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IPO के मामले में दुनिया में नंबर-1 बना भारत, FY26 में प्राइमरी मार्केट से जुटाए 13.6 लाख करोड़ रुपये: सेबी

भारत ने FY26 में IPO की संख्या के मामले में वैश्विक स्तर पर अपनी शीर्ष स्थिति बरकरार रखी. वहीं, फंड जुटाने के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार रहा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में IPO के मामले में एक बार फिर दुनिया में अपनी बादशाहत कायम रखी है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की FY26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत IPO की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा बाजार रहा. हालांकि, जुटाई गई रकम के लिहाज से भारत तीसरे स्थान पर रहा. SEBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश के प्राइमरी मार्केट से कुल 13.6 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई. यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 4.4 फीसदी कम है. हालांकि, IPO, फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) और राइट्स इश्यू के जरिए पब्लिक इक्विटी फंडरेजिंग 11.7 फीसदी बढ़कर 2.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई.

IPO से 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए

FY26 में IPO और FPO के जरिए कुल फंड जुटाने की राशि करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल के लगभग बराबर है. इस दौरान नई लिस्टेड कंपनियों की संख्या 320 से बढ़कर 366 हो गई. इससे प्राइमरी इक्विटी मार्केट में मजबूत गतिविधि का संकेत मिलता है. मेनबोर्ड IPO के जरिए कंपनियों ने FY26 में 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8.9 फीसदी अधिक है.

Preferential Issues से 1.48 लाख करोड़ रुपये जुटे

प्राइमरी मार्केट में कंपनियों ने पूंजी जुटाने के लिए अन्य रास्तों का भी इस्तेमाल किया. वित्त वर्ष 2025-26 में Preferential Issues के जरिए 1,48,219 करोड़ रुपये जुटाए गए. इसमें सालाना आधार पर 76.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, 36 Qualified Institutional Placements (QIPs) के जरिए 67,853 करोड़ रुपये जुटाए गए. FY25 में 91 QIPs के जरिए 1,35,597 करोड़ रुपये जुटाए गए थे.

SME कंपनियों की भी रही मजबूत भागीदारी

SME सेगमेंट में भी प्राइमरी मार्केट की गतिविधियां मजबूत रहीं. FY26 में कुल 257 कंपनियां SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुईं और इनके जरिए 11,587 करोड़ रुपये जुटाए गए. यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 18.1 फीसदी अधिक है.

SEBI ने किए कई बड़े बदलाव

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि साल के दौरान प्राइमरी इक्विटी मार्केट ने अपनी मजबूती और गतिशीलता बरकरार रखी. भू-राजनीतिक संघर्ष, व्यापारिक तनाव, पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बावजूद बाजार लचीला बना रहा.

पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाने और निवेशकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए SEBI ने कई कदम उठाए. इनमें न्यूनतम पब्लिक ऑफर फ्रेमवर्क में बदलाव प्रमुख रहा. इसके तहत पब्लिक फ्लोट की जरूरतों को इश्यू के आकार के अनुरूप किया गया. इसके अलावा, बड़े इश्यू जारी करने वाली कंपनियों के लिए अनिवार्य 25 फीसदी न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग हासिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई.

SEBI ने न्यू-एज कंपनियों के संस्थापकों को IPO से पहले दिए गए Employee Stock Option Plans (ESOPs) को बनाए रखने की भी अनुमति दी. नियामक के मुताबिक, इससे कंपनियों में लंबे समय के प्रोत्साहन और सार्वजनिक शेयरधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी.

डेट मार्केट से जुटाई गई सबसे ज्यादा पूंजी

FY26 में प्राइमरी मार्केट से पूंजी जुटाने में डेट इश्यू सबसे बड़ा हिस्सा रहा. हालांकि, डेट इश्यू के जरिए जुटाई गई रकम 8.4 फीसदी घटकर 9,11,078 करोड़ रुपये रह गई. इसमें प्राइवेट प्लेसमेंट की हिस्सेदारी 98.8 फीसदी रही. वहीं, पब्लिक डेट इश्यू 39.2 फीसदी बढ़कर 11,343 करोड़ रुपये पहुंच गए.

म्युनिसिपल बॉन्ड और AIF में भी बढ़ी गतिविधि

वित्त वर्ष के दौरान 14 म्युनिसिपल बॉन्ड इश्यू के जरिए 1,756 करोड़ रुपये जुटाए गए. SEBI ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को पारंपरिक Probability of Default मॉडल के साथ Expected Loss आधारित रेटिंग स्केल अपनाने की अनुमति दी, ताकि शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड को बढ़ावा दिया जा सके. वहीं, Alternative Investment Fund (AIF) इंडस्ट्री का भी विस्तार जारी रहा. 31 मार्च 2026 तक रजिस्टर्ड AIF की संख्या बढ़कर 1,829 हो गई, जो एक साल पहले 1,526 थी. इस दौरान AIF में कुल कमिटमेंट 25.6 फीसदी बढ़कर 16,94,262 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 13,49,051 करोड़ रुपये था.

SEBI चेयरमैन ने कहा कि नियामक की सोच अब 'Resilience by Design' की दिशा में आगे बढ़ रही है. इसके तहत बेहतर रेगुलेशन, AI आधारित निगरानी, पुराने नियमों के आधुनिकीकरण और बाजार प्रतिभागियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है.


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