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Explainer: सोने का निखार तो समझ आता है, लेकिन चांदी क्यों दिखा रही है भाव?

चांदी की कीमत में आज तेजी देखने को मिली है. इसी के साथ यह अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

सोना (Gold) जहां आज कुछ सस्ता हुआ है. वहीं, चांदी (Silver) में उछाल देखने को मिला है. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, आज कारोबार के दौरान सोना 51 रुपए सस्ता होकर 73,387 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है. जबकि चांदी ने अपना ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड बनाया है. चांदी 41 रुपए महंगी होकर 86,271 रुपए प्रति किलो ग्राम पर पहुंच गई है. सोने के ऑल टाइम हाई की बात करें, तो यह 73,596 रुपए का है, जो उसने 19 अप्रैल को बनाया था. 

एक लाख के पार जाएगी कीमत!
सोना जब महंगा होता है, तो लोगों को ज्यादा आश्चर्य नहीं होता. क्योंकि सब जानते हैं कि इसे सबसे सुरक्षित और अच्छा निवेश विकल्प माना जाता है. दुनिया में जब भी कोई हलचल होती है, सोना खरीदने वालों की संख्या बढ़ जाती है. लेकिन चांदी की कीमतें जितनी तेजी से भागी हैं, वो किसी को समझ नहीं आ रहा है. इसी साल 1 जनवरी को चांदी 73,339 रुपए प्रति किलोग्राम के मूल्य पर मिल रही था और 17 मई को इसका भाव 86,271 रुपए है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में चांदी के भाव बढ़ सकते हैं और अगले साल तक यह 1 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है.

सोने से कैसे अलग है चांदी?
चलिए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर चांदी की कीमतों में आग क्यों लगी है. निवेश और ज्वैलरी के अलावा सोने का इसका दूसरा कोई इस्तेमाल नहीं है, लेकिन चांदी का काफी जगह इस्तेमाल होता है. चांदी के अपने कुछ यूनिक इंडस्ट्रियल गुण हैं, जो उसे सोने से अलग बनाते हैं. इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में चांदी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है. जब इस प्रोडक्शन में तेजी आती है, तो चांदी की डिमांड अपने आप बढ़ जाती है और डिमांड के साथ उसकी कीमतें भी. आमतौर पर सिल्वर के चढ़ते भाव को बेहतर होती अर्थव्यवस्था के संकेत के तौर पर भी देखा जाता है. क्योंकि जब इकोनॉमी मजबूत होगी तभी आर्थिक गतिविधियां चरम पर होंगी और चांदी का इस्तेमाल बढ़ेगा. 

यहां होता है इस्तेमाल
चांदी का इस्तेमाल आभूषण के अलावा दवाएं, मोबाइल, लैपटॉप, TV सहित अन्य घरेलू उपकरण में होता है. इसके अलावा इलेक्ट्रिक स्विच, वाहनों में लगने वाली चिप, खाद्य पदार्थों के लिए वर्क, सौर ऊर्जा पैनल, बर्तन और कलाकृति बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की ज्यादातर मांग औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी होती है. ऐसे में इसकी मांग में तेजी का सीधा मतलब है कि कारोबारी गतिविधियों में तेजी आई है. जाहिर है जब डिमांड बढ़ेगी तो कीमतों में भी इजाफा होगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन के निर्माण में चांदी का काफी इस्तेमाल होता है. यहां से चांदी की अच्छी मांग देखने को मिल रही है. चांदी की औद्योगिक मांग भी बढ़ रही है. यह बढ़ी हुई मांग ही कीमतों को ऊपर ले जा रही है. 

मोबाइल में कितनी चांदी?
मोबाइल इंडस्ट्री में भी चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. एक रिपोर्ट बताती है कि सामान्य आईफोन में 0.34 ग्राम चांदी होती है. जबकि एंड्रॉयड मोबाइल में इसकी मात्रा 0.50 से 0.90 ग्राम तक होती है. दरअसल, मोबाइल फोन में इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शंस के लिए एक सर्किट बोर्ड होता है, जिसे चांदी से तैयार किया जाता है. इसके अलावा, टॉर्च, ओवन, माइक्रोवव जैसे दूसरे इले​क्ट्रिक आइटम्स में भी चांदी का इस्तेमाल किया जाता है. बता दें कि भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में लगातार इजाफा हो रहा है. खासकर Apple के आने से मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. 


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