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RBI ने 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाया रेपो रेट, अब महंगे होंगे होम और कार लोन
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने करीब 44 महीने बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है. महंगाई के बढ़ते दबाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का फैसला किया है. इसके साथ ही रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है. ब्याज दर बढ़ने का सीधा असर नए कर्ज की लागत पर पड़ेगा, जबकि फ्लोटिंग रेट वाले होम और कार लोन की EMI भी बढ़ सकती है.
फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ी ब्याज दर
RBI ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया था. इसके बाद लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया. वहीं, साल 2025 में RBI ने फरवरी से दिसंबर के बीच रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी. अब महंगाई के दबाव के बीच केंद्रीय बैंक ने रुख बदलते हुए रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. हालांकि, महंगाई को लेकर जोखिम बढ़ा है, जिसके चलते मौद्रिक नीति में सख्ती का फैसला लिया गया.
महंगाई बढ़ने की क्या है वजह?
मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव देखने को मिला है. इसका असर केवल ईंधन की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक गैस, खाद और दूसरी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर भी पड़ा है. इससे महंगाई के मोर्चे पर दबाव बढ़ा है.
इसके अलावा अल नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया है. इससे आने वाले समय में खाद्य कीमतों पर भी दबाव बने रहने की आशंका है. RBI ने अनुमान जताया है कि अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन करीब 5.8 फीसदी रह सकती है.
होम और कार लोन की EMI पर क्या होगा असर?
रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है. इसका असर बैंकिंग सिस्टम की ब्याज दरों पर पड़ सकता है. खास तौर पर फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम लोन और अन्य रिटेल लोन की EMI बढ़ सकती है. हालांकि, किसी ग्राहक की EMI में वास्तविक बढ़ोतरी उसके लोन की राशि, बची हुई अवधि, ब्याज दर और बैंक द्वारा दर में किए गए बदलाव पर निर्भर करेगी. यानी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक की EMI भी ठीक 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ जाएगी. कार लोन समेत अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर भी इसका असर पड़ सकता है. वहीं फिक्स्ड रेट वाले मौजूदा लोन पर तुरंत असर जरूरी नहीं है.
आगे भी बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
RBI के रुख से संकेत मिलता है कि अगर महंगाई का दबाव आगे भी बना रहता है तो दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. केंद्रीय बैंक का फोकस फिलहाल महंगाई को नियंत्रित रखने के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने पर है.
7.1 फीसदी रह सकती है GDP ग्रोथ
RBI के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है. पहली तिमाही में वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही. केंद्रीय बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी रखा है.
RBI के अनुमान के मुताबिक दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रह सकती है. वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी रखा गया है.
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