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HNG Insolvency: जस्टिस नरीमन ने कहा कानून के विपरित है AGI रिज्युलेशन प्लान

COC ने CCI की मंजूरी से पहले AGI ग्रीनपैक की समाधान योजना को मंजूरी दे दी, जो दिवाला दिवालियापन संहिता के अनुसार अनिवार्य है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पलक शाह
 

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश व वाणिज्यिक विवादों, दिवालियापन और मध्यस्थता से संबंधित मामलों के एक विशेषज्ञ जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने कहा है कि हिंदुस्तान नेशनल ग्लास (HNG) के अधिग्रहण के लिए AGI ग्रीनपैक की समाधान योजना कानून के विपरीत है. नरीमन सर्वोच्च न्यायालय के तीसरे न्यायाधीश हैं जिन्होंने अपनी राय में दिवालियापन कार्यवाही के दुरुपयोग को उजागर किया है. उनसे पहले, न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति एन.वी. रमना, दो सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीशों ने भी मामले में कदाचार (Malpractice) को उजागर किया था.

कानून के विपरित दी गई मंजूरी

जस्टिस नरीमन ने इस मामले पर अपनी राय देते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि COC और न्यायाधिकरण द्वारा AGI की समाधान योजना को मंजूरी देना कानून के विपरीत होगा, क्योंकि यह स्पष्ट है कि AGI को 28 अक्टूबर, 2022 को सफल समाधान आवेदक (Successful Resolution Applicant) घोषित किया गया था, जबकि आयोग (Competition Commission of India) से सशर्त मंजूरी 15 मार्च, 2023 को ही प्राप्त हुई थी.

COC ने CCI की मंजूरी के बिना दी मंजूरी

HNG CIRP में सबसे बड़ा विवाद यह है कि Edelweiss ARC के साथ बैंकों के एक संघ के नेतृत्व में COC ने आरपी जुनेजा द्वारा मतदान के लिए रखी गई एजीआई ग्रीनपैक (AGI Greenpac) की समाधान योजना को मंजूरी दे दी, भले ही इसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से पूर्व अप्रूवल नहीं था, चूंकि HNG और एजीआई ग्रीनपैक (AGI Greenpac) दोनों भारत में कंटेनर ग्लास निर्माण के एक ही व्यवसाय में हैं, इसलिए उनके संयोजन के लिए पूरी तरह से जांच और CCI की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता है. लेकिन RO और COC पर आरोप है कि उन्होंने CCI की मंजूरी मिलने से पहले ही AGI की योजना को मंजूरी दे दी थी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दी मंजूरी

सबसे दिलचस्प बात यह है कि COC द्वारा AGI की योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद, CCI ने केवल सशर्त मंजूरी दी, जो फिर से सुप्रीम कोर्ट की स्थापित मिसालों और भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के फैसलों के खिलाफ है. Ebix Singapore Private Limited और अन्य Educomp Solutions Limited के लेनदारों की समिति में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह के फैसले के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने देखा था कि राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) द्वारा समाधान योजना को मंजूरी देने के संबंध में शर्तें पेश करने की अनुमति देने से बातचीत का एक अतिरिक्त स्तर शुरू हो जाएगा, जिसकी भारतीय दिवालियापन संहिता (IBC) की योजना के तहत अनुमति नहीं है.

CCI की पूर्व स्वीकृति लेना आवश्यक

न्यायमूर्ति नरीमन के अनुसार, 2018 में IBC के नए प्रावधान से यह स्पष्ट होता है कि जहां समाधान योजना में संयोजन का प्रावधान है, वहां आवेदक को COC द्वारा ऐसे समाधान को मंजूरी देने से पहले CCI की पूर्व स्वीकृति लेनी होगी. न्यायमूर्ति नरीमन ने इसके साथ ही कहा कि यह स्थापित कानून है कि किसी प्रावधान को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए, यदि कानून में ऐसे प्रावधान के उल्लंघन का परिणाम हो. इस प्रावधान के उल्लंघन का स्पष्ट परिणाम यह है कि कानून में कोई समाधान योजना नहीं है क्योंकि समाधान योजना कानून के विपरीत होगी और इसलिए IBC की धाराओं का उल्लंघन करेगी. सीधे शब्दों में कहें तो, उनका कहना है कि अगर CCI की पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई, जो इस मामले में अनिवार्य थी, तो AGI के समाधान का उल्लंघन होगा. 

