खर्च में 30.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इसकी प्रमुख वजह कच्चे माल और तैयार उत्पादों की खरीद पर बढ़ा खर्च रहा. अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल और अन्य औद्योगिक वस्तुओं की कीमतों में तेजी आई, जिससे रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) और रिटेल कारोबार की लागत बढ़ गई.

ब्याज और मूल्यह्रास का खर्च भी बढ़ा

रिलायंस का ब्याज खर्च सालाना आधार पर 18.5 फीसदी बढ़कर 8,337 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 7,036 करोड़ रुपये था. वहीं, मूल्यह्रास (Depreciation) का खर्च भी 9.1 फीसदी बढ़कर 15,100 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसका एक बड़ा कारण रिलायंस जियो के 5G नेटवर्क से जुड़ी परिसंपत्तियों पर बढ़ा मूल्यह्रास रहा.

O2C और ऑयल-गैस कारोबार ने दिखाया दम

कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार का परिचालन मुनाफा सालाना आधार पर 13.2 फीसदी बढ़कर 14,170 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 12,521 करोड़ रुपये था.

वहीं, ऑयल एवं गैस कारोबार का परिचालन मुनाफा 9.6 फीसदी बढ़कर 3,888 करोड़ रुपये रहा. इस दौरान इस कारोबार की आय भी 3.2 फीसदी बढ़कर 6,298 करोड़ रुपये हो गई.

जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की तैयारी

रिलायंस की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए आवश्यक दस्तावेज नियामक के पास जमा किए हैं. बाजार की नजर अब कंपनी की इस बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग पर भी बनी हुई है.


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