होम / एक्सप्लेनर / यूपी के बंटवारे की माया की इच्छा यदि पूरी हुई, तो कितना बदल जाएगा उत्तर प्रदेश?

यूपी के बंटवारे की माया की इच्छा यदि पूरी हुई, तो कितना बदल जाएगा उत्तर प्रदेश?

मायावती ने लोकसभा चुनाव के बीच एक बार फिर से अवध और पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मुद्दा छेड़ा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

बहुजन समाजवादी पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने लोकसभा चुनाव के बीच अवध और पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग प्रदेश बनाने का मुद्दा फिर से छेड़ दिया है. मायावती का कहना है कि यदि केंद्र में उनकी सरकार आती है, तो उत्तर प्रदेश का बंटवारा करके अवध को अलग प्रदेश बनाएंगे. हाल ही में बसपा प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए माया ने कहा था कि अवध को अलग राज्य बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है. जब केंद्र में हमारी पार्टी सत्ता में आएगी तो अवध क्षेत्र को अलग से राज्य बनाया जाएगा. 

क्या था मायवती के प्रस्ताव में?  
ऐसा नहीं है कि मायावती को लोकसभा चुनाव के बीच अचानक यह मुद्दा याद आ गया. जब वह उत्तर प्रदेश की सत्ता में थीं, तब भी उन्होंने यह कोशिश की थी. नवंबर 2011 में मायावती की तत्कालीन सरकार ने उत्तर प्रदेश को चार राज्यों - पूर्वांचल, पश्चिम प्रदेश, अवध प्रदेश और बुन्देलखंड में बांटने का विधेयक पारित किया था. हालांकि, केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उनकी यह हसरत पूरी नहीं होने दी. केंद्र सरकार ने कई स्पष्टीकरण मांगते हुए प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास वापस भेज दिया था. मायावती ने अपने कार्यकाल में यूपी में बड़े स्तर पर जगह, संस्थानों के नाम बदले थे. उदाहरण के तौर पर हाथरस को महामाया नगर बनाया गया और आगरा स्टेडियम को एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम.  

कौनसे जिले हैं अवध का हिस्सा?
इस मुद्दे पर आगे बढ़ने से पहले यह जान लेते हैं कि अवध क्या है और इसमें कौनसे जिले आते हैं. अवध उत्तर प्रदेश का एक भाग है, जिसे पूर्व में कौशल कहा जाता था. पहले इसकी राजधानी अयोध्या हुआ करती थी, लेकिन बाद में अवध की राजधानी लखनऊ को बनाया गया. अवध उर्दू कविता का भी प्रमुख केंद्र रहा है. अवध में 25 जिले आते हैं. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के साथ-साथ सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव, कानपुर, भदोही, प्रयागराज, बाराबंकी, अयोध्या, अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, बहराईच, बलरामपुर, गोंडा, हरदोई, लखीमपुर खीरी, कौशांबी, सीतापुर, श्रावस्ती, फतेहपुर, जौनपुर(पश्चिमी हिस्सा), मिर्जापुर(पश्चिमी हिस्सा), कन्नौज, पीलीभीत, शाहजहांपुर इसी का हिस्सा हैं.

समर्थन में दिया था ये तर्क 
यूपी को बांटने की मायावती की मांग का दूसरे दल विरोध करते रहे हैं, लेकिन कुछ समय पहले BJP लीडर डॉ. संजीव बालियान ने पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग प्रदेश बनाने के माया के प्रस्ताव को उचित बताया था. उन्होंने तर्क दिया था कि छोटे प्रदेश विकास की सीढ़ियां तेजी से चढ़ते हैं, इसलिए यूपी का बंटवारा करके पश्चिम यूपी को अलग प्रदेश बनाया जाना चाहिए. उन्होंने मेरठ को पश्च‍िमी यूपी की राजधानी बनाने की वकालत की थी. मायावती के अलावा राष्ट्रीय लोकदल (RLD) भी पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने की मांग कर चुकी है. इसी तरह, राजा बुंदेला भी बुंदेलखंड को अलग करने की मांगे भी उठाते रहे हैं. इस बार के लोकसभा चुनाव में मायावती ने यूपी के बंटवारे की अपनी मांगों को दोहराया है. 

कितना बड़ा है पश्चिम यूपी?
माया जिस पश्चिम यूपी को अलग प्रदेश बनाना चाहती हैं, उसमें 18 जिले शामिल हैं. मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, बिजनौर, गाजियाबाद, हापुड, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा और मुरादाबाद पश्चिम उत्तर प्रदेश में आते हैं. राज्य की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 95 पश्चिम यूपी में हैं. उत्तर प्रदेश को पहले दो भागों में विभाजित किया गया था, जिससे उतराखंड का जन्म हुआ. उसके बाद से इसे कुछ और टुकड़ों में बांटने की मांग उठती रही है. मायावती ने इस लोकसभा चुनाव में फिर से उन मांगों को हवा दे दी है. हालांकि, इसकी संभावना लगभग न के बराबर है कि मायावती को चुनाव में इसका कोई फायदा मिलेगा. क्योंकि लोगों को भी अच्छे से समझ आ गया है कि इन मांगों का जिक्र केवल चुनावी मौसम में ही होता है.