Edelweiss को छोड़कर सभी ने मतदान किया

बोली की शर्तों के अनुसार आरपी जुनेजा ने बोलीदाताओं को ईमेल भेजा था जिसमें कहा गया था कि CCI की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी. लेकिन जब AGI Greenpac की CCI से पूर्व स्वीकृति के लिए पहली बार की गई अपील खारिज कर दी गई, तो आरपी ने मानदंडों में ढील दी और CCI की मंजूरी न होने के बावजूद COC के समक्ष मतदान की अपनी योजना रखी. Edelweiss को छोड़कर COC के सभी अन्य सदस्यों ने दो बोलीदाताओं के पक्ष में समान रूप से मतदान किया, जिनमें से एक के पास पहले से CCI की मंजूरी थी. बाद में यह पता चला कि Edelweiss Alternative Asset Advisors, जो Edelweiss ARC के समान समूह से संबंधित एक कंपनी है उसने AGI को 1100 करोड़ रुपये के फंडिंग का वादा किया था.

RP के पास कोड के तहत कोई न्यायिक शक्तियां नहीं

जस्टिस नरीमन की राय में 25 अगस्त 2022 को आरपी जुनेजा द्वारा भेजा गया ईमेल स्पष्ट रूप से आईबीसी की धारा 31 (4) के अनिवार्य प्रावधानों के विरुद्ध है. यह आरपी का वही ईमेल है जिसमें उन्होंने बोली लगाने वालों से कहा था कि वे सौदे के लिए सीसीआई से पूर्व स्वीकृति लें. जस्टिस नरीमन ने कहा कि आरपी द्वारा इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है कि ऐसा प्रावधान निर्देशात्मक क्यों होगा - और किसी भी मामले में यह घोषित करना कि कानून क्या है और छूट प्रदान करना आरपी के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर है. यह अच्छी तरह से स्थापित है कि आरपी के पास कोड के तहत कोई न्यायिक शक्तियां नहीं हैं.

RP के पास कानून का कोई अधिकार नहीं

क्या RP और COC, CIRP कार्यवाही को निष्पक्ष रूप से तथा IBC की योजना और उद्देश्य और उसके अंतर्गत विनियमों के अनुसार संचालित करने में विफल रहे? इस सवाल के जवाब में जस्टिस नरीमन ने कहा कि हां, आर.पी. के पास कानून के किसी भी अनिवार्य प्रावधान को माफ करने का कोई अधिकार नहीं है. कानून नहीं, बल्कि ऋणदाताओं की व्यावसायिक समझदारी के प्रश्न पर न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा कि यह पूरी तरह से COC के विवेक पर निर्भर करता है कि वह किस समाधान योजना को प्राथमिकता देना चाहती है.

क्या है मामला?

HNG भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कंटेनर ग्लास निर्माण कंपनी है जो अब कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान कार्यवाही (CIRP) से गुजर रही है. HNG के लिए AGI की समाधान योजना को ऋणदाताओं की समिति (COC) द्वारा अनुमोदित किया गया था, जब इसे समाधान पेशेवर (RP) गिरीश जुनेजा द्वारा निर्धारित शर्तों के उल्लंघन में वोट के लिए रखा गया था. HNG CIRP कदाचार (Malpractice) के आरोपों से घिरी हुई है और इसके आसपास के विभिन्न विवादों के कारण यह भारत में सबसे लंबे समय तक चलने वाले ऋण समाधानों में से एक है. 
 


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