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मांग-आपूर्ति के दबाव से बढ़े चीनी के दाम, लेकिन स्टॉक पर्याप्त: ISMA
त्योहारों से पहले मांग बढ़ने, उत्पादन अनुमान घटने और वैश्विक कीमतों में उछाल से बढ़ी कीमतें; ISMA ने कहा- देश में चीनी की कोई संरचनात्मक कमी नहीं
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि चीनी की मौजूदा कीमतों में तेजी अस्थायी है और इसे देश में चीनी की कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. ISMA के मुताबिक 2025-26 में भारत का शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-285 लाख टन रहने की संभावना है. सीजन के अंत में करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक रहने का अनुमान है, जो अगले चीनी वर्ष में भी घरेलू आपूर्ति को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है.
ISMA ने कहा कि हाल में चीनी कीमतों में मजबूती कई अस्थायी कारणों के चलते आई है. इनमें शुरुआती अनुमान से कम उत्पादन, त्योहारों के मौसम में बढ़ी मांग, बाजार की धारणा और अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों में तेजी प्रमुख हैं. इन कारणों से कीमतों पर दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन घरेलू बाजार में चीनी की कोई संरचनात्मक कमी नहीं है.
सरकार के कदम एहतियाती और संतुलित
ISMA ने त्योहारों के मौसम में बाजार को व्यवस्थित रखने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का स्वागत किया है. संगठन के मुताबिक 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी आयात की अनुमति, स्टॉक रखने की सीमा, चीनी भंडार का भौतिक सत्यापन, GST जांच के साथ साप्ताहिक स्टॉक खुलासा और 2026-27 के पेराई सीजन को आगे बढ़ाना बाजार में भरोसा कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. डीलरों के लिए देशभर में 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है. ISMA ने इसे और घटाकर 200 टन करने का सुझाव दिया है, ताकि बाजार में अनुशासन मजबूत हो सके.
ISMA के अनुसार कुछ कारोबारियों की ओर से जमाखोरी और पहले से स्टॉक जमा करने के कारण बड़े थोक खरीदारों ने अपनी 1.5-2 महीने की जरूरत के बराबर चीनी का भंडार बना लिया था. इससे बड़ी मात्रा में चीनी अस्थायी तौर पर बाजार के सर्कुलेशन से बाहर हो गई और पर्याप्त आपूर्ति के बावजूद कमी जैसी स्थिति का आभास पैदा हुआ.
संगठन ने कहा कि शुल्क-मुक्त आयात मुख्य रूप से अतिरिक्त आपूर्ति का विकल्प है. इसे एहतियाती और बाजार में भरोसा बढ़ाने वाले कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए. इससे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार को अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा.
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा, "भारत में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. सरकार और उद्योग त्योहारों की मांग को देखते हुए पहले से कदम उठा रहे हैं. आयात विंडो, स्टॉक से जुड़े उपाय और पेराई सीजन को आगे बढ़ाने से बाजार में अस्थायी तेजी को संभालने के लिए कई विकल्प उपलब्ध होंगे."
चीनी की नई घरेलू आपूर्ति जल्द बढ़ेगी
ISMA, NFCSF और चीनी मिलें 2026-27 के पेराई सीजन की शुरुआत 10-15 दिन पहले करने की दिशा में काम कर रही हैं. इसका उद्देश्य त्योहारों के मौसम में घरेलू बाजार में नई चीनी की उपलब्धता जल्द बढ़ाना है.
तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई पहले ही शुरू हो चुकी है. ISMA के मुताबिक पेराई सीजन को आगे बढ़ाने से अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 4 लाख टन के मुकाबले करीब 10 लाख टन तक पहुंच सकता है. इससे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार को अतिरिक्त आपूर्ति मिलेगी.
ISMA के उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने कहा कि पेराई सीजन को 10-15 दिन पहले शुरू करने से उस समय अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी, जब बाजार को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होगी. मौजूदा स्टॉक और सरकार की ओर से तय मासिक रिलीज कोटा के साथ नई घरेलू चीनी की उपलब्धता से मौजूदा दबाव कम होने की उम्मीद है.
इथेनॉल नहीं है चीनी कीमतों में तेजी की वजह
ISMA ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम मौजूदा चीनी कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार नहीं है. संगठन के मुताबिक इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन पेराई सीजन शुरू होने से पहले घरेलू खपत और उपलब्ध चीनी के कुल संतुलन को ध्यान में रखकर तय किया जाता है.
इथेनॉल कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की तस्वीर भी काफी बदल गई है. 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 75 फीसदी रहने का अनुमान है, जो 2021-22 में सिर्फ 17 फीसदी थी. वहीं चीनी आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी घटकर 25 फीसदी रह गई है. 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति करीब 1,197 करोड़ लीटर रहने और ब्लेंडिंग दर 20 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.
ISMA ने कहा कि इथेनॉल कार्यक्रम ने चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और नकदी प्रवाह को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इससे मिलों को किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर करने में मदद मिली है. 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 के करीब 97 फीसदी गन्ना बकाये का भुगतान किया जा चुका था.
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि आंकड़े यह नहीं बताते कि इथेनॉल मौजूदा चीनी कीमतों में तेजी के लिए जिम्मेदार है. उनके मुताबिक चीनी डायवर्जन घरेलू जरूरतों और कुल चीनी संतुलन का आकलन करने के बाद ही तय किया जाता है. साथ ही इथेनॉल आपूर्ति में अब अनाज की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी 16 फीसदी से ज्यादा महंगी
वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में तेज उछाल का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ा है. ISMA के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमत 30 जून 2026 को 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त 2026 तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई. यानी करीब दो महीने से भी कम समय में कीमतों में 16 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी से आयातित चीनी की लागत बढ़ती है, जिससे घरेलू चीनी कीमतों को भी समर्थन मिलता है.
2016-17 जैसी स्थिति नहीं
ISMA ने मौजूदा स्थिति की तुलना 2016-17 के चीनी सीजन से नहीं करने की सलाह दी है. संगठन के मुताबिक 2016-17 में देश को वास्तविक सूखे के कारण उत्पादन में बड़ी कमी का सामना करना पड़ा था. उस समय चीनी उत्पादन करीब 203 लाख टन रहा था, जबकि घरेलू मांग 245-250 लाख टन के आसपास थी.
इसके मुकाबले मौजूदा स्थिति काफी आरामदायक है. 2025-26 में करीब 279 लाख टन शुद्ध उत्पादन और करीब 35 लाख टन के अनुमानित क्लोजिंग स्टॉक के साथ घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है. ऐसे में मौजूदा सरकारी कदम किसी संरचनात्मक कमी को दूर करने के बजाय त्योहारों के दौरान बाजार को स्थिर रखने के लिए एहतियाती और संक्रमणकालीन उपाय हैं.
त्योहारों तक पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहने की उम्मीद
ISMA ने कहा कि मौजूदा स्टॉक, तमिलनाडु और कर्नाटक में शुरू हुई विशेष पेराई, 2026-27 सीजन की जल्द शुरुआत, सरकार की ओर से तय मासिक रिलीज और शुल्क-मुक्त आयात की अतिरिक्त सुविधा के कारण घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी.
संगठन के मुताबिक सरकार की ओर से उठाए गए सुधारात्मक कदमों का असर दिखने लगा है और पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में नरमी आई है. त्योहारों की खरीदारी सामान्य होने और नई घरेलू आपूर्ति बढ़ने के साथ कीमतों में आगे भी नरमी आने की उम्मीद है. इससे त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त और किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
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