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Noorings: जानिये Zee के पास अब क्या हैं विकल्प, कैसी होगी आगे की यात्रा?

200 मिलियन डॉलर्स की क्रिकेट फीस भरने की अंतिम डेडलाइन इसी महीने थी और Zee इस डेडलाइन से काफी आगे आ चुका है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

Noor Fathima Warsia, Group Editorial Director, BW Businessworld.

बहुत सी चीजें ऐसी हैं जिन्हें भारत में पहली बार किये जाने का श्रेय जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee) को दिया जाता है. फिर चाहे भारत के अग्रणी सैटेलाईट टेलीविजन की बात हो, डिजिटाईजेशन की तरफ बढ़ने वाली पहली कंपनी की बात हो, डायरेक्ट-टू-होम की बात हो या फिर वैसी ही अन्य उपलब्धियों की बात क्यों न हो. Zee की अभी तक की यात्रा आसान नहीं रही है, फिर चाहे बात कम्पटीशन की हो या फिर सोनी के साथ मर्जर की ही क्यों न हो. दोनों ही कंपनियों के लिए इस मर्जर की बदौलत 10 बिलियन डॉलर्स की कीमत वाली एक ऐसी इकाई सामने आती जिससे जनता को विविध विकल्प मिलते हैं और भविष्य में बेहतर वृद्धि के विकल्प भी मिलेंगे. दुर्भाग्यवश (या फिर पुनीत गोयनका की अयोध्या मंदिर वाली पोस्ट को एक इशारा मानें तो भाग्यशाली रूप से) 22 दिसंबर 2021 में शुरू हुई यह डील 22 जनवरी 2024 को पूरी तरह से खत्म हो गई. 

Zee को क्यों चाहिए पार्टनर?
अगर यह मर्जर पूरा हो जाता तो इससे जी एंटरटेनमेंट (Zee) को अपनी स्थिति को मजबूत करने का मौका मिलता और साथ ही कंपनी 1.4 बिलियन डॉलर्स का भुगतान करके डिज्नी (Disney+ Hotstar) से क्रिकेट के राइट्स भी खरीद पाती. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 200 मिलियन डॉलर्स की क्रिकेट फीस भरने की अंतिम डेडलाइन इसी महीने थी और Zee इस डेडलाइन से काफी आगे आ चुका है. माना जा रहा है कि कैश में कमी होने की वजह से कंपनी, तय की गई डेडलाइन पर भुगतान नहीं कर पाई. 
पिछली बार जब Zee ने सोनी मर्जर को लेकर अपने वादे के प्रति विश्वास जताया था तो कंपनी के शेयरों में थोड़ा सुधार देखने को मिला था लेकिन जब से यह डील पूरी तरह से खत्म हुई है तब से ऐसा अंदेशा लगाया जा रहा है कि कंपनी के स्टॉक प्राइस पर प्रमुख रूप से प्रभाव पड़ सकता है और एलारा कैपिटल के एनालिस्ट करन तौरानी की मानें तो स्पोर्ट्स के नुक्सान के साथ यह 130 रुपए प्रति शेयर या फिर बिना स्पोर्ट्स के नुक्सान के 170 रुपए प्रति शेयर की कीमत तक गिर सकता है. 

Zee के पास क्या है विकल्प?
हालांकि यह निकट भविष्य में संभावित बहुत से परिणामों में शामिल हो सकते हैं लेकिन पिछले दो सालों में भारतीय मीडिया के परिदृश्य में कुछ प्रमुख परिवर्तन हुए हैं और इन परिवर्तनों में से सबसे महत्त्वपूर्ण है डिज्नी द्वारा एक बार फिर भारतीय मार्केट में मौजूद अपनी हिस्सेदारी को बेचने की कोशिश करना और इस बार डिज्नी, मुकेश अंबानी की अध्यक्षता वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ मर्जर करना चाहती है और भारतीय मीडिया के कारोबारों को मिलाकर एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में एक बहुत विशालकाय कंपनी खड़ी करना चाहती है. 
भारत में मीडिया और एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में डिजिटल सबसे अग्रणी है. OTT प्लेटफॉर्म्स को काफी प्रसिद्धि मिल रही है और ये उन चुनौतियों में मौजूद है, जिनका सामना Zee के द्वारा इस वक्त किया जा रहा है और मीडिया कंपनी को अपना प्लान B तुरंत खोज लेना चाहिए. कंपनी के लिए एक बेहतर विकल्प डिज्नी से सीख लेकर भारत में मौजूद कंपनियों को ही ऑफर देना चाहिए. 

