होम / साक्षात्कार / महिला सुरक्षा से आर्थिक सशक्तिकरण तक, लता गुप्ता ने बताया दिल्ली महिला आयोग का पूरा रोडमैप
महिला सुरक्षा से आर्थिक सशक्तिकरण तक, लता गुप्ता ने बताया दिल्ली महिला आयोग का पूरा रोडमैप
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि आयोग का फोकस केवल शिकायतों के निपटारे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं तक सीधे पहुंच बनाने, उन्हें कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने, घरेलू हिंसा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी समस्याओं से निपटने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी रहेगा.
रितु राणा 2 hours ago
करीब दो साल तक निष्क्रिय रहने के बाद दिल्ली महिला आयोग एक बार फिर सक्रिय भूमिका में लौट रहा है. भाजपा की वरिष्ठ नेत्री लता गुप्ता ने आयोग की नई अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल ली है. उनके सामने महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, महिलाओं के अधिकार और लंबित शिकायतों के निपटारे जैसी कई बड़ी चुनौतियां हैं. ऐसे में सवाल है कि नए नेतृत्व में दिल्ली महिला आयोग की प्राथमिकताएं क्या होंगी और महिलाओं तक आयोग की पहुंच को किस तरह आसान बनाया जाएगा. इन तमाम मुद्दों पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने BW Businessworld हिंदी से खास बातचीत में अपनी प्राथमिकताओं और आगे की कार्ययोजना के बारे में विस्तार से बात की. प्रस्तुत हैं बातचीत के कुश अंश:
सवाल: आपने हाल ही में दिल्ली महिला आयोग की कमान संभाली है. महिला सुरक्षा को लेकर आपकी सबसे पहली प्राथमिकताएं क्या रहेंगी?
लता गुप्ता: सबसे पहली प्राथमिकता दिल्ली की हर महिला को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है. यदि किसी महिला के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा हो रही है, तो उसे सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराना आयोग की जिम्मेदारी होगी. यदि कहीं भेदभाव की स्थिति सामने आती है, तो उसकी बात सुनी जाए और उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए.
हमारा प्रयास रहेगा कि हर महिला को यह महसूस हो कि दिल्ली महिला आयोग वास्तव में उसके लिए बना है और वह बिना किसी डर या झिझक के अपनी समस्या आयोग तक पहुंचा सकती है. आयोग की सेवाओं को महिलाओं के लिए अधिक सरल, सुलभ और भरोसेमंद बनाना हमारी प्राथमिकता होगी.
सवाल: आप दिल्ली नगर निगम में दो बार निगम पार्षद रही हैं और भाजपा महिला मोर्चा से भी लंबे समय से जुड़ी रही हैं. क्या आपका राजनीतिक और जनप्रतिनिधि के रूप में अनुभव महिला आयोग के काम में आपके लिए मददगार होगा?
लता गुप्ता: बिल्कुल. जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ जब मैंने क्षेत्र में काम किया, तब महिलाओं की समस्याओं को बहुत करीब से समझने और महसूस करने का अवसर मिला. चाहे कार्यस्थल की बात हो, किसी महिला शिक्षक की अपने विद्यालय से जुड़ी समस्या हो, कॉलेज की छात्राओं की परेशानी हो या सड़क पर चलने वाली हमारी बहनों को होने वाली दिक्कतें, मैंने इन समस्याओं को नजदीक से देखा है.
कई बार महिलाएं दो बातें सोचती हैं, ‘मैं अपनी समस्या बताऊंगी तो क्या होगा?’ और ‘अगर मैंने आवाज उठाई तो क्या होगा?’ आयोग का काम यही है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया जाए कि अपनी समस्या सही स्थान तक पहुंचाना उसका समाधान पाने की दिशा में पहला कदम है.
चुप रहना किसी समस्या को खत्म नहीं करता, बल्कि कई बार उसे बढ़ावा देता है. इसलिए हम महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास पैदा करने का प्रयास करेंगे. वे अपनी समस्याएं आयोग तक लेकर आएं और जरूरत पड़ने पर आयोग भी उनके पास पहुंचे, इस व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाया जाएगा.
सवाल: दिल्ली में महिला सुरक्षा लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है. कई बार चुनावों में भी महिला सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा रहा है. आप इसे किस तरह देखती हैं?
