होम / बिजनेस / RBI का बड़ा फैसला: जब्त मकान और जमीन 7 साल में बेचनी होगी, बैंकों के लिए नए नियम लागू
RBI का बड़ा फैसला: जब्त मकान और जमीन 7 साल में बेचनी होगी, बैंकों के लिए नए नियम लागू
RBI के नए निर्देशों के तहत बैंक अब फंसे कर्ज की वसूली के दौरान अपने कब्जे में आई अचल संपत्तियों को लंबे समय तक अपने पास नहीं रख सकेंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
फंसे कर्ज (NPA) की वसूली प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. अब कर्ज की वसूली के दौरान जब्त की गई मकान, जमीन और अन्य अचल संपत्तियों का निपटान अधिकतम 7 साल के भीतर करना अनिवार्य होगा. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इन संपत्तियों की बिक्री सार्वजनिक नीलामी के जरिए जल्द से जल्द की जानी चाहिए. यह नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा.
NPA की वसूली के लिए RBI का नया नियम
RBI के नए निर्देशों के तहत बैंक अब फंसे कर्ज की वसूली के दौरान अपने कब्जे में आई अचल संपत्तियों को लंबे समय तक अपने पास नहीं रख सकेंगे. केंद्रीय बैंक का मानना है कि ऐसी संपत्तियों का समयबद्ध निपटान होने से बैंकों की पूंजी तेजी से मुक्त होगी और उसे उत्पादक गतिविधियों में लगाया जा सकेगा.
7 साल के भीतर करना होगा संपत्तियों का निपटान
संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक अपनी नीति के तहत चिन्हित गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (SNFA) का निपटान अधिकतम 7 साल के भीतर करेंगे. RBI ने साफ किया है कि इस समयसीमा का पालन सभी बैंकों के लिए अनिवार्य होगा, ताकि जब्त संपत्तियां वर्षों तक बिना उपयोग के पड़ी न रहें.
सार्वजनिक नीलामी के जरिए होगी बिक्री
केंद्रीय बैंक ने निर्देश दिया है कि जब्त की गई अचल संपत्तियों की बिक्री सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से की जाए. इस दौरान बैंकों को SARFAESI अधिनियम, 2002 के तहत निर्धारित नीलामी प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े सभी नियमों का पालन करना होगा.
SARFAESI कानून के तहत लागू होंगे नियम
RBI के ये निर्देश सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट (SARFAESI) अधिनियम के तहत जब्त की गई संपत्तियों पर लागू होंगे. इस कानून के तहत बैंक उन उधारकर्ताओं की संपत्तियां अपने कब्जे में लेते हैं, जो समय पर कर्ज का भुगतान नहीं कर पाते.
1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे नए दिशानिर्देश
RBI ने कहा है कि यह व्यवस्था चिन्हित गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (SNFA) के लिए तैयार किए गए नए प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क का हिस्सा है. सभी बैंक और वित्तीय संस्थान इन संशोधित नियमों का पालन 1 अक्टूबर 2026 से करेंगे.
क्यों लिया गया यह फैसला?
केंद्रीय बैंक का कहना है कि बैंकों का मुख्य काम रियल एस्टेट का स्वामित्व रखना या संपत्तियों का कारोबार करना नहीं है. इसलिए कर्ज वसूली के दौरान जब्त की गई संपत्तियों को जल्द बेचकर पूंजी को बैंकिंग गतिविधियों में वापस लाना जरूरी है. इससे बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी, फंसे कर्ज के मामलों का तेजी से निपटान होगा और वित्तीय प्रणाली की कार्यक्षमता भी बेहतर होगी.
टैग्स