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ED ने इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल जितेश गुप्ता को किया गिरफ्तार, बेस्ट फूड्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई
ED का आरोप है कि जितेश गुप्ता ने फर्जी दावों को दोबारा स्वीकार कर CoC की संरचना बदली और दिनेश गुप्ता से जुड़ी इकाई के रिजॉल्यूशन प्लान को आगे बढ़ाने में मदद की.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेस्ट फूड्स मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल जितेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है. ईडी ने एक्स पर एक पोस्ट के साथ प्रेस रीलीज साझा करते हुए बताया है कि जितेश गुप्ता को 12 अगस्त 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया. उन्हें विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से आगे की जांच के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया.
बता दें, जितेश गुप्ता M/s होमस्टेड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड और M/s गोल्डन पीकॉक रेजिडेंस प्राइवेट लिमिटेड की कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (IRP/RP) के रूप में कार्य कर चुके हैं.
ED has arrested Jitesh Gupta, Insolvency Professional, who acted as Interim Resolution Professional/Resolution Professional (IRP/RP) in the Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) of M/s Homestead Infrastructure Development Pvt. Ltd. and M/s Golden Peacock Residence Pvt.… pic.twitter.com/H5AATVAxsT
— ED (@dir_ed) August 12, 2026
CBI की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी ने बताया कि इस मामले में जांच की शुरुआत M/s बेस्ट फूड्स लिमिटेड के खिलाफ CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर की गई थी. FIR में IPC, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे.
जांच एजेंसी का आरोप है कि M/s बेस्ट फूड्स लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं का नियंत्रण संभाल रहे दिनेश गुप्ता ने फर्जी और शेल कंपनियों के जरिए लोन की रकम का डायवर्जन किया और अपराध से अर्जित धन को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए ठिकाने लगाने की कोशिश की.
CoC की संरचना बदलने का आरोप
ईडी के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि जितेश गुप्ता ने IRP/RP के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए कुछ ऐसे दावों को दोबारा स्वीकार कर लिया, जिन्हें वह पहले फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण बताते हुए खारिज कर चुके थे. एजेंसी का दावा है कि इससे कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की संरचना में बदलाव हुआ.
ईडी ने आरोप लगाया कि इस कदम से दिनेश गुप्ता के लिए फ्रंट के रूप में काम करने वाली और उनके नियंत्रण वाली एक इकाई से वित्तपोषित रिजॉल्यूशन प्लान को आगे बढ़ाने में मदद मिली. एजेंसी के अनुसार, जितेश गुप्ता ने दिनेश गुप्ता से जुड़े एक व्यक्ति को संभावित रिजॉल्यूशन आवेदक के तौर पर भी सिफारिश की थी.
NCLT ने भी की थी प्रतिकूल टिप्पणी
प्रेस रिलीज के अनुसार, NCLT ने 9 सितंबर 2025 के अपने आदेश में जितेश गुप्ता के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं. ईडी ने कहा कि आदेश में उनके द्वारा मनगढ़ंत और अनुचित तरीके से प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर भरोसा कर अपनी शक्तियों से आगे बढ़कर काम करने का उल्लेख किया गया था. इसके बाद उनके स्थान पर दूसरे रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की नियुक्ति का निर्देश दिया गया था.
संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की भी जांच
ईडी की जांच में जितेश गुप्ता को दिनेश गुप्ता, M/s बेस्ट फूड्स लिमिटेड और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े कई लोगों से कथित तौर पर अस्पष्ट वित्तीय लेनदेन के जरिए धन मिलने की बात भी सामने आई है. एजेंसी के अनुसार, इन लेनदेन के बदले किसी वैध प्रतिफल का रिकॉर्ड नहीं मिला है.
ईडी का दावा है कि अब तक जुटाए गए सबूतों से यह सामने आया है कि जितेश गुप्ता ने जानबूझकर अपराध से अर्जित आय से जुड़ी प्रक्रिया और गतिविधियों को सुविधाजनक बनाया. एजेंसी ने कहा कि इस मामले में PMLA के तहत आगे की जांच जारी है.
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