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भारत के ऑफिस बाजार में GCCs का दबदबा, H1 2026 में 45% लीजिंग पर कब्जा: ANAROCK
ANAROCK के अनुसार, H1 2026 में देश के सात प्रमुख शहरों में कुल 4.26 करोड़ वर्ग फुट (42.6 मिलियन वर्ग फुट) ग्रॉस ऑफिस लीजिंग दर्ज की गई. इसमें से करीब 1.92 करोड़ वर्ग फुट स्पेस GCCs ने लीज पर लिया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत के ग्रेड-ए (Grade A) ऑफिस बाजार में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की मांग लगातार बढ़ रही है. प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी ANAROCK की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही (H1 2026) में देश के सात प्रमुख शहरों में हुई कुल ऑफिस लीजिंग का 45% हिस्सा अकेले GCCs ने लिया. इस दौरान GCCs ने करीब 1.92 करोड़ वर्ग फुट (19.2 मिलियन वर्ग फुट) ऑफिस स्पेस लीज पर लिया, जबकि H1 2025 में उनका हिस्सा 41% था.
42.6 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की हुई लीजिंग
ANAROCK के अनुसार, H1 2026 में देश के सात प्रमुख शहरों में कुल 4.26 करोड़ वर्ग फुट (42.6 मिलियन वर्ग फुट) ग्रॉस ऑफिस लीजिंग दर्ज की गई. इसमें से करीब 1.92 करोड़ वर्ग फुट स्पेस GCCs ने लीज पर लिया. पिछले साल की समान अवधि में कुल 3.82 करोड़ वर्ग फुट लीजिंग हुई थी, जिसमें GCCs की हिस्सेदारी 1.58 करोड़ वर्ग फुट थी.
दक्षिण भारत बना GCCs का सबसे बड़ा केंद्र
रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद GCCs के सबसे पसंदीदा बाजार बने हुए हैं.
- बेंगलुरु में H1 2026 के दौरान 1.08 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की ग्रॉस लीजिंग हुई, जिसमें GCCs की हिस्सेदारी 70% यानी करीब 75.5 लाख वर्ग फुट रही.
- चेन्नई में कुल 32 लाख वर्ग फुट लीजिंग में GCCs का हिस्सा 55% (करीब 17.5 लाख वर्ग फुट) रहा.
- हैदराबाद में 64 लाख वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की लीजिंग हुई, जिसमें GCCs ने 48% यानी करीब 30.5 लाख वर्ग फुट स्पेस लिया.
भारत अब वैश्विक कंपनियों का पसंदीदा GCC हब
ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि यह केवल अल्पकालिक मांग नहीं, बल्कि भारत के ऑफिस बाजार में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है. बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब इंजीनियरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फाइनेंस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ऑपरेशंस जैसे प्रमुख कार्यों के लिए भारत स्थित GCCs का तेजी से विस्तार कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत का बड़ा टैलेंट पूल, बेहतर परिचालन क्षमता और विकसित ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले वर्षों में भी GCCs की मांग को मजबूत बनाए रखेगा.
नेट ऑफिस लीजिंग में 2% की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, H1 2026 में ग्रेड-ए नेट ऑफिस एब्जॉर्प्शन (Net Absorption) बढ़कर 2.74 करोड़ वर्ग फुट (27.44 मिलियन वर्ग फुट) हो गया, जो H1 2025 के 2.68 करोड़ वर्ग फुट की तुलना में 2% अधिक है. इस दौरान बेंगलुरु और हैदराबाद ने मिलकर कुल नेट लीजिंग का 49% हिस्सा हासिल किया. बेंगलुरु में नेट लीजिंग 26% बढ़कर 82.7 लाख वर्ग फुट रही और हैदराबाद में यह 24% बढ़कर 52 लाख वर्ग फुट पहुंच गई. वहीं, मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में नेट लीजिंग 4% और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 15% घट गई.
नए ऑफिस स्पेस की सप्लाई घटी
H1 2026 के दौरान नए ऑफिस स्पेस की सप्लाई में कमी दर्ज की गई. इस अवधि में करीब 2.21 करोड़ वर्ग फुट (22.15 मिलियन वर्ग फुट) नए ऑफिस स्पेस का निर्माण पूरा हुआ, जबकि H1 2025 में यह आंकड़ा 2.45 करोड़ वर्ग फुट था. यानी नए ऑफिस स्पेस की सप्लाई में सालाना आधार पर 10% की गिरावट आई. ANAROCK का कहना है कि डेवलपर्स अब मांग के अनुरूप ही नई परियोजनाएं बाजार में ला रहे हैं, जिससे सप्लाई और डिमांड के बीच बेहतर संतुलन बना हुआ है.
खाली ऑफिस स्पेस घटा, किराए बढ़े
मजबूत मांग के कारण देश के सात प्रमुख शहरों में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की औसत वैकेंसी घटकर 15% रह गई, जो H1 2025 में 16.3% थी. बेंगलुरु में वैकेंसी 12.4% से घटकर 10.8% और हैदराबाद में 26.6% से घटकर 23.5% पर आ गई. हालांकि, हैदराबाद में अभी भी सात प्रमुख शहरों में सबसे अधिक वैकेंसी दर्ज की गई.
ऑफिस किराए में 9% का इजाफा
ANAROCK की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रीमियम ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की मजबूत मांग के चलते सात प्रमुख शहरों में औसत मासिक ऑफिस किराया सालाना आधार पर 9% बढ़कर 88 रुपये प्रति वर्ग फुट से 96 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गया. बेंगलुरु, NCR और हैदराबाद में ऑफिस किराए में 10% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई.
IT के अलावा अन्य सेक्टरों से भी बढ़ी मांग
रिपोर्ट के अनुसार, IT और ITeS सेक्टर के अलावा बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं (BFSI), मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल कंपनियां और को-वर्किंग ऑपरेटर्स ने भी ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ाई है. H1 2026 में IT/ITeS सेक्टर की ऑफिस लीजिंग में हिस्सेदारी 26% रही, जबकि फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की हिस्सेदारी 25% तक पहुंच गई. इससे साफ है कि भारत के ऑफिस बाजार में मांग अब पहले की तुलना में अधिक विविध (Diversified) हो चुकी है, हालांकि GCCs अभी भी इस ग्रोथ के सबसे बड़े चालक बने हुए हैं.
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