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अमेरिका के टैरिफ लगाने से भारत के किस सेक्टर्स पर क्या होगा असर? जानिए डिटेल्स

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को बड़ा झटका दिया है. ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. जिससे भारत के निर्यात पर गहरा असर देखने को मिल सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनियाभर के कई देशों पर 49% तक के जवाबी टैरिफ का ऐलान कर दिया है. 'Make America Wealthy Again' इवेंट में उन्होंने Reciprocal Tariffs का ऐलान किया, जिसमें उन्होंने कई बड़ी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि 'अब समृद्ध होने की बारी हमारी है. सालों तक, मेहनती अमेरिकी नागरिकों को किनारे बैठने के लिए मजबूर किया गया. अब हम जवाबी टैरिफ लगाएंगे. उन्होंने भारत पर 26% का टैरिफ लगाया है.

हालांकि, इस लिस्ट में ये देखने वाली बात है कि उन्होंने हर देश पर इस लिहाज से टैरिफ नहीं लगाया है, कि वो जितना टैरिफ अमेरिका से वसूल रहे हैं, उतना ही अमेरिका भी लगाएगा. टैरिफ रेट में वैरिएशन है. कई देशों पर जैसे कि भारत, जितना टैरिफ है, उसका आधा ही रेसिप्रोकल टैरिफ लगा है. आइए जानते हैं किन पर दिख सकता है सबसे अधिक असर...

इलेक्ट्रॉनिक्स: खतरे में भारत का अमेरिका को सबसे बड़ा निर्यात

वित्त वर्ष 2024 में अमेरिका को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात कुल 11.1 बिलियन डॉलर रहा, जो अमेरिका को देश के कुल निर्यात का 14% है. बदले में, अमेरिका भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का चौंका देने वाला 32 फीसदी हिस्सा है. विश्लेषकों का कहना है कि 9 फीसदी का क्षेत्रीय टैरिफ अंतर इस उद्योग को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.

रत्न और आभूषण का सेक्टर

रत्न और आभूषण, एक ऐसा क्षेत्र जिसमें भारत ग्लोबली सबसे ऊपर है, जिस पर काफी रिस्क बना हुआ है. इस श्रेणी में भारत के कुल 33 बिलियन डॉलर के निर्यात में अमेरिका का हिस्सा 30 फीसदी (9.9 बिलियन डॉलर) है, जिसमें कटे और पॉलिश किए गए हीरे, जड़े हुए सोने के आभूषण और प्रयोगशाला में तैयार किए गए हीरे शामिल हैं.

फार्मास्यूटिकल्स इंडस्ट्री

भारत अमेरिका के जेनेरिक दवा इंपोर्ट कर 47 फीसदी हिस्सा सप्लाई करता है, जो इसे अमेरिका की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाता है. विश्लेषकों ने कहा कि भारत के जेनेरिक दवा निर्यात का लो वैल्यू-हाई वॉल्यूम नेचर भारतीय फार्मा उत्पादों की लो कॉस्ट को दिखाता है, जो इसे अमेरिका के लिए आकर्षक बनाता है, और इसलिए इसे बदलना मुश्किल है.

ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट

चूंकि भारत के ऑटो एक्सपोर्ट के लिए अमेरिका एक महत्वपूर्ण निर्यात गंतव्य नहीं है, इसलिए ओईएम पर सीधा प्रभाव सीमित हो सकता है, लेकिन ऑटो कंपोनेंट मेकर्स को जोखिम का सामना करना पड़ सकता है. वित्त वर्ष 24 में भारत के ऑटो कंपोनेंट एक्सपोर्ट में अमेरिका को कुल निर्यात का 27 फीसदी हिस्सा था. सोना कॉमस्टार (उत्तरी अमेरिका से राजस्व का 43 फीसदी) और संवर्धन मदरसन (अमेरिका से 18% राजस्व) जैसे लोकल प्लेयर्स को काफी बड़ा रिस्क है.

टेक्स्टाइल और अपैरल सेक्टर

वित्त वर्ष 2024 में अमेरिका को भारत का टेक्स्टाइल और अपैरल एक्सपोर्ट कुल 9.6 बिलियन डॉलर रहा, जो इंडस्ट्री के कुल एक्सपोर्ट का 28 फीसदी है. इस सेक्टर को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जो टैरिफ के कारण भारतीय सामान के महंगे होने पर कॉस्ट बेनिफिट प्राप्त कर सकते हैं.

सेक्टर टैरिफ अंतर सालाना कारोबार

• इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम 7.24% 14.39 अरब डॉलर
• फार्मा उत्पाद 10.90% 12.72 अरब डॉलर
• सोना, चांदी और आभूषण 3.32% 1.88 अरब डॉलर
• मशीनरी और कंप्यूटर 5.29% 7.10 अरब डॉलर
• रसायन (फार्मा को छोड़कर) 6.05% 5.71 अरब डॉलर
• वस्त्र, यार्न और कालीन 6.59% 2.76 अरब डॉलर
• मछली, मांस और समुद्री भोजन 27.83% 2.58 अरब डॉलर
• अनाज, सब्जियां और मसाले 5.72% 1.91 अरब डॉलर
• सिरेमिक और कांच 8.27% 1.71 अरब डॉलर
• रबर उत्पाद 7.76% 1.06 अरब डॉलर
• प्रोसेस्ड फूड, चीनी और कोको 24.99% 1.03 अरब डॉलर
• डेयरी प्रोडक्ट 38.23% 181.49 मिलियन डॉलर

भारत झटकों को सहने में सक्षम

विशेषज्ञों का आकलन है कि भारत उन्नत और उभरते जी-20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगाय एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी बाजार पर निर्यात को लेकर कम निर्भरता (जीडीपी का मात्र 2 प्रतिशत) भारत को संभावित दुष्प्रभावों से मुकाबला करने में सक्षम बनाती हैं. रेटिंग एजेंसियों ने भी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक है.
 


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