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होमबायर्स फ्रॉड केस में CBI का बड़ा एक्शन, MKHS Housing और Indiabulls पर 18वीं चार्जशीट दाखिल
राजरहाट हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में कार्रवाई, बिल्डर और वित्तीय संस्थाओं के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप; 31 अन्य मामलों की जांच जारी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने घर खरीदारों से कथित बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में अपनी 18वीं चार्जशीट दाखिल की है. इस चार्जशीट में MKHS Housing LLP, उसके नामित पार्टनर Indiabulls Distribution Service, Indiabulls Investment Advisors और इनके निदेशकों व अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. सीबीआई के मुताबिक, यह मामला पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के राजरहाट टाउन एरिया में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ी कथित धोखाधड़ी का है. एजेंसी ने यह चार्जशीट अलीपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत-II के समक्ष दाखिल की है.
बिल्डर और NBFC अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप
सीबीआई का आरोप है कि जांच में सामने आया कि आरोपी बिल्डर कंपनी और उसके निदेशकों ने एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर घर खरीदारों और निवेशकों को झूठे आश्वासनों और भ्रामक जानकारियों के जरिए निवेश के लिए प्रेरित किया. एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर अवैध और धोखाधड़ीपूर्ण तरीकों से वित्तीय लाभ हासिल किया. सीबीआई ने चार्जशीट में आपराधिक साजिश, उकसावे, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं. हालांकि, सीबीआई ने राजरहाट मामले में कथित तौर पर शामिल रकम या प्रभावित घर खरीदारों की संख्या का खुलासा नहीं किया है.
Rain Forest प्रोजेक्ट से जुड़ा है मामला
सीबीआई की कार्रवाई MKHS Housing LLP से संबंधित है, जिसका जुड़ाव राजरहाट स्थित Rain Forest आवासीय परियोजना से बताया गया है. अलग-अलग अदालतों में चल रही कार्यवाही में भी इस परियोजना से जुड़े घर खरीदारों की शिकायतें सामने आई हैं. एक मामले में एक उपभोक्ता ने दावा किया था कि उसने इस परियोजना में दो फ्लैटों के लिए 11 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया था और बाद में बुकिंग रद्द कर रकम वापस मांगी थी.
अलग-अलग न्यायिक कार्यवाहियों में MKHS Housing LLP और Indiabulls Distribution Services के बीच वित्तीय लेनदेन का भी उल्लेख हुआ है. इनमें से एक मामले में परियोजना के निर्माण और विकास के लिए रकम उपलब्ध कराने से जुड़े इंटर-कॉरपोरेट डिपॉजिट समझौते का जिक्र है. हालांकि, ये कार्यवाहियां सीबीआई की मौजूदा आपराधिक जांच से अलग हैं और अपने आप में आरोपियों को दोषी साबित नहीं करती हैं.
दिल्ली-NCR से बाहर भी फैली जांच
सीबीआई की यह कार्रवाई बिल्डरों, बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के बीच कथित मिलीभगत से जुड़े बड़े मामले की जांच का हिस्सा है. यह मामला होम लोन सबवेंशन स्कीम से संबंधित शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आया था.
मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि इन मामलों में घर खरीदारों, बिल्डरों और बैंकों या वित्तीय संस्थाओं से जुड़े विवाद शामिल हैं. कोर्ट ने यह भी नोट किया था कि कुछ सबवेंशन व्यवस्थाओं में बैंकों ने लोन की बड़ी रकम पहले ही बिल्डरों को जारी कर दी थी.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सात प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया. अप्रैल 2025 में कोर्ट ने प्रथम दृष्टया बैंकों या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और बिल्डरों के बीच कथित "अपवित्र गठजोड़" पाए जाने की बात कही थी और सीबीआई को मामले की जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था.
1,000 से ज्यादा लोगों से पूछताछ
जुलाई 2025 तक सीबीआई छह प्रारंभिक जांच पूरी कर चुकी थी और 22 नियमित मामले दर्ज करने की अनुमति मांगी थी. सीबीआई की रिपोर्ट में आगे की जांच के लिए पर्याप्त सबूत मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी को आगे बढ़ने की अनुमति दी.
अदालत को यह भी बताया गया था कि सीबीआई की विशेष जांच टीम ने 1,000 से अधिक लोगों से पूछताछ की और 58 परियोजना स्थलों का दौरा किया. टीम ने जांच के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेजों की भी समीक्षा की. बाद में जांच का दायरा दिल्ली-NCR से बाहर की परियोजनाओं तक बढ़ाया गया. सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, मोहाली और प्रयागराज की परियोजनाओं से जुड़े छह अतिरिक्त मामले दर्ज करने की सीबीआई को अनुमति दी थी.
पिछले महीने भी दाखिल हुई थीं दो चार्जशीट
सीबीआईकी ताजा कार्रवाई से पहले एजेंसी पिछले महीने दो और चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. 14 जुलाई को सीबीआई ने नोएडा की एक हाउसिंग परियोजना में कथित धोखाधड़ी के मामले में Saha Infratech, उसके निदेशक और HDFC Bank तथा ICICI Bank के अधिकारियों के खिलाफ अपनी 16वीं चार्जशीट दाखिल की थी.
इसके बाद एजेंसी ने बेंगलुरु की एक हाउसिंग परियोजना से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में Ozone Urbana Infra Developers और उसके एक निदेशक के खिलाफ 17वीं चार्जशीट दाखिल की थी. इस मामले में भी सीबीआई ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए हैं. MKHS Housing और Indiabulls से जुड़ी ताजा चार्जशीट के साथ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही इस जांच में CBI की चार्जशीट की संख्या अब 18 हो गई है.
31 अन्य मामलों की जांच जारी
सीबीआई के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत देशभर की अलग-अलग बिल्डर कंपनियों और बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 31 अन्य मामलों की जांच अभी जारी है. इन मामलों में घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी और फंड के कथित डायवर्जन से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है. हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अभी अदालत में सुनवाई होनी बाकी है. आरोप साबित होने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाएंगे.
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