क्या बंटवारे से मिलेगा कोई लाभ? 
अब सवाल ये उठता है कि आखिर मायावती या दूसरे नेता उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग क्यों करते रहे हैं? इसका पहला जवाब यह है कि इससे यूपी पर शासन करना आसान हो जाएगा और बसपा जैसी सियासी पार्टियों के सत्ता में आने की संभावना बढ़ जाएगी. हालांकि, कई जानकार यह भी मानते हैं कि छोटे राज्यों को बेहतर ढंग से चलाया जा सकता है. उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश पर आबादी का बोझ काफी ज्यादा है. 2011 में उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 19 करोड़ से अधिक थी. जबकि साल 2021 में जनसंख्या का आंकड़ा 23,15,0278 पहुंच गया. यदि प्रदेश को कुछ भागों में बांटा जाता है, तो आबादी का भी विभाजन हो जाएगा और ऐसे में व्यवस्थाओं को ज्यादा बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा.  

किताब में है इस बात का जिक्र 
एक रिपोर्ट के अनुसार, भीम राव आंबेडकर ने अपनी एक किताब में छोटे राज्यों के गठन का जिक्र किया था. यह किताब एक तरह से देश भर में भाषायी आधार पर राज्यों के बंटवारे की मांग के जवाब में लिखी गई थी. इसमें उन्होंने लिखा था कि एक राज्य की आबादी 2 करोड़ हो सकती है. जबकि यूपी की आबादी 23 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई है. कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सीमित जनसंख्या की बेहतरी के प्रयास ज्यादा अच्छे से हो सकते हैं. उनकी शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं पर सरकार ज्यादा ध्यान दे सकती है. हालांकि, इसका विरोध करने वालों की भी कमी नहीं है. उनका तर्क है कि यदि इसी आधार पर राज्यों को बांटते चले गए, तो भारत की स्थिति भी कुछ यूरोपीय देशों जैसी हो जाएगी जो छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित हैं. 

क्या है बंटवारे की प्रक्रिया?
आइए अब यह भी जान लेते हैं कि राज्य के बंटवारे की प्रक्रिया क्या होती है. इसके लिए सबसे पहले, संबंधित राज्य के विधानमंडल को एक प्रस्ताव पारित करना होता है. इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है. हालांकि, संसद राष्ट्रपति के निर्देश पर स्वत: संज्ञान लेकर भी इस मुद्दे को उठा सकती है. केंद्र सरकार के पास पहुंचने के बाद गृह मंत्रालय प्रस्ताव की जांच करता है. इसके बाद प्रस्ताव को कानून मंत्रालय को भेजा जाता है. कानून मंत्रालय इस पर विचार करके इसे कैबिनेट के पास भेज देता है. संसद के दोनों सदन - राज्य सभा और लोकसभा में रखने से पहले केंद्रीय कैबिनेट को इसे मंजूरी देनी होती है. राज्यसभा और लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ प्रस्ताव का पारित होना ज़रूरी है. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए राज्य के भौतिक गठन की प्रक्रिया पर काम किया जाता है.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

समझिए: भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण क्यों नहीं माना जाता?

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट कानूनी रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण.

26-June-2026

क्या है 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता, जिससे पाकिस्तान में मचेगा हाहाकार, कितना होगा असर?

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ 1960 से चले आ रहे जल समझौते का बोझ आगे नहीं ढोएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को प्रभावी रूप से बंद नहीं कर देता है.

24-April-2025

अमेरिका के टैरिफ लगाने से भारत के किस सेक्टर्स पर क्या होगा असर? जानिए डिटेल्स

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को बड़ा झटका दिया है. ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. जिससे भारत के निर्यात पर गहरा असर देखने को मिल सकता है.

03-April-2025

भारत की तरक्की को कई गुना बढ़ा रही महिला एंटरप्रेन्योर, NeoGrowth की रिपोर्ट में आया सामने

3,000 से अधिक महिला उद्यमियों के सर्वेक्षण पर आधारित इस रिपोर्ट में महिलाओं की व्यापारिक सफलता और उनके सामने आने वाली चुनौतियों दोनों को दिखाया गया है.

06-March-2025

अडानी परिवार की शादी का उत्सव: परंपरा, आधुनिकता और समाज सेवा का संगम

यह शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अडानी परिवार की समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें हर पहलू में कला, परंपरा और सशक्तिकरण जुड़ा हुआ है.

24-February-2025


बड़ी खबरें

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

9 hours ago

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

6 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

7 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

7 hours ago

भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.924 अरब डॉलर की गिरावट, 10 हफ्तों की बढ़त पर लगा ब्रेक

विदेशी मुद्रा आस्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है.

14 hours ago