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2047 तक GDP के 150% तक पहुंच सकता है भारत का गैर-सरकारी कर्ज: Crisil
Crisil का मानना है कि सिक्योरिटाइजेशन और म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को विकसित करने से पूंजी का बेहतर पुनर्चक्रण होगा. इससे शहरी बुनियादी ढांचे के लिए फंडिंग बढ़ेगी और सरकार पर वित्तीय बोझ भी कम होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए निजी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर वित्तपोषण की जरूरत होगी. इसी वजह से देश का गैर-सरकारी (Non-Sovereign) कर्ज मौजूदा करीब 84% GDP से बढ़कर 2047 तक लगभग 150% GDP तक पहुंच सकता है. रेटिंग एजेंसी Crisil की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंकों के साथ-साथ डेट कैपिटल मार्केट की भूमिका भी काफी अहम होगी.
विकसित देशों के बराबर पहुंच सकता है कर्ज का स्तर
Crisil का कहना है कि यदि भारत की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ती है, तो गैर-सरकारी कर्ज का स्तर उन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समान हो सकता है, जहां आर्थिक विस्तार के दौर में कर्ज का अनुपात काफी अधिक रहा था. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, यूरो क्षेत्र और जापान जैसे देश शामिल हैं.
अकेले बैंक पूरी नहीं कर पाएंगे फंडिंग की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत की बढ़ती कर्ज जरूरतों को केवल बैंकिंग सिस्टम पूरा नहीं कर पाएगा. हाल के वर्षों में जमा की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है, जबकि मार्च 2026 तक बैंकों का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 82% से अधिक पहुंच चुका है. इससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता पर दबाव बढ़ा है. ऐसे में कॉरपोरेट बॉन्ड, सिक्योरिटाइज्ड इंस्ट्रूमेंट्स, म्युनिसिपल बॉन्ड और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे डेट कैपिटल मार्केट के विभिन्न माध्यमों की भूमिका भविष्य में और महत्वपूर्ण होगी.
भारत का डेट मार्केट अभी काफी छोटा
Crisil की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक भारत का डेट कैपिटल मार्केट GDP के केवल 22% के बराबर था, जबकि सकल बैंक ऋण GDP के 62% तक पहुंच चुका था. इससे साफ है कि भारत में डेट मार्केट की गहराई अभी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है.
चुनिंदा कंपनियों तक सीमित है कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार अभी कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित है. AAA और AA रेटिंग वाले बॉन्ड कुल बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड का 80% से अधिक हिस्सा रखते हैं. वहीं, वित्त वर्ष 2022-23 के बाद से सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों और वित्तीय संस्थानों का वार्षिक बॉन्ड जारी करने में 80% से ज्यादा योगदान रहा है. इसके अलावा, रिटेल और विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कुल बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड में 10% से भी कम है, जो इस बाजार में व्यापक भागीदारी की कमी को दर्शाता है.
क्या हैं Crisil के सुझाव?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अपने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का विस्तार करने के लिए बीमा कंपनियों, पेंशन फंड और अन्य दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ानी होगी. साथ ही नियामकीय सुधारों के जरिए A और BBB रेटिंग वाले बॉन्ड में भी निवेश को प्रोत्साहित करना होगा.
Crisil का मानना है कि सिक्योरिटाइजेशन और म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को विकसित करने से पूंजी का बेहतर पुनर्चक्रण होगा. इससे शहरी बुनियादी ढांचे के लिए फंडिंग बढ़ेगी और सरकार पर वित्तीय बोझ भी कम होगा.
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