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अडानी परिवार की शादी का उत्सव: परंपरा, आधुनिकता और समाज सेवा का संगम

यह शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अडानी परिवार की समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें हर पहलू में कला, परंपरा और सशक्तिकरण जुड़ा हुआ है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

यह शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज के उत्थान के लिए अडानी परिवार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें कला, परंपरा और सशक्तिकरण झलकता है. अडानी परिवार में बहुप्रतीक्षित शादी शुक्रवार (7 फरवरी) को संपन्न हुई. यह शादी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई थी. लोग इसे एक और शानदार पारिवारिक समारोह मान रहे थे, जिसमें दुनियाभर की मशहूर हस्तियां मेहमान बनने के कयास लगाए जा रहे थे. क्योंकि जीत अडानी, जो अडानी परिवार के उत्तराधिकारी हैं, दीवा शाह से शादी करने वाले थे.

लेकिन, गौतम अडानी ने साफ कर दिया था कि यह शादी दो दिलों और दो परिवारों का मिलन है और इसे केवल नजदीकी दोस्तों और शुभचिंतकों के साथ पारंपरिक तरीके से मनाया जाएगा और ऐसा ही हुआ जीत अडानी, जो दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) के समर्थन में काम करते हैं, इस शादी के माध्यम से समावेशिता (Inclusivity) का संदेश दिया. यह शादी सिर्फ प्रेम का उत्सव नहीं, बल्कि उन लोगों की ताकत, प्रतिभा और क्षमता को पहचानने की पहल है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. इससे समाज को जोड़ने वाली और सार्थक शादियों का एक नया उदाहरण स्थापित होगा.

ग्रीनएक्स टॉक्स (GreenX Talks), जो अडानी फाउंडेशन की एक पहल है, समाज के लिए लाभदायक समाधान तलाशती है. यह ऐसे सामाजिक उद्यमियों को पहचान देती है, जो लाभ से ज्यादा समाज पर प्रभाव डालने को प्राथमिकता देते हैं. यह मंच संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के तहत बदलाव लाने वालों को प्रोत्साहित करता है ताकि एक समानता से भरी दुनिया बनाई जा सके. ग्रीनएक्स टॉक्स 2022 में कई ऐसे लोगों ने अपनी कहानियां साझा कीं, जिन्होंने शारीरिक चुनौतियों को पार करते हुए दृढ़ संकल्प, लक्ष्य निर्धारण और आत्म-निर्भरता का उदाहरण पेश किया.  

अडानी फाउंडेशन पूरे भारत में बदलाव लाने का काम कर रहा है. इसका प्रभाव 6,769 गांवों में 91 लाख लोगों तक पहुंचा है. यह फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामुदायिक विकास पर ध्यान देकर, गरीब और वंचित समुदायों को आगे बढ़ने के अवसर दे रहा है. अडानी ग्रुप में 30 से अधिक दिव्यांगजन कार्यरत हैं, जो यह दिखाता है कि ग्रीनएक्स टॉक्स एक समावेशी (Inclusive) कार्यस्थल को बढ़ावा दे रहा है, जहां हर व्यक्ति की क्षमता को महत्व दिया जाता है.

इसी संदर्भ में, शार्क टैंक के एक हालिया एपिसोड में जीत अडानी ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) और सामाजिक उत्थान से जुड़े कार्य उनके काम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. उन्होंने बताया कि अडानी फाउंडेशन का मूल सिद्धांत यह है कि हर इंसान सिर्फ उसकी शारीरिक या मानसिक सीमाओं से नहीं पहचाना जाना चाहिए, बल्कि उसे सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है. जीत अडानी ने अपने संसाधनों और प्रभाव का उपयोग वंचित लोगों के उत्थान के लिए किया है.

जीत अडानी ने साझा किया कि उनके अंदर बचपन से ही संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना थी, जो उनके दादा-दादी से मिली. उनकी दादी ने उन्हें सेवा (निःस्वार्थ सेवा) का महत्व सिखाया, जिससे उन्हें समाज में सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा मिली. जीत के जनकल्याण कार्यों का मुख्य आधार मिट्टी कैफे (Mitti Café) और FOD (Family for Disabled) जैसे NGO के साथ उनकी भागीदारी है. इन संगठनों के माध्यम से वह दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार देने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए काम कर रहे हैं. मिट्टी कैफे जैसी पहल के जरिए जीत यह संदेश देना चाहते हैं कि रोजगार सिर्फ जीने का साधन नहीं, बल्कि सम्मान लौटाने का जरिया भी है. 

