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चीन से परेशान हैं बड़े निवेशक, वॉरेन बफेट के लिए बड़ी चुनौती है भारतीय बाजार : समीर अरोड़ा

पलक शाह के साथ एक साक्षात्कार में, समीर अरोड़ा ने बताया कि Helios MF कैसे बाजार में लगातार आगे बढ़ता रहेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

पलक शाह

सिंगापुर आधारित फंड मैनेजर समीर अरोड़ा India फोकस्‍ड Helios Capital के लिए जाने जाते हैं. समीर अरोड़ा एक रिसर्च एनालिस्ट, वैश्विक निवेशक समीर अरोड़ा की शेयर चुनने और नए जमाने की कंपनियों की पहचान करने में उनकी बड़ी महारत है, विशेषतौर पर उनकी शेयर सलेक्‍ट करने की क्षमता बेमिसाल है. 1993 में न्यूयॉर्क से मुंबई आने  के बाद, ये वो दौर था जब हर्षद मेहता के लगातार बढ़ते कद के बीच उन्‍होंने Alliance Capital के लिए म्यूचुअल फंड (MF) व्यापार की स्थापना करने में मुख्य भूमिका निभाई. तब, अरोड़ा द्वारा प्रबंधित किये जाने वाले India-dedicated MF ने 15 पुरस्कार जीते थे. इसके बाद सिंगापुर में शिफ्ट होने के बाद 2002 में The Asset मैगजीन द्वारा कराए गए एक पोल में उन्‍हें प्रतिभाशाली इक्विटी निवेशक के रूप में चुना गया. उनके Helios Strategic Fund को 2006 से 2020 तक लगातार Best India Fund श्रेणी में Eurekehedge द्वारा नामित किया गया और इसे उन्‍होंने 4 बार जीता. वो 2018 से लगातार पांच साल तक अपने बेहतरीन प्रदर्शन के लिए AsiaHedge पुरस्कार भी जीत चुके हैं. 

विदेशी निवेशकों के मुकाबले घरेलू निवेशकों की बढ़ती प्रतिस्‍पर्धा ने अरोड़ा को मुंबई वापस आने पर मजबूर कर दिया. 

Helios Capital पहली बार फ्लेक्सी-कैप योजना लॉन्च कर रहा है. सवाल ये है कि आखिर फ्लेक्सी-कैप क्यों?  अरोड़ा की निवेश शैली के अनुरूप ये फंड स्‍मॉल कैप, मिड कैप और लार्ज-कैप कंपनियों में कहीं भी स्टॉक खरीद सकता है. पलक शाह के साथ एक साक्षात्कार में, समीर अरोड़ा ने कहा कि Helios एमएफ कैसे बाजार को प्रहार करने के रूप में आगे बढ़ेगा.

क्या आप म्यूचुअल फंड उद्योग में देर से जा रहे हैं? Helios नए निवेशकों को क्या नयी पेशकश कर रहा है?
संयुक्त राज्य अमेरिका में कई सैकड़ों म्यूचुअल फंड हैं, लेकिन भारत में अब तक केवल 50 ही हैं. हम म्यूचुअल फंड उद्योग में किसी भी प्रकार से देर से नहीं जा रहे हैं. Helios एक नई कंपनी नहीं है और इसके पास 18 साल से अधिक का अनुभव है, एक यूनिक और मजबूत निवेश प्रक्रिया है जिसका बेहतर प्रदर्शन करने का लंबा इतिहास रहा है. इसके अलावा, किसी भी विशेष उत्पाद श्रेणी में, शायद 5 सफल और अच्छी प्रदर्शन कर रही योजनाएं होती हैं. हमारी प्रतिस्पर्धा केवल 5 से 7 म्यूचुअल फंड्स के साथ है और पूरे उद्योग या हर योजना के साथ नहीं है.

सिंगापुर में हेज फंड प्रबंधक के रूप में, आपकी पसंदीदा रणनीति 'लॉन्‍ग और शॉर्ट' थी. ताकि निवेशकों के लाभ को अधिकतम स्‍तर तक पहुंचाया जा सके.  देखा जाए तो एमएफ एक वनिला गेम है और आप शॉर्ट नहीं खेल सकते हैं.  आप आकांक्षी निवेशकों के लिए 'अल्फा' कैसे उत्पन्न करेंगे?

