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अगर आप भी रहना चाहते हैं हेल्दी, तो ICMR की इन कुकिंग गाइडलाइन्स को अपनाएं

अच्छा खान-पान ही अच्छे स्वास्थ्य का मूल मंत्र है. ऐसे में हर किसी को अपने डाइट का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. ICMR ने इस संबंध में अहम गाइडलाइंस जारी किए हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आजकल की भागती दौड़ती जिंदगी में लोगों के पास खुद की हेल्थ पर ध्यान देने तक का समय नहीं होता. अच्छा खानपान हो या वर्कआउट लोग अपनी बिजी लाइफ के चलते अपने शरीर का ध्यान रखना भूल गए हैं. आपका खानपान आपको हेल्दी बनाने में मदद करता है. अगर आप हेल्दी डाइट लेते हैं तो आप खुद को फिट और हेल्दी बनाए रख सकते हैं. अब इसी को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) एक गाइडलाइन्स जारी की है. ICMR के मुताबिक, स्वस्थ भोजन तैयार करने के लिए कुकिंग और प्रीकुकिंग तकनीक सही होना सबसे आवश्यक है. ऐसे में ICMR की कुकिंग गाइलाइन फॉलो कर कुकिंग को सेफ रख सकते हैं. 

प्री-कुकिंग तकनीकों का करें इस्तेमाल

भोजन की न्यूट्रीशन क्वालिटी बढ़े, इसके लिए ICMR ने प्री-कुकिंग मेथड जैसे सोकिंग, ब्लैंचिंग और मैरिनेटिंग पर काफी जोर दिया है. सोकिंग की प्रकिया के दौरान अनाज को तकरीबन 3 से 6 घंटे के लिए भिगोया जाता है. इससे अनाज में मौजूद फाइटिक एसिड कम होता है. यह एसिड बॉडी को मिनरल्स एब्जार्व करने से रोकता है. वहीं, सब्जियों को ब्लांच करने से उसका माइक्रोबियल लोड कम होता है और पेस्टिसाइड हटता है. साथ ही सब्जी के रंग, बनावट और पोषक तत्व में कोई बदलाव नहीं आता है. ये प्रोसेस उन एंग्जाइम को खत्म करने के काम आता है जो सब्जी से पोषण तत्वों को कम करते हैं. 

ICMR के मुताबिक आधी से ज्यादा बीमारियों की वजह आपका खानपान हो सकता है. भारत में 57 प्रतिशत बीमारियों का कारण अनहेल्दी डाइट है. ICMR के मुताबिक खराब खानपान के कारण शरीर में पोषण की कमी, एनीमिया, मोटापा, डायबिटीज, कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है. आइए जानते हैं ICMR ने अपने गाइडलाइन में कुकिंग के किन तरीकों को शामिल किया है. 

•    बॉइलिंग और स्टीमिंग- ये तरीका भोजन में मौजूद वॉटर सॉल्यूबल विटामिन्स और मिनरल्स को बचाकर रखता है. साथ ही पकवान तैयार करने में समय भी कम लगता है.
•    प्रेशर कुकिंग- भोजन को स्टीम के दबाव में जल्दी पकाने के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल किया जाता है. इस कुकवेयर में खाना तैयार करने से भोजन में विटामिन और मिनरल्स बने रहते हैं.
•    फ्राइंग और शैलो फ्राइंग- ये तरीका फूड में फैट को बढ़ा सकता है, जो दिल की बीमारियां होने की एक वजह बन सकता है. हालांकि, खाने का स्वाद बढ़ाने में ये तरीका कारगर साबित हो सकता है.
•    माइक्रोवेव में खाना पकाना- खाना बनाने के इस तरीके में समय कम लगता है. साथ ही पोषक तत्व भी भोजन में बने रहते हैं. भोजन तैयार करने के लिए बर्तनों का चुनाव भी काफी महत्वपूर्ण है. इसमें भी हल्की सी लापरवाही आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.
•    मिट्टी के बर्तन- खाना पकाने का ये तरीका भोजन का स्वाद और उसके मिनरल्स कंटेट को बढ़ा सकता है. हालांकि, इन्हें इस्तेमाल करने से पहले इनकी साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखें,  वर्ना इस बर्तन में खाना बनाना जोखिम भी साबित हो सकता है. 
•    मेटल और स्टेनलेस स्टील के कुकवेयर- खाना पकाने का टिकाऊ और सुरक्षित तरीका है लेकिन भोजन में मेटल्स के रिसाव से बचने के लिए इसका सही तरीके से उपयोग किया जाना चाहिए.
•    टेफ्लॉन से लेपित नॉन-स्टिक पैन- कम वसा वाले खाना पकाने के लिए उपयोगी है. हालांकि, भोजन पकाते वक्त निकलने वाले जहरीले धुएं को रोकने के लिए इसे ज़्यादा गरम नहीं किया जाना चाहिए.
•    ग्रेनाइट पत्थर के कुकवेयर- पारंपरिक नॉन-स्टिक की तुलना में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ माने जाते हैं. ध्यान रखें इसमें कोई हानिकारक रसायन न हों.  
 


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