इसी सोच के तहत अडानी ग्रुप ने यह फैसला किया है कि उसकी कुल कार्यबल (वर्कफोर्स) का कम से कम 5% हिस्सा PwDs (दिव्यांगजन) होंगे. यह दिखाता है कि समावेशिता (Inclusion) को ग्रुप की विकास नीति का अहम हिस्सा बनाया गया है. उद्यमिता (Entrepreneurship) और समाज सेवा साथ-साथ चल सकते हैं. सही सोच के साथ, दिव्यांगजन और समावेशिता भी सफलता की ओर ले जा सकते हैं. जरूरत सिर्फ धैर्यपूर्वक निवेश (Patient Capital) की है—सिर्फ दान नहीं, बल्कि असली निवेश जो इन लोगों को लाभार्थी नहीं, बल्कि सशक्त उद्यमी बनाए. 

अडानी ग्रुप इस दिशा में निवेश करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. अब समय आ गया है कि हम नई पीढ़ी के ऐसे उद्यमियों को पहचाने, समर्थन दें और प्रेरित करें जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकें. "हम करके दिखाते हैं" अडानी ग्रुप का मिशन है, और इसे पूरा करने के लिए जीत अडानी को "शार्क टैंक" में मेंटर बनकर समावेशी (Inclusive) बिजनेस का मार्गदर्शन और निवेश करना चाहिए. यह सिर्फ जागरूकता नहीं, बल्कि एक्शन लेने का समय है. एक पूरा एपिसोड दिव्यांग उद्यमियों और उनके लिए काम कर रहे लोगों पर केंद्रित होना चाहिए. 

जीत अडानी और उनकी मंगेतर दीवा शाह हाल ही में "मिट्टी कैफे" पहुंचे, जो दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार देने में मदद करता है. वहां उन्होंने समर्पित टीम से मुलाकात की और इस मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. दिव्यांगों की मदद करना जीत अडानी के दिल के बहुत करीब है. मिट्टी कैफे की संस्थापक अलीना से प्रेरित होकर, जीत ने मुंबई एयरपोर्ट पर एक कैफे खोलने में उनकी मदद की. उद्घाटन के दौरान वहां मौजूद दिव्यांग कर्मचारियों का उत्साह और संघर्ष देखकर जीत भावुक हो गए. इसी अनुभव से प्रेरित होकर, उन्होंने अडानी ग्रुप में 5% दिव्यांग कर्मचारियों को काम देने का संकल्प लिया. समावेशिता (Inclusion) और जागरूकता बढ़ाने के लिए अडानी ग्रुप ने "ग्रीन एक्स टॉक्स" लॉन्च किया. यह कदम अडानी परिवार की सामाजिक जिम्मेदारी और समुदाय के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है. 

एशिया के मशहूर डिज़ाइनर मनीष मल्होत्रा, जो अपने शानदार और आइकॉनिक फैशन डिज़ाइनों के लिए जाने जाते हैं, अब एक अनोखी साझेदारी का हिस्सा बने हैं. वह "फैमिली ऑफ डिसेबल्ड" (FOD) नामक NGO के साथ मिलकर फैशन को एक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ रहे हैं. इस साझेदारी के तहत मनीष मल्होत्रा जीत अडानी और दीवा शाह की शादी के लिए खास शॉल डिजाइन करेंगे. यह सिर्फ खूबसूरत कपड़े बनाने का काम नहीं है, बल्कि दिव्यांग कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और बेहतरीन डिजाइनरों के साथ काम करने का मौका देने की पहल है. धीरे-धीरे, हर डिज़ाइन के साथ, मनीष मल्होत्रा सशक्तिकरण की कहानी बुन रहे हैं, जिससे यह साझेदारी फैशन जगत में एक ऐतिहासिक क्षण बन रही है, जहां फैशन एक बड़े सामाजिक उद्देश्य से जुड़ रहा है.

अडानी परिवार यह सुनिश्चित किया कि शादी में कला और शिल्प का योगदान हो. वे FOD, दिल्ली और काई रासी, चेन्नई जैसे NGOs के साथ मिलकर दिव्यांग व्यक्तियों (PWDs) को सशक्त बना रहे हैं. FOD मनीष मल्होत्रा के साथ मिलकर हाथ से पेंट किए गए शॉल बनाएंगे, जबकि काई रासी कलात्मक प्लेट्स और डिजिटल प्रिंटेड प्लेकार्ड्स बनाएंगे.

