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‘व्यावसायिक स्वास्थ्य एक निवेश है’: डॉ. प्रकाश शेंडगे

ओम गगनगिरी हॉस्पिटल्स एंड ऑक्यूपेशनल हेल्थ सर्विसेज के संस्थापक और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. प्रकाशराव शेंडगे ने बताया, कार्यस्थल पर मोबाइल डायग्नोस्टिक्स किस तरह कारोबार के लिए उपयोगी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

रुहैल आमीन

BW बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में ओम गगनगिरी हॉस्पिटल्स एंड ऑक्यूपेशनल हेल्थ सर्विसेज के संस्थापक डॉ. प्रकाशराव शेंडगे ने कहा कि फैक्ट्रियों में मेडिकल जांच के दौरान बार-बार आने वाली समस्याओं ने उन्हें ऐसी डायग्नोस्टिक सुविधा तैयार करने के लिए प्रेरित किया, जो कार्यस्थलों तक पहुंच सके. उनका कहना है कि 2012 में शुरू हुआ यह बेड़ा अब पांच बसों तक पहुंच चुका है. वह इसके संचालन मॉडल, सुरक्षा उपायों और इस बात पर चर्चा करते हैं कि कर्मचारियों का स्वास्थ्य केवल कानूनी अनुपालन की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं होना चाहिए. 

मोबाइल मेडिकल चेक-अप सेवा के जरिए आप किस समस्या का समाधान करना चाहते थे?

सेवा शुरू करने से पहले मैं एक दशक से अधिक समय तक व्यावसायिक स्वास्थ्य जांच कर रहा था. कई जगहों पर उपयुक्त कमरे उपलब्ध नहीं होते थे. ऑडियोमेट्री के लिए साउंडप्रूफ जगह की जरूरत होती है, एक्स-रे के लिए सुरक्षित क्षेत्र और ECG जांच के लिए निजता और स्थिरता जरूरी होती है. अक्सर अस्थायी व्यवस्था पहले तैयार करनी पड़ती थी.

मुझे लगा कि इसका समाधान एक ऐसी पूर्ण डायग्नोस्टिक सुविधा है, जो कार्यस्थल तक जा सके और ग्राहक के परिसर में ही जांच उपलब्ध करा सके, जिससे समय की बचत हो. हमने 2012 में पहली बस शुरू की, इसके बाद 2015, 2018, 2020 और 2025 में अन्य यूनिट्स शुरू कीं.

यह बस पारंपरिक मोबाइल मेडिकल सुविधा से किस तरह अलग है?

कई मेडिकल वाहन मरीजों को ले जाने या सीमित दायरे की बुनियादी सेवाएं देने के लिए होते हैं. हमारी बस विशेष रूप से व्यावसायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में तैयार की गई है. इसमें रजिस्ट्रेशन, दृष्टि जांच, ऑडियोमेट्री, ब्लड सैंपल कलेक्शन, ECG, शारीरिक जांच, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट और डिजिटल चेस्ट एक्स-रे के लिए अलग-अलग स्टेशन हैं.

नियोक्ता पार्किंग की जगह और बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराता है. इसके बाद हम संगठन के स्वास्थ्य और सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जरूरी जांच साइट पर ही कर सकते हैं. इनमें दृष्टि और सुनने की जांच, ECG, फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच, एक्स-रे और रक्त एवं मूत्र की जांच शामिल हो सकती है. कर्मचारी की भूमिका से जुड़े जोखिमों के आधार पर विशेष जांच भी जोड़ी जाती हैं.

नियोक्ता के लिए इसका संचालन संबंधी क्या फायदा है?

एक पूरी जांच में आमतौर पर करीब 25 से 30 मिनट लगते हैं. अलग-अलग स्टेशनों पर विभिन्न जांच एक साथ की जा सकती हैं, इसलिए एक बस आमतौर पर पैकेज और साइट की परिस्थितियों के आधार पर एक दिन में करीब 120 से 150 कर्मचारियों की जांच कर सकती है.

सैकड़ों कर्मचारियों को अस्पताल भेजने में काम का समय प्रभावित हो सकता है और उत्पादन में व्यवधान आ सकता है. कार्यस्थल पर जांच होने से कर्मचारी कम समय गंवाकर वापस काम पर लौट सकते हैं. इस वजह से नियोक्ताओं को इस मॉडल को अपनाने के लिए राजी करने में मदद मिली, हालांकि शुरुआत में हमारी दरें पारंपरिक चेक-अप की तुलना में मामूली रूप से अधिक थीं.

प्रत्येक यूनिट की लागत कितनी है और आपने कितना विस्तार किया है?

प्रत्येक बस को तैयार करने और उसमें उपकरण लगाने में करीब 1 करोड़ रुपये की लागत आती है. हमने एक बस से शुरुआत की थी और अब पांच बसें संचालित कर रहे हैं. हमारा अनुमान है कि हमने करीब 12 लाख कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच की है, जिनमें ज्यादातर महाराष्ट्र में हैं, और अब हमने इस सेवा का विस्तार भारत के अन्य हिस्सों में भी किया है. हमारे ग्राहकों में करीब 50 कर्मचारियों वाली यूनिट्स से लेकर लगभग 10,000 कर्मचारियों के लिए सालाना ऑर्डर देने वाले संगठन तक शामिल हैं.

व्यावसायिक स्वास्थ्य जांच किसी उद्योग या नौकरी के हिसाब से विशेष क्यों होनी चाहिए?