लता गुप्ता: आपने बिल्कुल सही कहा. दिल्ली देश की राजधानी है और पूरे देश का दर्पण भी है. दिल्ली महिला आयोग के गठन का उद्देश्य यही है कि राजधानी की आधी आबादी यानी महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की चिंता की जाए.
मैं मानती हूं कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता केवल महिलाओं में ही नहीं, बल्कि हर नागरिक में होनी चाहिए. दिल्ली में हम विशेष रूप से बड़े अभियानों और कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिशा में काम करेंगे. चाहे निजी संस्थान हों, सरकारी संस्थाएं हों या सार्वजनिक स्थान, हर जगह महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा.
हमारा उद्देश्य यह है कि जब कोई बेटी घर से पढ़ाई या नौकरी के लिए बाहर निकले तो उसके परिवार को उसके सुरक्षित होने को लेकर डर महसूस न हो. हर महिला और बेटी के भीतर आत्मविश्वास पैदा हो और वह खुद को सुरक्षित महसूस करे.
सवाल: आने वाले कुछ महीनों में दिल्ली महिला आयोग में कौन से नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे महिला सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके?
लता गुप्ता: दिल्ली देश की राजधानी है और यहां देश के अलग-अलग राज्यों और हिस्सों से बच्चे और बच्चियां पढ़ाई तथा रोजगार के लिए आते हैं. हमारी पहली प्राथमिकता यह होगी कि यदि किसी भी महिला या छात्रा को किसी प्रकार की समस्या आती है तो वह आसानी से आयोग तक अपनी बात पहुंचा सके और जरूरत पड़ने पर आयोग भी उसके पास पहुंचे.
सुरक्षा की दृष्टि से हम ऐसे स्थानों की जानकारी जुटाएंगे जिन्हें लोग असुरक्षित मानते हैं या जहां रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. ऐसे ‘ब्लैक स्पॉट’ और अंधेरे वाले स्थानों की जानकारी स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लेकर संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि वहां जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके.
हम 360 डिग्री दृष्टिकोण के साथ काम करना चाहते हैं. हमारी कोशिश होगी कि दिल्ली में रहने वाली हर बहन-बेटी की समस्या आयोग तक पहुंचे और उसकी समस्या का जल्द से जल्द समाधान हो.
सवाल: करीब दो वर्षों तक आयोग निष्क्रिय रहा. ऐसे में कई मामले लंबित हो सकते हैं. उनके निपटारे के लिए आपकी क्या रणनीति है?
लता गुप्ता: यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है. जिस उद्देश्य के लिए महिला आयोग का गठन किया गया था, उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आयोग का सक्रिय रहना बेहद जरूरी है. लंबे समय तक आयोग के निष्क्रिय रहने से महिलाओं की समस्याओं के समाधान में निश्चित रूप से बाधा आई.
मैं भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी का धन्यवाद करना चाहती हूं कि सरकार बनने के बाद आयोग को फिर से सक्रिय करने की दिशा में तत्काल कदम उठाए गए. महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. रश्मि जी ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
हमारा उद्देश्य है कि आयोग के दरवाजे हर महिला के लिए खुले रहें. कोई भी महिला अपनी समस्या यहां गोपनीयता और विश्वास के साथ बता सके. जरूरत के अनुसार उसे कानूनी सहायता, परामर्श और अन्य आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाए. हमारी लीगल टीम और काउंसलर्स के माध्यम से महिलाओं को उनकी समस्या के समाधान का उचित रास्ता दिखाया जाएगा.
सवाल: घरेलू हिंसा महिलाओं के सामने एक बड़ी समस्या है. इससे निपटने के लिए आयोग की क्या कार्ययोजना होगी?
लता गुप्ता: घरेलू हिंसा आज भी एक गंभीर समस्या है. इसके पीछे कई कारण हैं. घरेलू हिंसा का असर केवल शारीरिक नहीं होता, बल्कि महिलाएं मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी प्रभावित होती हैं. कई मामलों में आर्थिक निर्भरता भी उन्हें अपनी आवाज उठाने से रोकती है. इसके अलावा नशे की समस्या भी कई परिवारों में घरेलू हिंसा का एक बड़ा कारण बनती है.
