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तेल संकट के बीच बड़ी खबर! ईरान-ओमान में होर्मुज पर समझौते का ढांचा तैयार
मौजूदा तनाव के बावजूद इस रास्ते से ऊर्जा की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन सप्लाई प्रभावित हुई है. अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की उपलब्धता बढ़ सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत में अहम प्रगति होने की खबर है. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता हसन गशघावी के मुताबिक, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते का सामान्य ढांचा तैयार हो चुका है. हालांकि, अंतिम शर्तों पर अभी फैसला होना बाकी है और समझौते को ईरान के उच्च स्तर से मंजूरी मिलनी है. अगर इस समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. भारत समेत एशिया के कई बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह राहत की खबर होगी.
कब पूरी तरह खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल यह साफ नहीं है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह कब खुलेगा. ईरान ने संकेत दिया है कि इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी से जुड़ा हुआ है. दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से नाकाबंदी हटाने को लेकर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि अस्थायी रास्तों के जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही के लिए किसी विशेष मंजूरी, अनुमति या शुल्क की जरूरत नहीं होगी. ऐसे में फिलहाल पूरी तरह सामान्य आवाजाही बहाल होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है.
जहाजों की आवाजाही पर ईरान का नियंत्रण?
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के प्रवेश पर नियंत्रण ईरान के पास रह सकता है. वहीं, जहाजों के बाहर निकलने की निगरानी ईरान और ओमान संयुक्त रूप से कर सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, जहाजों की आवाजाही के लिए एक केंद्रीय समुद्री मार्ग तय किया जा सकता है. वहीं, फिलहाल सीमित रूप से इस्तेमाल किए जा रहे दो अन्य रास्तों को एक निश्चित समय के बाद बंद किया जा सकता है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी इस सप्ताह कहा था कि ओमान के साथ इस मुद्दे पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है.
दुनिया के लिए क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है. दुनिया की बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही इसी समुद्री मार्ग से होती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल बाजार पर तुरंत असर डाल सकता है.
मौजूदा तनाव के बावजूद इस रास्ते से ऊर्जा की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन सप्लाई प्रभावित हुई है. अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की उपलब्धता बढ़ सकती है.
भारत के लिए भी राहत की उम्मीद
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है. ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई सामान्य होने पर भारतीय रिफाइनरों और ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है.
सप्लाई बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. इसका असर आगे चलकर भारत के आयात बिल, रुपये और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही कितनी जल्दी और कितनी पूरी तरह सामान्य होती है.
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