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सरकार का बड़ा फैसला: गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर लगी पाबंदी हटाई

घरेलू सप्लाई बेहतर होने के बाद सरकार ने लिया फैसला, अब बिना प्रतिबंध विदेश भेज सकेंगे गेहूं से बने ये उत्पाद

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदियां तत्काल प्रभाव से हटा दी हैं. सरकार के इस फैसले के बाद अब मैदा, सूजी, साबुत गेहूं का आटा और रिजल्टेंट आटा समेत गेहूं से बने इन उत्पादों का बिना किसी प्रतिबंध के निर्यात किया जा सकेगा.

सरकार ने सोमवार को निर्यात नीति में संशोधन की अधिसूचना जारी की. यह फैसला देश में गेहूं की उपलब्धता बेहतर होने, उत्पादन मजबूत रहने और घरेलू बाजार में सप्लाई की स्थिति सहज होने के बीच लिया गया है. माना जा रहा है कि इससे भारत के प्रोसेस्ड गेहूं उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और आटा मिलों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों तथा निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में नए अवसर खुलेंगे.

2022 से लागू थीं निर्यात पाबंदियां

गेहूं के आटे और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध वर्ष 2022 में लगाया गया था. उस समय सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण रखना था. बाद में सरकार ने इन प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देना शुरू किया और कोटा आधारित अनुमति के जरिए सीमित निर्यात की इजाजत दी गई. अब सरकार ने पूरी तरह प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है.

आटा मिलों और निर्यातकों को बड़ी राहत

सरकार के इस फैसले से आटा मिलों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. पिछले करीब चार वर्षों से इन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच प्रतिबंधित थी. उद्योग जगत लंबे समय से सरकार से निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने की मांग कर रहा था. उसका कहना था कि गेहूं का उत्पादन बेहतर रहने और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से देश की खाद्य आपूर्ति की स्थिति मजबूत हुई है.

उद्योग के मुताबिक, गेहूं से बने वैल्यू-एडेड उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिलने से मिलों की उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा. इसके साथ ही किसानों की आय को समर्थन मिलने और वैश्विक खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी मजबूत होने की उम्मीद है.

दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका पर नजर

निर्यातक अब उन पड़ोसी और पारंपरिक बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जहां भारतीय गेहूं उत्पादों की मांग पहले से मौजूद है. इनमें दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कुछ बाजार प्रमुख हैं. निर्यात नीति में बदलाव से प्रोसेस्ड कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होने की उम्मीद है.

घरेलू खाद्य सुरक्षा अब भी प्राथमिकता

सरकार ने गेहूं उत्पादों के निर्यात से प्रतिबंध हटाने का फैसला जरूर किया है, लेकिन खाद्य सुरक्षा और कीमतों में स्थिरता अभी भी प्रमुख प्राथमिकताओं में बनी हुई है. पहले कम फसल उत्पादन और मौसम संबंधी लगातार व्यवधानों के कारण घरेलू उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी थी. इसी वजह से सरकार ने गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर नियंत्रण लगाया था. अब बेहतर फसल, पर्याप्त स्टॉक और सप्लाई को लेकर कम होती चिंताओं ने सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यातकों को अधिक स्वतंत्रता देने का भरोसा दिया है. हाल के महीनों में स्टॉक लिमिट में ढील और निर्यात कोटे में बढ़ोतरी जैसे कदम भी सरकार की धीरे-धीरे उदार होती निर्यात नीति का संकेत दे रहे थे.

किसानों और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को मिल सकता है फायदा

निर्यात प्रतिबंध हटने से गेहूं से जुड़े प्रोसेस्ड उत्पादों की मांग बढ़ सकती है. इससे आटा मिलों और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों की क्षमता का इस्तेमाल बढ़ने के साथ किसानों के लिए भी बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकता है. सरकार का यह कदम भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
 


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