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नेटफ्लिक्स स्टार का पतन: कोर्ट ने सतीश सनपाल की IPL सट्टेबाजी FIR खत्म कराने की कोशिश को किया खारिज
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दुबई के अरबपति की "बच निकलने की रणनीति" को ध्वस्त कर दिया है, जिसे BW Businessworld की उन स्टोरीज ने व्यवस्थित रूप से उजागर किया था, जिनके बाद UAE में उनकी संपत्तियां फ्रीज होने की खबरें सामने आईं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 51 minutes ago
पलक शाह
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भारत मूल के दुबई के अरबपति सतीश सनपाल के खिलाफ जबलपुर में दर्ज करीब आधा दर्जन FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया है. नेटफ्लिक्स (Netflix) के Desi Bling में दिखाई दे चुके उद्यमी सतीश सनपाल के खिलाफ भारत में कथित IPL सट्टेबाजी रैकेट के सिलसिले में ये FIR दर्ज की गई थीं.
12 अगस्त 2026 को याचिकाओं को खारिज करते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि किसी आरोपी की छापेमारी वाली जगह पर भौतिक मौजूदगी उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए जरूरी शर्त नहीं है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों की सुनवाई के दौरान जांच होनी चाहिए, न कि FIR रद्द करके उससे पहले ही मामले को खत्म कर दिया जाए. इसी राहत की मांग करने वाले चार सह-आरोपियों की याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं. इन मामलों में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है और अदालत ने प्रथम दृष्टया अपराध बनता पाया है, जिससे मामलों को ट्रायल के लिए आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है. सतीश सनपाल के वकीलों ने अपनी दलीलें एक शब्द पर खड़ी की थीं: दूरी.
सतीश सनपाल 14 मार्च 2020 को भारत से चले गए थे और वापस नहीं लौटे. दुबई से उनके वकीलों ने दलील दी कि जो व्यक्ति देश में मौजूद नहीं था, किसी छापेमारी के दौरान नहीं था, किसी जब्त फोन में नहीं था, किसी चैट में नहीं था, उसे जबलपुर से चल रहे सट्टेबाजी रैकेट से नहीं जोड़ा जा सकता. 12 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें बताया कि दूरी बचाव नहीं है.
जबलपुर में एकल पीठ के रूप में बैठे जस्टिस हिमांशु जोशी ने करीब आधा दर्जन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनके जरिए सनपाल ने जबलपुर के चार पुलिस थानों में उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी. इसी राहत की मांग करने वाले चार सह-आरोपियों की याचिकाएं भी साथ में खारिज कर दी गईं.
अदालत का मुख्य निष्कर्ष वही पंक्ति है जो सबसे महत्वपूर्ण है. इस तरह के अपराधों में अदालत ने कहा कि छापेमारी वाली जगह पर आरोपी की भौतिक मौजूदगी उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए जरूरी शर्त नहीं है. अदालत ने कहा कि जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाना चाहिए, FIR रद्द करके उससे पहले ही मामले को खत्म नहीं किया जा सकता. चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी थी और अदालत ने प्रथम दृष्टया अपराध बनता पाया.
बचाव की वह दलील जो विफल हुई
सनपाल की याचिकाओं में FIR के खिलाफ हर संभव दलील दी गई थी. याचिकाओं में कहा गया कि उन्हें मास्टरमाइंड केवल गिरफ्तार किए गए आरोपियों के दर्ज बयानों के आधार पर बनाया गया. उनके बैंक खाते से कोई पैसा नहीं गया था; उनसे कुछ बरामद नहीं हुआ था; सह-आरोपी के फोन की फॉरेंसिक जांच में उनके खिलाफ कुछ नहीं मिला; अभियोजन जिन चैट्स पर भरोसा कर रहा था, उनमें न तो उनका नाम था और न ही उनसे जुड़ा कोई मोबाइल नंबर. याचिकाओं में जोर देकर कहा गया कि वह 2020 से दुबई में रह रहे थे और अपराध होने के समय भारत में नहीं थे. यह भी कहा गया कि जिन कंपनियों के इस्तेमाल का आरोप उन पर लगाया गया, वे वास्तविक कंपनियां थीं, उन्होंने अपने वैधानिक रिटर्न दाखिल किए थे और उन्हें गलत तरीके से उनका निदेशक बताया गया.