हम घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और नशे से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाएंगे. हाल ही में हमने कुछ एजेंसियों को पत्र भी लिखा है और यह जानकारी मांगी है कि उनके संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति यानी Internal Committee का गठन हुआ है या नहीं. यदि समिति बनी है, तो वहां कितनी शिकायतें आई हैं और उनका किस प्रकार निपटारा किया गया है, इसकी जानकारी भी ली जा रही है.
इन सभी प्रयासों के माध्यम से हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि महिलाओं को उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी हो.
सवाल: दिल्ली महिला आयोग, पुलिस, सरकारी एजेंसियों और सामाजिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए क्या नई पहल की जा रही है?
लता गुप्ता: पुलिस हमारी सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी संस्थाओं में से एक है. किसी पीड़िता की समस्या को समझना, प्राथमिकी दर्ज करना, जांच करना और उसे आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. यदि किसी मामले में कार्रवाई नहीं होती है, तो आयोग संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने और मामले को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा.
इसके अलावा हम आरडब्ल्यूए, निजी कंपनियों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ भी मिलकर काम करेंगे. हमारा प्रयास होगा कि दिल्ली के किसी भी कोने में रहने वाली महिला यदि किसी समस्या का सामना कर रही है तो उसे अपने घर के नजदीक ही सहायता मिल सके.
हमारी आगामी योजना में स्थानीय स्तर पर सहायता केंद्रों को मजबूत करने के साथ-साथ काउंसलर्स और कानूनी सलाहकारों की व्यवस्था करने पर भी जोर रहेगा, ताकि महिलाएं छोटी-छोटी इकाइयों के स्तर पर ही अपनी समस्या दर्ज करा सकें और उन्हें उचित मार्गदर्शन मिल सके.
सवाल: महिला सुरक्षा के साथ-साथ उनका आर्थिक सशक्तिकरण भी बेहद जरूरी है. इस दिशा में आयोग क्या काम करेगा?
लता गुप्ता: महिला सशक्तिकरण केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है. आर्थिक आत्मनिर्भरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. आयोग महिलाओं की समस्याओं को 360 डिग्री के दृष्टिकोण से देखते हुए उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी प्रयास करेगा.
हम स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करेंगे और महिलाओं को इनके गठन में सहयोग देंगे. सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने में भी आयोग सहयोगी की भूमिका निभाएगा.
महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता, मुद्रा ऋण जैसी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें. यदि कोई महिला सिलाई सीखना चाहती है या कोई अन्य कौशल हासिल करना चाहती है, तो उसे संबंधित प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ने का प्रयास भी किया जाएगा.
सवाल: कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं. इस समस्या से निपटने के लिए आयोग क्या ठोस कदम उठाएगा?
लता गुप्ता: कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम’, यानी पॉश कानून मौजूद है. इसके तहत महिलाओं को शिकायत दर्ज कराने और उसके समाधान का अधिकार दिया गया है.
सबसे बड़ी आवश्यकता जागरूकता की है. कई महिलाओं को यह जानकारी ही नहीं होती कि उनके लिए कानून में क्या प्रावधान किए गए हैं और वे अपनी शिकायत कहां दर्ज करा सकती हैं.
इसलिए हमारा पहला प्रयास जागरूकता बढ़ाना होगा. दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में जाकर महिलाओं को उनके अधिकारों और कानून में उपलब्ध सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जाएगी. साथ ही संस्थानों में आंतरिक शिकायत समितियों की व्यवस्था और उनकी प्रभावशीलता पर भी ध्यान दिया जाएगा.
सवाल: दिल्ली और देश की महिलाओं को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
लता गुप्ता: मैं अपनी हर बहन से केवल एक बात कहना चाहूंगी, आप अकेली नहीं हैं, आयोग आपके साथ है. आप खुद को कभी कमजोर न समझें. अपने भीतर आत्मविश्वास पैदा कीजिए और अपनी समस्या के खिलाफ आवाज उठाइए. जब तक हम खुद अपने सशक्तिकरण के लिए प्रयास नहीं करेंगे, तब तक चुनौतियां बनी रहेंगी. अपने आत्मविश्वास को हमेशा अपने साथ रखिए. यही आपकी सबसे बड़ी ताकत है. जब आप आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगी तो कोई भी आपको आसानी से रोक नहीं सकता.
टैग्स