Helios में, हम इस पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि हमें क्या नहीं खरीदना है. हमारी रणनीति उन स्टॉक्स को दूर करने की है जिनमें हम नहीं निवेश कर सकते हैं,  और ये हमें हम आठ मानकों के आधार पर तय करते हैं. उद्योग की Industry Dynamics, मैनेजमेंट क्‍वॉलिटी मूल्‍यांकन इत्यादि. हम उन कंपनियों से भी बचते हैं जिनमें फ्रॉड निवेश हो सकता है.  हमारे मानदंडों में से अगर किसी भी सूची में वो स्‍टॉक मेल नहीं खाता है, तो स्टॉक हमारे लिए निवेश के लायक नहीं है. बुरे उपयोगी उपकरणों को हटाने के बाद, हम सबसे अच्छे खरीददारों की सूची पर पहुंचते हैं.
बुरी कंपनियों को सूची से हटाने का मतलब हमें हमेशा मिल जाता है कि हमने सबसे अच्छा निवेश खेल ढूंढ लिया है, लेकिन यह जोखिम प्रबंधन है. एक एमएफ के रूप में, हम चाहते हैं कि हम बुरी कंपनियों में ना निवेश करें और हमारा पोर्टफोलियो आमतौर पर अच्छी कंपनियों का हो. हालांकि, यह बहुत कम ही होता है,  सभी निवेश अच्छे होते हैं और सभी आठ कारकों के साथ मेल खाते हैं. Helios और हमारे बीच में अंतर ये है कि ज्‍यादातर लोग 'गुणवत्ता' वाली कंपनियां खरीदेंगे, चाहे वो महंगी हों, या कम लागत में उपलब्ध हों या फिर चाहे वो बुरी तरह से क्‍यों न प्रबंधित हों.

हमारे मानकों में, 'वीटो' कुछ ऐसा होता है, जिसका मतलब है कि अगर कंपनी प्रबंधन बुरा हो, तो हम स्टॉक को खारिज कर देते हैं. ये एक तरह से खराब एप्‍पल हटाने जैसा है जो आपके मार्जिन को कम कर देता है. इससे Helios की लागत कम हो जाती है और रिटर्न में स्थिरता बढ़ जाती है. 

क्‍या Helios ने एमएफ प्ले के लिए एक नई संरचना और टीम तैयार की है क्या?

Helios म्‍यूचुअल फंड के तहत,  मैं फंड का बतौर संस्थापक,प्रायोजक और असेट मैनेजमेंट कंपनी में बतौर चेयरमैन रहूंगा. सीनियर मैनेजमेंट टीम उन लोगों से मिलेगी जो करीब 18 साल से सिंगापुर में मेरे साथ काम कर चुके हैं. जैसे उदाहरण के लिए, Helios एमएफ के CIO (मुख्य निवेश अधिकारी) अलोक बहल हैं, जो वहां मेरे दूसरे प्रमुख व्‍यक्ति थे. Helios के लॉन्‍ग और संगत प्रदर्शन के लिए श्रेय उन्हें भी जाता है. Helios के रिसर्च प्रमुख अभय मोदी जो अब तक हमारे साथ जुड़े हुए हैं, और इसके लिए उनका 16 साल से अधिक समय से संबंध है.

शुरुआत में, Helios पहली बार एक 'फ्लेक्सी कैप फंड' लॉन्च कर रहा है (जिसमें कंपनियों में निवेश किया जा सकता है, जैसे कि लार्ज-कैप, मिड-कैप, और स्मॉल-कैप स्टॉक्स) अगले 18 से 24 महीनों में,  हम 4 से 5 योजनाएं और करेंगे. उसके परे, हम अब भी रणनीतिकरण कर रहे हैं और हम एक दिन ब्रिज जरूर पार करेंगे.  वो कहते हैं कि एक बात तो निश्चित है कि हेलियोस एक सक्रिय रूप से मैनेज्‍ड फंड होगा.

क्या आपको लगता है कि एमएफ निवेशक स्टॉक की पूरी रैली से चूक जाते हैं क्योंकि नियामक आवश्यकताओं के अनुसार पोर्टफोलियो वेटेज को बैलेंस करने के लिए एम-कैप बढ़ने पर उन्हें स्टॉक बेचना जारी रखना पड़ता है? क्या यह एमएफ निवेशकों के लिए कमी या अभिशाप है?

