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रसोई पर फिर महंगाई की मार! खाद्य तेल एक महीने में 15% महंगा, आगे और बढ़ सकते हैं दाम

सोयाबीन से लेकर पाम और सूरजमुखी तेल तक पर बढ़ा दबाव, बढ़ती मांग और ग्लोबल सप्लाई संकट से त्योहारों में जेब पर पड़ेगा ज्यादा बोझ

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही आम लोगों के रसोई बजट पर महंगाई का दबाव बढ़ने लगा है. खाद्य तेलों की कीमतों में अगस्त में करीब 15 फीसदी तक की तेजी आ चुकी है और आने वाले महीनों में भी राहत मिलने के आसार कम हैं. घरेलू बाजार में त्योहारी मांग बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और आयातित तेलों की सप्लाई में रुकावट ने कीमतों को और हवा दे दी है.

खुदरा बाजार में कई खाद्य तेलों के दाम 200 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुके हैं. ऐसे में त्योहारों पर पकवान बनाने से लेकर रोजमर्रा की रसोई तक, खाद्य तेल की बढ़ती कीमत सीधे घरेलू बजट पर असर डाल सकती है. कारोबारियों का मानना है कि मांग बढ़ने के साथ कीमतों में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है.

अगस्त में 15% तक चढ़े खाद्य तेलों के भाव

अगस्त महीने में खाद्य तेलों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. थोक बाजार में सोयाबीन तेल का भाव बढ़कर 15,800 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. गुजरात मूंगफली तेल 17,000 रुपये, पामोलीन 15,850 रुपये और सरसों तेल 2,820 रुपये प्रति टिन (15 किलो) तक पहुंच गया है. औद्योगिक मांग बढ़ने और बाजार में उपलब्धता कम होने से बिनौला तेल भी महंगा हुआ है. इसका भाव बढ़कर 17,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.

200 रुपये के पार पहुंचा खुदरा भाव

खाद्य तेलों की थोक कीमतों में तेजी का असर अब खुदरा बाजार में भी दिखाई दे रहा है. कई जगह खाद्य तेल 200 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है. कीमतों में तेजी का असर कम दिखाने के लिए कुछ ब्रांडेड कंपनियां एक लीटर के बजाय 910 ग्राम के पैकेट भी बाजार में उतार रही हैं.

सोयाबीन तेल का आयात बढ़ाने में जुटीं रिफाइनरियां

त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद के बीच भारतीय रिफाइनरियां सोयाबीन तेल का आयात बढ़ा रही हैं. अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात करीब 6.20 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है. यह मौजूदा मार्केटिंग ईयर के औसत मासिक आयात 4,24,549 टन से करीब 46 फीसदी अधिक है.

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन तेल की बेहतर कीमत, भारत में बढ़ती मांग और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण सूरजमुखी तेल की सप्लाई में आ रही बाधाओं के चलते भारतीय रिफाइनरियां सोयाबीन तेल की खरीद बढ़ा रही हैं.

पाम तेल की कीमतों पर भी बढ़ा दबाव

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर के अनुसार, पहले कम बारिश के कारण उत्पादन घटने की आशंका से खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी आई. इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और इंडोनेशिया के जैव ईंधन में पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ाने के फैसले ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को ऊपर धकेला है. अब सूरजमुखी तेल की सप्लाई प्रभावित होने से भी बाजार में दबाव बढ़ गया है. ऐसे में त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने पर उपभोक्ताओं को खाद्य तेल के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है.

रूस-यूक्रेन युद्ध से सूरजमुखी तेल की सप्लाई पर असर

भारत सूरजमुखी तेल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस और यूक्रेन से आयात करता है. दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष के कारण काला सागर क्षेत्र से होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है. अगस्त-सितंबर में शिपमेंट के लिए निर्धारित करीब 1.40 लाख टन सूरजमुखी तेल की खेपें संघर्ष के कारण विलंबित हुई हैं. डीलरों के मुताबिक, अगस्त में भारत का सूरजमुखी तेल आयात करीब 1,80,000 मीट्रिक टन रह सकता है, जो फरवरी 2026 के बाद सबसे कम और पिछले महीने की तुलना में करीब 28 फीसदी कम है.

कम हुआ निर्यात, लेकिन बढ़ी कमाई

अप्रैल-मई 2026 में भारत ने 41,438 टन खाद्य तेल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 720.85 करोड़ रुपये रही. पिछले साल इसी अवधि में 49,100 टन खाद्य तेल का निर्यात हुआ था और इसकी कीमत 707.09 करोड़ रुपये थी.

यानी निर्यात की मात्रा करीब 16 फीसदी घटने के बावजूद कुल निर्यात मूल्य करीब 2 फीसदी बढ़ा है. इस दौरान मूंगफली तेल का निर्यात सबसे ज्यादा रहा. इसके बाद सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का स्थान रहा.

त्योहारों में और महंगा हो सकता है खाद्य तेल

खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों के पीछे घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी बड़ी वजह है. सोयाबीन तेल का बढ़ता आयात कुछ हद तक सप्लाई संभालने में मदद कर सकता है, लेकिन सूरजमुखी और पाम तेल की वैश्विक सप्लाई पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में अगर त्योहारी सीजन में मांग अनुमान से ज्यादा बढ़ती है, तो खाद्य तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी आ सकती है. इसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ना तय माना जा रहा है.
 


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