संभावित कंपनियां
मीडिया एक ऐसा क्षेत्र है जो वास्तविकता में डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर है और इसीलिए यह बहुत से ब्रैंड्स के लिए एक नली का काम करता है और बहुत से ब्रैंड्स को कंज्यूमर्स के साथ संबंध बनाने का मौका देता है. भारतीय कारोबारी, भारत में मौजूद मीडिया के क्षेत्र को काफी गंभीरता से देखने लगे हैं और इसके लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज को श्रेय दिया जाना चाहिए क्योंकि रिलायंस ने अपने बड़े फैसलों और इन्वेस्टमेंट की बदौलत मडिया क्षेत्र के माहौल को काफी संतुलित किया है. 
स्वतंत्र मीडिया की बहस को अगर एक तरफ कर दें तो अडानी द्वारा NDTV में प्रमुख हिस्सेदारी प्राप्त करने का फैसला एक ऐसा फैसला है जिसकी वजह से दोनों ही कंपनियों को फायदा हुआ है. 2023 में अडानी ग्रुप की उतार-चढ़ाव भरी यात्रा को देखें तो कहा जा सकता है कि मीडिया भी उन विकल्पों में से एक है जो अडानी ग्रुप के लिए भी काफी आकर्षक विविधता के रूप में सामने आता है, आखिरकार एंटरटेनमेंट भी तो स्टॉक्स का संशयवाद ही है. इसकी वजह से अडानी, Zee के लिए संभावित तौर पर सबसे बेहतर विकल्प के रूप में भी सामने आ सकते हैं. 
चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला की अध्यक्षता वाला आदित्य बिरला ग्रुप भी उन कंपनियों में से एक है जो Zee के लिए एक संभावित विकल्प हो सकती हैं. 2012 में आदित्य बिरला ग्रुप ने इंडिया टुडे ग्रुप में हिस्सेदारी प्राप्त की थी और मीडिया में जगह बनाने के लिए तीव्र इच्छा प्रकट की थी. आपको बता दें कि अप्लौज एंटरटेनमेंट (Applause Entertainment) भी आदित्य बिरला ग्रुप ऑफ कम्पनीज की कंपनियों में से एक है और यह एक मीडिया, कंटेंट और IP क्रिएशन स्टूडियो है जिसकी अध्यक्षता समीर नायर करते हैं. अप्रैल 2023 में वोडाफोन आईडिया के बोर्ड में भी कुमार मंगलम बिरला की वापसी हुई और उनका कहना है कि उन्हें इस कारोबार में उम्मीद नजर आती है. आने वाले समय में दुनिया भर में टेलिकॉम कंपनियों के विकास में कंटेंट प्रमुख भूमिका निभाएगा और इसीलिए Zee एक ऐसा विकल्प है जिस पर विचार जरूर किया जाना चाहिए. 
ठीक इसी तरह, इस पूरे परिदृश्य में सुनील भारती मित्तल को भी एक भागीदार के रूप में देखा जा सकता है. एयरटेल खुद को ठीक करने के लिए लगातार कई महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही है और एयरटेल TV के माध्यम से कंटेंट भी उपलब्ध करवाया जा रहा है. अगर अंबानी परिवार के प्रभुत्व वाले इस क्षेत्र में एयरटेल अपनी स्थिति को बेहतर करना चाहता है तो क्रेडिबिलिटी और विविध विकल्पों के साथ Zee एक मजबूत विकल्प के रूप में मौजूद है. 
हमें यहां अरबपति उद्यमी संजीव गोयनका के RPSG ग्रुप को नहीं भूलना चाहिए. RP संजीव गोयनका समूह की रूचि विभिन्न क्षेत्रों में है जिनमें स्पोर्ट्स, रिटेल और मीडिया एवं एंटरटेनमेंट भी शामिल हैं. Zee की वर्तमान संपत्ति और उसकी ताकत के साथ दोनों कंपनियों के बीच एक मजबूत सहयोग बनाया जा सकता है. 

एक लंबा रास्ता तय किया है, एक लंबा सफर बाकी है
भारत में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को बदलने वाले सुभाष चंद्र और आगे चलकर पुनीत गोयनका और उनकी टीम की अध्यक्षता में जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee) भारत में एक मीडिया कंपनी से कहीं ज्यादा बड़े रूप में सामने आई है. आपको बता दें कि शेयरहोल्डर्स की बेहतरी के लिए पुनीत गोयनका सोनी के साथ होने वाली मर्जर डील के दौरान CEO का पद त्यागने तक को तैयार हो गए थे. वैश्विक स्तर पर एक फाइटर और सर्वाइवर के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त करने वाले डॉक्टर चंद्र के साथ Zee ग्रुप विश्व के विभिन्न खिलाड़ियों के साथ लड़ते हुए अपनी स्थिति बरकरार रख कर काफी आगे आ गया है. आगे आने वाली यात्रा में एक बार फिर चुनौतियां नजर आ रही हैं. स्पष्ट तौर पर देखें तो Zee के पास बहुत सारे विकल्प नहीं हैं लेकिन ग्रुप ने अपने स्टेकहोल्डर्स से वादा किया है कि इस क्षेत्र में बहुत जल्द बहुत ज्यादा कुछ खोजा जाएगा.
 

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