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Murugappa Group: क्यों एक-दूसरे से जंग लड़ रहे थे फैमिली मेंबर्स, कैसे सुलझा विवाद?

दक्षिण भारत के चर्चित कारोबारियों में शुमार मुरुगप्पा फैमिली ने एक बयान जारी कर बताया है कि आपसी विवाद को सुलझा लिया गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में शुमार मुरुगप्पा परिवार (Murugappa Family) में चल रहा आपसी विवाद निपट गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फैमिली ने एक बयान जारी करते बताया है कि संपत्ति को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है. समझौते के तहत परिवार के सदस्य कानूनी प्रक्रिया वापस लेंगे. इस पारिवारिक समझौते में कोई लिस्टेड कंपनी हिस्सेदार नहीं है. बता दें कि पिछले कई सालों से इस फैमिली में प्रॉपर्टी को लेकर कानूनी विवाद चल रहा था. 

6 साल बाद बनी सहमति
दक्षिण भारत के चर्चित कारोबारियों में शुमार मुरुगप्पा परिवार (Murugappa Family) में छह सालों के विवाद के बाद आखिरकार सहमति बनी है. मुरुगप्पा ग्रुप इंजीनियरिंग, प्लांटेशन, कृषि उत्पाद, चीनी, रसायन, बायो-उत्पाद, बीमा एवं वित्तीय सेवाओं आदि में शामिल है. इसके साथ ही ग्रुप का नौ लिस्टेड कंपनियों पर भी नियंत्रण है. कुछ समय पहले ही Murugappa Group की कंपनी के शेयर से चंद महीनों में ही लोगों का पैसा डबल कर दिया था. समूह के मालिक एमवी मुरुगप्पन (MV Murugappan) की मृत्यु के बाद कारोबार के बंटवारे को लेकर परिवार में कानूनी जंग शुरू हो गई थी. करीब 6 साल तक विवाद चलता रहा और अब जाकर सहमति बन पाई है.

ऐसे उलझा था मामला
Murugappa Group की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि दिवंगत एमवी मुरुगप्‍पन के पारिवारिक शाखा सदस्‍य आपसी विवादों और मतभेदों को सुलझाने पर सहमत हो गए हैं. वल्ली अरुणाचलम और वेल्लाची मुरुगप्पन के अलावा परिवार के बाकी सदस्य भी इसके लिए तैयार हैं. गौरतलब है कि एमवी मुरुगप्पन का 19 सितंबर, 2017 को निधन हो गया था. इसके कुछ समय बाद परिवार के सदस्यों में कारोबार के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया. इस पूरे विवाद की शुरुआत एमवी मुरुगप्पन की अमेरिका में रहने वाली सबसे बड़ी बेटी वल्ली अरुणाचलम की एक डिमांड से शुरू हुई थी. दरअसल, अरुणाचलम ने समूह की होल्डिंग कंपनी के बोर्ड में जगह की मांग की थी, लेकिन मुरुगप्पा परिवार के अन्य सदस्य इसके लिए तैयार नहीं थे. यहीं से बात बिगड़ती चली गई और मामला अदालत पहुंच गया. 

क्या थी अरुणाचलम की डिमांड?
वल्ली अरुणाचलम ने समूह के प्रमोटर्स लैंगिक भेदभाव का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि प्रमोटर्स महिलाओं के पारिवारिक व्यवसाय में आने के खिलाफ हैं. अरुणाचलम ने कहा था कि जब बोर्ड में पद लेने की बात आती है तो उनके और उनकी बहन वेल्लाची मुरुगप्पन के साथ भेदभाव किया जाता है. इसके विपरीत बहुत कम योग्यता और अनुभव वाले पुरुषों को बोर्ड का हिस्सा बनाया गया है. उन्होंने अपनी मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद से एकदम से समूह सुर्खियों में आ गया था. अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि क्या वल्ली अरुणाचलम और उनकी बहन को बोर्ड में शामिल किया जाएगा या नहीं.

कितना बड़ा है समूह?
Murugappa Group की बात करें, तो इसमें 11 सूचीबद्ध संस्थाएं हैं. जिनके नाम कार्बोरंडम यूनिवर्सल लिमिटेड, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड, कोरोमंडल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड, कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड, EID पैरी (इंडिया) लिमिटेड और ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ऑफ इंडिया लिमिटेड हैं. कुछ समय पहले तक समूह की मार्केट वैल्यू 74,200 करोड़ रुपए थी. समूह वर्तमान में दुनियाभर के अलग-अलग बाजारों में 29 बिजनेस संचालित करता है. मौजूदा समय में इसकी 40 देशों में उपस्थिति है और 73,000 से अधिक कर्मचारी इसमें काम करते हैं. मुरुगप्पन ग्रुप का व्यवसाय कृषि, इंजीनियरिंग और वित्तीय सेवाओं से लेकर चाय, रबर, पॉलिमर कपड़े, यात्रा समाधान और निर्माण जैसे सेक्टर्स में फैला हुआ है.

कहां से हुई थी शुरुआत?
मुरुगप्पा समूह की 1900 में म्यांमार में हुई थी और इसका मुख्यलय चेन्नई में था. उस दौर में समूह पैसा उधार देने का काम किया करता था. दीवान बहादुर ए एम मुरुगप्पा चेट्टियार 1900 में साहूकार और बैंकिंग व्यवसाय की स्थापना के साथ Murugappa Group की नींव रखी थी. हालांकि, 1930 के दशक में समूह अपने बिजनेस को भारत ले आया. इसके बाद समूह ने अलग-अलग सेक्टर्स में संभावनाएं तलाशना शुरू किया और देखते ही देखते देश के बड़े कारोबारी समूहों में शुमार हो गया. 1954 में कार्बोरंडम यूनिवर्सल लिमिटेड की स्थापना की गई. आज समूह विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के साथ आगे बढ़ रहा है. हालांकि, प्रॉपर्टी विवाद ने उसकी छवि को प्रभावित जरूर किया है.  
 


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