होम / बिजनेस / मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ी राहत! सेमीकंडक्टर-ऑटो कंपनियों के नियम होंगे आसान, 60 दिनों में लागू होगा नया फ्रेमवर्क
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ी राहत! सेमीकंडक्टर-ऑटो कंपनियों के नियम होंगे आसान, 60 दिनों में लागू होगा नया फ्रेमवर्क
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान लागू किए जाएंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान लागू किए जाएंगे. सरकार का यह कदम देश में निवेश बढ़ाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
60 दिनों में बदलेंगे नियम
पीयूष गोयल ने टोक्यो में ‘निक्केई एशिया’ के साथ बातचीत में कहा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की इच्छुक दो बड़ी वैश्विक कंपनियों के साथ हाल में बातचीत हुई है. कंपनियों की ओर से नियमों और मंजूरी की प्रक्रिया को लेकर जताई गई चिंताओं का समाधान किया गया है. सरकार अब अगले दो महीनों में जरूरी नियमों में बदलाव कर उन्हें लागू करेगी, ताकि भारत में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को किसी तरह की नियामकीय बाधा का सामना न करना पड़े.
BIS की मंजूरी प्रक्रिया होगी आसान
सरकार भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मौजूदा फ्रेमवर्क को भी आसान बनाने पर काम कर रही है. इसका उद्देश्य कंपनियों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को सरल और तेज करना है. सरकार ऐसे सप्लायर्स से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रही है, जो मौजूदा व्यवस्था के तहत अलग-अलग मानकों के दायरे में आते हैं.
गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग की वास्तविक जरूरतों और निष्पक्ष व्यापार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में कंपनियां केवल दूसरे देशों से उत्पाद आयात करने की मांग कर सकती हैं, लेकिन ऐसी मांगों पर फैसला घरेलू उद्योग और निष्पक्ष व्यापार को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा.
सेमीकॉन 2.0 से 50 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी है. इसके तहत सरकार की योजना निजी क्षेत्र के साथ मिलकर अगले डेढ़ साल में सेमीकंडक्टर और इससे जुड़े उद्योगों में करीब 50 अरब डॉलर का निवेश शुरू कराने की है.
सरकार का मानना है कि आसान रेगुलेशन, तेज मंजूरी और बड़े निवेश से भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही ऑटोमोटिव कंपोनेंट और इससे जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों में भी वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बन सकता है.
‘प्लस वन’ रणनीति से आगे बढ़ने की कोशिश
भारत अब खुद को केवल कंपनियों के ‘चाइना प्लस वन’ विकल्प के तौर पर सीमित नहीं रखना चाहता. सरकार की कोशिश है कि देश में ऐसी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन तैयार हो, जो वैश्विक कंपनियों को लंबे समय के लिए भारत में उत्पादन स्थापित करने के लिए आकर्षित करे.
पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश और क्षमता निर्माण की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि मौजूदा पहल के बाद सरकार आगे ‘सेमीकंडक्टर 3.0’ की दिशा में भी बढ़ सकती है.
टैग्स