ये बिल्कुल भी सही नहीं है. एमएफ को किसी भी स्टॉक में 10 प्रतिशत भार रखने की अनुमति है और यह उन 99 प्रतिशत शेयरों के लिए पर्याप्त है जिन्हें कोई भी रखना चाहेगा. ऐसा बहुत कम होता है कि एक या दो शेयरों में गलतफहमी होने लगे और उनके पास अधिकतम सीमा तक स्वामित्व न होने से पूरे पोर्टफोलियो पर असर पड़ने लगे.

एमएफ को अक्सर दुविधा के दो पहलुओं का सामना करना पड़ता है : उसे कभी बबल तरह की स्थिति या यहां तक कि 2008 जैसी मंदी के बाजार में भी पूरी तरह से बाहर नहीं निकल सकते हैं. एमएफ किसी भी परिदृश्य में अधिकतम 10 से 15 प्रतिशत नकदी रख सकते हैं. यहां निवेशकों के लिए क्या विकल्प हैं?

यह हमारा अनुभव रहा है कि उच्च नकदी स्तर पर उन ऐसे कदमों को उठाना कभी आसान नहीं होता है. वे प्रदर्शन पर बहुत अधिक सहायता नहीं करते हैं. सिर्फ एमएफ ही नहीं,  निवेशकों के लिए भी बाजार से पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला लेना उतना ही मुश्किल है. अंततः बाजारों में हर चीज सापेक्ष प्रदर्शन है. बड़ी तस्वीर यह है कि बाजार में लंबे समय तक निवेशित रहने से फायदा होता है और कभी-कभी पूरी तरह से नकदी पर निर्भर रहना बुरी तरह नुकसान भी पहुंचा सकता है. कौन सोच सकता था कि नोटबंदी के बाद निवेश से सबसे अच्छा रिटर्न मिला और यूक्रेन/रूस युद्ध से बाजार को कोई नुकसान नहीं होगा?

वर्तमान में भारत विश्व उच्च विकास दर वाली एकमात्र सर्वोत्तम अर्थव्यवस्था है. क्या हम उस बिंदु पर पहुंच गए हैं जहां दुनिया के किसी भी हिस्से में समस्याओं के बावजूद भारत अच्छा प्रदर्शन करेगा?

पिछले पांच से पच्चीस वर्षों के पैमाने पर, भारत लगातार अमेरिकी डॉलर के मामले में दुनिया में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला बाजार रहा है. पिछले 25 वर्षों में, भारतीय बाजारों ने वॉरेन बफेट के रिटर्न (अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में) को पीछे छोड़ दिया है. इसलिए मैं बड़े निवेशकों को सुझाव देता हूं कि हर गर्मियों में ओमाहा जाने के बजाय (वॉरेन बफेट से मिलने के लिए) उन्हें मुंबई जाना चाहिए और एनएसई या बीएसई भवन के बाहर एक सेल्फी लेनी चाहिए. बड़े निवेशक चीन से निराश हैं (क्योंकि बाजार ने कई वर्षों से उच्च रिटर्न नहीं दिया है) और इससे भारत में लगातार और वृद्धि होगी.


क्या नए जमाने की कंपनियां ही एकमात्र बड़ा दांव हैं?
कई नए जमाने की कंपनियां निवेश के लायक हैं. लेकिन पुरानी अर्थव्यवस्था वाली कई कंपनियां ऐसी ही हैं. निवेश में नए जमाने और उभरती कंपनियों का अनुपात कभी तय नहीं होता.

Disclaimer : उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और आवश्यक रूप से इस प्रकाशन गृह के विचारों का प्रतिनिधित्व या प्रतिबिंबित नहीं करते हैं. जब तक अन्यथा उल्लेख न किया गया हो, लेखक अपनी व्यक्तिगत क्षमता में लिख रहा है. उन्हें किसी एजेंसी या संस्थान के आधिकारिक विचारों, दृष्टिकोण या नीतियों का प्रतिनिधित्व करने के बारे में नहीं सोचा जाना चाहिए.
 


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