राज्य ने जवाब दिया कि उचित जांच के बाद याचिकाकर्ता की संलिप्तता दिखाने वाली पर्याप्त सामग्री जुटाई गई है, चार्जशीट पहले ही अदालत में दाखिल की जा चुकी है और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है. हाई कोर्ट ने अभियोजन का पक्ष माना और ऐसा करते हुए "बच निकलने की रणनीति" की परतें खोल दीं.
BW Businessworld ने इस सीरीज में जिस पूरी व्यवस्था को दस्तावेजों के आधार पर सामने रखा, वह एक ही धारणा पर टिकी थी: विदेश में रहना सतीश सनपाल को मामले की पहुंच से बाहर कर देता है. अब एक हाई कोर्ट ने इसके उलट फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि घटनास्थल से अनुपस्थिति जिम्मेदारी खत्म नहीं करती; सबूत भागीदारी साबित करते हैं या नहीं, यह ट्रायल का सवाल है, न कि ट्रायल शुरू होने से पहले FIR खत्म करने का आधार. BW की स्टोरीज के बाद UAE में सनपाल की संपत्तियां फ्रीज होने की खबरें सामने आईं.
इसका क्या मतलब है
व्यावहारिक असर सीधा और गंभीर है. FIR कायम हैं. चार्जशीट कायम है. अब मामले जबलपुर में ट्रायल के लिए आगे बढ़ेंगे. ऐसे व्यक्ति के लिए, जिसने छह साल यह सुनिश्चित करने में बिताए कि किसी काउंटर पर कभी कोई शरीर मौजूद न हो, दुबई में रहकर वह जिस अदालत से बच नहीं सकता था, वह अब उसके मामलों की अगली मंजिल के रूप में तय हो गई है.
हाल के महीनों की घटनाओं की कड़ी में इस फैसले को देखें तो दिशा साफ दिखाई देती है. दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा पुष्टि किया गया लुक-आउट सर्कुलर. पत्नी, जिसे ₹352 करोड़ के साथ घोषित अपराधी बताया गया और जिसे दुबई से मांगा गया पासपोर्ट नहीं दिया गया. UAE द्वारा खुद उनकी संपत्तियां फ्रीज किए जाने की खबर. और अब हाई कोर्ट का उन FIR को रद्द करने से इनकार, जिन्हें वह सबसे ज्यादा खत्म कराना चाहते थे. इनमें से हर घटना अपने आप में एक झटका है; साथ मिलकर वे एक घेरा कसने की तस्वीर पेश करते हैं.
यह फैसला जिस सवाल को और तेज करता है
FIR रद्द करने से इनकार ने उस सवाल को भी और धार दे दी है, जिसे BW पहले उठाता रहा है. अगर एक हाई कोर्ट ने दर्ज किया है कि जांच की सामग्री प्रथम दृष्टया उनकी भागीदारी की ओर इशारा करती है और चार्जशीट पहले ही ट्रायल कोर्ट के सामने है, तो प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ECIR दर्ज करने, पैसों के ट्रेल शेल कंपनियों और ऑफशोर रास्तों का पीछा करने और भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम की संभावनाओं पर विचार करने की मांग अब समय से पहले की नहीं लगती. यह लंबित नजर आती है.
इनमें से कोई भी बात दोषसिद्धि नहीं है. FIR रद्द करने से इनकार करना अपराध का दोषी पाए जाने के बराबर नहीं है; यह केवल यह फैसला है कि मामला ट्रायल के योग्य है. सतीश सनपाल अब भी आरोपी हैं, उन्हें निर्दोष माने जाने का अधिकार है और वह ट्रायल के दौरान अपनी याचिकाओं में कही गई बातों को साबित करने के लिए स्वतंत्र हैं. लेकिन जिस दरवाजे को बंद कराने के लिए वह हाई कोर्ट गए थे, उसे खुला रखा गया है और जिस ट्रायल से वह बुर्ज खलीफा के पेंटहाउस में रहकर बच नहीं सकते, अब वही उस दरवाजे से आगे जाने का एकमात्र रास्ता है.
UAE में संपत्तियां फ्रीज किए जाने की खबर को आधिकारिक पुष्टि लंबित रहने तक प्रेस रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया है. सतीश सनपाल को आपराधिक मामलों में जमानत मिल चुकी है, उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है और उन्हें न्यायिक रूप से घोषित अपराधी नहीं माना गया है; वह आरोपों से इनकार करते हैं और मानहानि की कार्यवाही शुरू कर चुके हैं. वह, सोनिया सनपाल और नामित सभी व्यक्ति आरोपी हैं और उन्हें निर्दोष माने जाने का अधिकार है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
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