जांच कर्मचारी के वास्तविक जोखिम के अनुरूप होनी चाहिए. शोर वाले क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ऑडियोमेट्री जरूरी है, जबकि धूल के संपर्क में रहने वालों के लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट और विशेष चेस्ट एक्स-रे की जरूरत हो सकती है. कुछ विशेष धातुओं से जुड़े काम में ब्लड-लीड टेस्ट की आवश्यकता हो सकती है. रसायनों के संपर्क में आने पर लिवर और किडनी की कार्यक्षमता की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है. जांच की आवृत्ति और दायरा लागू नियमों, काम की प्रकृति और जोखिम के स्तर पर निर्भर करता है. हर कर्मचारी पर एक जैसा पैकेज लागू करने से किसी विशेष विभाग में मौजूद जोखिमों की पहचान नहीं हो सकती. जहां स्वास्थ्य में गिरावट का पता चलता है, वहां अधिक करीबी मेडिकल निगरानी, कर्मचारी को जोखिम वाले क्षेत्र से हटाना और जोखिम को उसके स्रोत पर कम करने के लिए नियंत्रण उपायों की सिफारिश की जा सकती है.

गंभीर असामान्यता पाए जाने पर क्या होता है?

तत्काल ध्यान देने वाले मामलों को प्राथमिकता दी जाती है. हम आमतौर पर 12 से 24 घंटे के भीतर और कई बार इससे भी पहले कर्मचारी और कंपनी के प्रबंधन को जानकारी देते हैं. एक मामले में एक कर्मचारी का ब्लड शुगर 600 mg/dL से अधिक पाया गया. उसी शाम लैब ने हमें इसकी जानकारी दी और कर्मचारी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने और उपचार के लिए भेजा गया.

नियमित लैब रिपोर्ट आमतौर पर करीब 48 घंटे के भीतर WhatsApp या ईमेल के जरिए कर्मचारियों को भेज दी जाती हैं. व्यक्तिगत स्वास्थ्य कार्ड, विश्लेषण और प्रबंधन रिपोर्ट समेत पूरा दस्तावेजीकरण आमतौर पर 10 से 15 दिन में पूरा होता है. जहां किसी संगठन के पास अपनी मेडिकल टीम नहीं होती, वहां हमारे डॉक्टर काउंसलिंग, उपचार संबंधी सहायता या टेली-कंसल्टेशन उपलब्ध करा सकते हैं.

वाहन के अंदर सटीकता और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करते हैं?

साइट पर पहुंचने के बाद हाइड्रोलिक जैक बस को स्थिर करते हैं, ताकि उसकी हलचल से ब्लड सैंपल लेने, ECG रिकॉर्डिंग या अन्य जांचों पर असर न पड़े. ऑडियोमेट्री साउंडप्रूफ केबिन में की जाती है, जबकि सैंपल को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान नियंत्रित रेफ्रिजरेटर में रखा जाता है. हम ECG और पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट के लिए कंप्यूटर आधारित उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं और रजिस्ट्रेशन, सैंपल लेबलिंग, जांच और रिपोर्टिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करते हैं.

डिजिटल एक्स-रे क्षेत्र एक अलग, लेड-शील्डेड केबिन है, जिसे लागू रेडिएशन-सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है. डिजिटल इमेजिंग से टीम को तुरंत तस्वीर देखने और किसी स्पष्ट चिंता की स्थिति में कर्मचारी को सलाह देने में भी मदद मिलती है.

कार्यस्थल पर होने वाली स्वास्थ्य जांच से कौन से रुझान सामने आ रहे हैं?

हम व्यावसायिक जोखिमों के साथ-साथ जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ती हुई देख रहे हैं. हमारे अनुभव में जांच किए गए करीब 15 प्रतिशत कर्मचारियों को डायबिटीज हो सकती है, जबकि 8 से 10 प्रतिशत अन्य कर्मचारियों में ब्लड शुगर बढ़ा हुआ या जोखिम की स्थिति हो सकती है. करीब 15 से 20 प्रतिशत कर्मचारियों में हाइपरटेंशन और लगभग 10 से 15 प्रतिशत में दृष्टि संबंधी असामान्यता हो सकती है. ये आंकड़े अलग-अलग कार्यबल और उद्योगों में अलग हो सकते हैं. हालांकि, जांच का महत्व तभी है जब उसके बाद काउंसलिंग, रेफरल, उपचार और निगरानी की व्यवस्था हो. स्वास्थ्य सेवा को अधिक सक्रिय बनाने की जरूरत है. नियोक्ताओं को व्यावसायिक स्वास्थ्य को केवल अनुपालन की कवायद के बजाय कर्मचारियों में निवेश के रूप में देखना चाहिए. समय रहते बीमारी का पता चलने से कर्मचारी कल्याण, उत्पादकता और संगठन की मजबूती को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.

रुहैल आमीन, BW रिपोर्टर्स

(BW Businessworld के वरिष्ठ संपादक हैं और नई दिल्ली में स्थित अनुभवी पत्रकार हैं. वह अपनी पैनी विश्लेषण क्षमता और गहन रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं. उनका काम पत्रकारिता की विश्वसनीयता और उत्कृष्ट कहानी कहने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसने उन्हें उद्योग में एक भरोसेमंद आवाज के रूप में पहचान दिलाई है. उनका योगदान कई प्लेटफॉर्म तक फैला हुआ है और वह लगातार ऐसा कंटेंट उपलब्ध कराते हैं जो व्यापक दर्शकों को जानकारी देता है और उनसे जुड़ता है.)

 


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