इसके अलावा, अहमदाबाद की निकिता जी कस्टम बीडेड हार्स और क़मरबंद बनाएंगी, जबकि प्रकाश जी, जो एक नैल आर्टिस्ट हैं, अपनी नाखूनों से बुकमार्क्स बनाएंगे, जिससे हर टुकड़ा एक अनोखा कला का नमूना बनेगा. मुन्ना जी और नजमीन, जो फिरोजाबाद से एक पिता-पुत्री की जोड़ी हैं, कांच की कला बनाएंगे, जिसे शादी के सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. जोधपुर के बिबाजी चूड़ी वाला तीन प्रकार की चूड़ियां देंगे, जिसमें लैक चूड़ियां भी शामिल हैं, जो पारंपरिक शिल्प को दर्शाती हैं. यवला, नासिक के जगदीश जी पैठानी साड़ियों का योगदान देंगे, जिन्हें 400 कारीगरों द्वारा बुनकर तैयार किया गया है, और ये साड़ियाँ मेहमानों को तोहफे के रूप में दी जाएंगी, जो भारतीय पारंपरिक बुनाई का समर्थन करती हैं. मुंद्रा की निताबेन और उनकी सेल्फ-हेल्प ग्रुप "मेघधनुष सहेली" भी अपने सुंदर मिट्टी कला से योगदान देंगी, जिनका अडानी फाउंडेशन के साथ जुड़ाव 2016 से है.

यह शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अडानी परिवार की समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें हर पहलू में कला, परंपरा और सशक्तिकरण को जोड़ा गया. गौतम अडानी के छोटे बेटे जीत अडानी की शादी से पहले, अडानी परिवार ने एक नई पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य दिव्यांग नवविवाहित महिलाओं की मदद करना है. हर साल 500 ऐसी महिलाओं को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर होकर अपनी नई जिंदगी सम्मान और आत्मविश्वास के साथ शुरू कर सकें. इस पहल की शुरुआत में, जीत अडानी ने 25 दिव्यांग नवविवाहित महिलाओं और उनके पतियों से मुलाकात की और उन्हें आर्थिक सहायता दी, जिससे वे एक सुरक्षित भविष्य बना सकें.

जीत अडानी और दीवा शाह की शादी, जो 7 फरवरी 2025 को अहमदाबाद, गुजरात में संपन्न हुई, सिर्फ एक निजी खुशी नहीं बल्कि समाज सेवा से जुड़ा एक खास अवसर भी था. "मंगल सेवा" पहल के माध्यम से, अडानी परिवार समाज में जागरूकता बढ़ाना चाहता है और सभी को प्रेरित करना चाहता है कि वे एक समावेशी (Inclusive) दुनिया बनाने में योगदान दें, जहां हर व्यक्ति, चाहे किसी भी क्षमता का हो, खुशी और सम्मान से जीवन के खास लम्हों को मना सके.  

मंगल सेवा सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह उन चुनौतियों के बारे में जागरूकता फैलाने का एक प्रयास है, जिनका सामना विशेष रूप से दृष्टिहीन (Visually Impaired) लोग करते हैं. यह पहल एक ऐसा मंच बना रही है जो समावेशिता (Inclusion) और सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा देता है, यह दिखाते हुए कि प्यार और सशक्तिकरण समाज में स्थायी बदलाव ला सकते हैं.

जीत अडानी के पिता, गौतम अडानी ने "मंगल सेवा" पहल पर गर्व जताते हुए ट्विटर पर अपनी खुशी जाहिर की. उन्होंने ट्वीट किया, "मुझे विश्वास है कि यह प्रयास कई दिव्यांग महिलाओं और उनके परिवारों के जीवन में खुशी, शांति और सम्मान लाएगा. इस नेक कार्य में पूरी श्रद्धा के साथ, मैं प्रार्थना करता हूं कि जीत और दीवा को इस मिशन को आगे बढ़ाने की शक्ति और आशीर्वाद मिलता रहे, जिससे वे प्यार और सेवा का संदेश फैला सकें."  

यह शादी सिर्फ एक निजी समारोह नहीं, बल्कि समाज सेवा और सशक्तिकरण का संदेश देने वाला आयोजन था. अडानी परिवार ने इस शादी को खास बनाने के लिए NGO और कलाकारों के साथ मिलकर दिव्यांग व्यक्तियों को सशक्त बनाने और पारंपरिक कारीगरी को बढ़ावा देने की पहल की. 

इस जोड़े की समावेशिता (Inclusivity) के प्रति प्रतिबद्धता ने पारंपरिक शादी को एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संदेश बना दिया है. इन साझेदारियों के माध्यम से, अडानी परिवार यह दिखाना चाहता है कि शादी केवल उत्सव तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समाज में बदलाव लाने और एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी हो सकती है.
 


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