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खनिज अधिकार कर मामले में केंद्र-राज्य आमने-सामने, 20 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

यह मामला 25 जुलाई 2024 को आए सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले से शुरू हुआ था. 8:1 के बहुमत से दिए गए इस फैसले में कहा गया कि राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी क्षमता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत का सुप्रीम कोर्ट 20 मई को खनिज अधिकारों पर कर लगाने के राज्यों के विधायी अधिकार से जुड़े कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. यह मामला तब सामने आया जब केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इस विषय पर उसकी क्यूरेटिव याचिका अभी लंबित है. यह विवाद पिछले साल आए एक ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जिसमें राज्यों को खनिज युक्त भूमि और खनिज अधिकारों पर कर लगाने का अधिकार मान्यता दी गई थी.

संविधान पीठ के फैसले से शुरू हुआ विवाद

यह मामला 25 जुलाई 2024 को आए सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले से शुरू हुआ था. 8:1 के बहुमत से दिए गए इस फैसले में कहा गया कि राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी क्षमता है.

अदालत ने स्पष्ट किया था कि संविधान की यूनियन लिस्ट की एंट्री 54 के तहत संसद को खनिज भूमि और खनिज अधिकारों पर कर लगाने का एकमात्र अधिकार प्राप्त नहीं है.

केंद्र सरकार की क्यूरेटिव याचिका लंबित

इस फैसले के बाद सितंबर 2024 में पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं. इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल कर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई तब तक न की जाए जब तक क्यूरेटिव याचिका पर निर्णय नहीं हो जाता.

कुछ वकीलों ने इस अनुरोध का समर्थन करते हुए सुनवाई टालने की बात कही, जबकि राज्यों की ओर से पेश वकीलों ने देरी का विरोध किया और कहा कि पुनर्विचार याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं.

2005 से जुड़े बकाया वसूली के आदेश

14 अगस्त 2024 के एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने खनिज संपन्न राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि से संबंधित रॉयल्टी और टैक्स की वसूली की अनुमति दी थी. यह वसूली 1 अप्रैल 2005 से बकाया राशि पर लागू होगी और इसे 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 12 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से वसूला जाएगा.

ब्याज और जुर्माने पर राहत

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि 25 जुलाई 2024 से पहले की अवधि के लिए उठाए गए किसी भी कर या मांग पर ब्याज या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. यह निर्णय लंबे समय से चले आ रहे कानूनी अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए दिया गया था.

केंद्र और राज्यों के बीच जारी कानूनी टकराव

यह मामला केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर चल रहे लंबे कानूनी संघर्ष को दर्शाता है. अब सभी की नजरें 20 मई की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे इस विवाद की दिशा तय हो सकती है.
 


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