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सावधान! कोविड-19 के शिकार लोगों में तेजी से प्रभावित हो रहा यह महत्वपूर्ण अंग

कोविड-19 से होने वाला निमोनिया दोनों फेफड़ों में होता है और ऑक्‍सीजन लेना कठिन बना देता है, जिससे सांस छोटी हो जाती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया आखिरकार 'ओल्‍ड नॉर्मल' में लौट रही है, हालांकि उस प्रकोप के बाद से हम श्‍वसन-तंत्र से जुड़ीं और विशेषकर फेफड़ों के मामले में कुछ दूसरी गंभीर समस्‍याओं का सामना कर रहे हैं. दुनिया में करोड़ों लोगों को श्‍वसन-तंत्र के संक्रमण हो रहे हैं, लेकिन निम्‍न और मध्‍यम आय वाले देशों (LMIC) में ये समस्या काफी ज्‍यादा है. जिन देशों में रिसर्च, रोकथाम और उपचार के लिए धन सीमित है, वहां हालात बुरे होते जा रहे हैं. इस असमानता को दूर करने के लिये स्‍वास्‍थ्‍य के सामाजिक और पर्यावरणीय निर्धारकों, जैसे तंबाकू का सेवन, वायु प्रदूषण, निर्धनता और जलवायु परिवर्तन पर भी ध्‍यान दिया जाना चाहिए.

एक नया संकट उभर रहा
अमेरिकन थोरैसिक सोसायटी के एक हालिया अध्‍ययन ने खुलासा किया है कि हो सकता है महामारी से राहत मिली हो, लेकिन उसका प्रभाव फेफड़ों की खराब होती सेहत के उभरते संकट के रूप में दिख रहा है. कोविड-19 से नीमोनिया जैसी फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं और गंभीर मामलों में एक्‍युट रेस्पिरेटरी डिस्‍ट्रेस सिंड्रोम यानी ARDS भी हो सकता है.

इस समस्या से बच्चे भी हो रहे प्रभावित
रेडियोलॉजी में रेडियोलॉजीकल सोसायटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RSNA) द्वारा प्रकाशित एक दूसरे अध्‍ययन में यह बात सामने आई है कि जिन बच्‍चों और वयस्‍कों का कोविड-19 ठीक हो चुका है या जिन्‍हें यह लंबे समय तक संक्रमण रहा है, उनकी MRI में फेफड़ों की स्‍थायी क्षति दिखती है. शोधकर्ताओं ने 54 बच्‍चों और वयस्‍कों में, जिनकी औसत आयु 11 वर्ष थी, फेफड़ों की संरचना और कार्यात्‍मकता में बदलाव देखे हैं. 54 मरीजों में से 29 ठीक हो चुके थे और 25 को कोविड लंबे समय तक रहा था. संक्रमण के समय लगभग सभी को टीका नहीं लगा था.

निमोनिया दोनों फेफड़ों में होता है
इसके अलावा, कोविड-19 से होने वाला निमोनिया दोनों फेफड़ों में होता है और ऑक्‍सीजन लेना कठिन बना देता है, जिससे सांस छोटी हो जाती है, लगातार कफ और दूसरे लक्षण बने रहते हैं. कोविड से प्रभावित हुए फेफड़े के स्वस्थ बनाना व्यक्ति के देखभाल के तरीके और कोविड की प्रकार पर बहुत हद तक निर्भर करता है.

क्या कहना है पद्मश्री विजेता डॉ. बत्रा का?
इस मुद्दे पर पद्मश्री विजेता और 'डॉ. बत्रा ग्रुप ऑफ कंपनीज' के संस्‍थापक एवं चेयरमैन डॉ. मुकेश बत्रा ने कहा, "हमारे फेफड़े अस्‍थमा, COPD या ब्रोंकाइटिस आदि जैसी दीर्घकालिक बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं. कोविड-19 महामारी ने श्‍वसन की समस्‍याओं को बढ़ाया ही है. 50 वर्षों से होम्‍योपैथी के पेशे में होने के नाते, मेरा मानना है कि औषधि की यह प्रणाली व्‍यक्तिपरक उपचार के माध्‍यम से समस्‍या की जड़ में जाकर अधिकांश श्‍वसन रोगों का प्रभावी उपचार कर सकती है. होम्‍योपैथी को अपनाने के अलावा, लोगों को स्‍वस्‍थ जीवनशैली रखनी चाहिए. श्‍वसन व्‍यायामों का लगातार अभ्‍यास करते रहना चाहिए. फेफड़ों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए धूम्रपान से सख्‍ती से बचना चाहिए."

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