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निवेश के लिहाज से गुजरात नंबर-1, महाराष्ट्र और तमिलनाडु दूसरे-तीसरे स्थान पर: नीति आयोग
नीति आयोग का कहना है कि राज्यों में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार होने से घरेलू और विदेशी निवेश में बढ़ोतरी होगी. इससे औद्योगिकीकरण को गति मिलेगी, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
देश में निवेश को बढ़ावा देने और राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी एवं सहकारी संघवाद को मजबूत करने की दिशा में नीति आयोग (NITI Aayog) ने पहली बार 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स' (Investment Friendliness Index-IFI) जारी किया है. इस रैंकिंग में गुजरात निवेश के लिए सबसे अनुकूल राज्य बनकर उभरा है. महाराष्ट्र दूसरे और तमिलनाडु तीसरे स्थान पर रहे, जबकि गोवा और ओडिशा भी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हैं. सरकार का मानना है कि यह इंडेक्स राज्यों में निवेश से जुड़े सुधारों को गति देगा और भारत को वैश्विक निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा.
28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेशों का हुआ मूल्यांकन
इस इंडेक्स में देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन किया गया है. इसके लिए आठ प्रमुख स्तंभों और 84 संकेतकों (Indicators) को आधार बनाया गया. इनमें बुनियादी ढांचा, कारोबारी माहौल, संसाधनों की उपलब्धता, सरकारी नीतियां, नियामकीय सुगमता, संस्थागत व्यवस्था, वित्तीय स्थिति और पर्यावरणीय मजबूती जैसे पहलुओं का आकलन किया गया. रिपोर्ट तैयार करने के लिए सरकारी आंकड़ों के साथ निवेशकों से प्राप्त फीडबैक और सर्वेक्षण को भी शामिल किया गया है.
चार श्रेणियों में बांटे गए राज्य
कुल स्कोर के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है. 50 से अधिक अंक हासिल करने वाले राज्यों को टॉप परफॉर्मर्स की श्रेणी में रखा गया है. 45 से 50 अंक प्राप्त करने वाले राज्यों को फ्रंटरनर्स, 40 से 45 अंक के बीच रहने वाले राज्यों को इमर्जिंग परफॉर्मर्स, जबकि 40 से कम अंक पाने वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एस्पायरिंग स्टेट्स की श्रेणी में रखा गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 15 राज्य फ्रंटरनर्स श्रेणी में शामिल हुए हैं, जबकि 8-8 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इमर्जिंग परफॉर्मर्स तथा एस्पायरिंग स्टेट्स श्रेणी में हैं.
बड़े राज्यों में गुजरात नंबर-1
बेहतर तुलना के लिए नीति आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तीन अलग-अलग समूहों में भी बांटा है. बड़े राज्यों की श्रेणी में गुजरात ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि महाराष्ट्र दूसरे और तमिलनाडु तीसरे स्थान पर रहे. पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में उत्तराखंड शीर्ष पर रहा. इसके बाद असम और हिमाचल प्रदेश का स्थान रहा. वहीं, केंद्रशासित प्रदेश और सिटी स्टेट्स की श्रेणी में गोवा पहले, दिल्ली दूसरे और चंडीगढ़ तीसरे स्थान पर रहा.
राज्यों की भूमिका सबसे अहम
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के निवेश माहौल को मजबूत बनाने में राज्य सरकारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. राष्ट्रीय स्तर पर बनाई गई आर्थिक नीतियां निवेश का व्यापक ढांचा तैयार करती हैं, लेकिन औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचा, नियामकीय दक्षता, संस्थागत क्षमता और नीतियों की स्थिरता जैसे कारक निवेशकों के फैसलों को सीधे प्रभावित करते हैं.
नीति आयोग का कहना है कि राज्यों में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार होने से घरेलू और विदेशी निवेश में बढ़ोतरी होगी. इससे औद्योगिकीकरण को गति मिलेगी, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. यह 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
सिर्फ रैंकिंग नहीं, सुधार का रोडमैप
नीति आयोग के मुताबिक, यह इंडेक्स केवल राज्यों की रैंकिंग करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसे सुधारों को आगे बढ़ाने वाले एक रणनीतिक उपकरण के रूप में तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य राज्यों की ताकत और कमजोरियों की पहचान करना, एक-दूसरे से सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना और बेहतर नीतियों व प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
रिपोर्ट में प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश की विस्तृत प्रोफाइल भी शामिल की गई है. इसमें समान भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों वाले राज्यों के साथ तुलना करते हुए उनकी उपलब्धियों, निवेशकों की प्रतिक्रिया और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया है.
निवेश माहौल को और मजबूत करने की तैयारी
नीति आयोग ने कहा कि इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स को एक सतत सुधारात्मक ढांचे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके. इसका अंतिम उद्देश्य भारत में अधिक पारदर्शी, स्थिर और निवेश-अनुकूल माहौल तैयार करना, देश को वैश्विक निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनाना और समावेशी एवं टिकाऊ आर्थिक विकास को गति देना है.
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