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कैसे लिखी गई कर्ज चुकाने के लिए मॉल बेचने को मजबूर Kishore Biyani की बर्बादी की कहानी?

फ्यूचर ग्रुप के मालिक किशोर बियानी ने बंसी मॉल मैनेजमेंट कंपनी के कर्जदाताओं को 571 करोड़ रुपए का बकाया चुकाया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

किसी जमाने में सफलता की ऊंचाइयां छूने वाले बिजनेसमैन किशोर बियानी (Kishore Biyani) आज जमीन पर हैं. उनका साम्राज्य दरक चुका है. फ्यूचर ग्रुप के कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैं. पिछले साल बिग बाजार चेन की पैरंट फ्यूचर रिटेल के लिए कई कंपनियों ने बोली लगाई थी. अब खबर आ रही है कि कर्ज में फंसे किशोर बियानी ने अपना एक मॉल बेचकर 571 करोड़ रुपए की देनदारी चुकाई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बियानी ने मुंबई स्थित Sobo Central मॉल को बेच दिया है.

K रहेजा कॉर्प ने खरीदा मॉल
फ्यूचर ग्रुप के मालिक किशोर बियानी ने बंसी मॉल मैनेजमेंट कंपनी के कर्जदाताओं को 571 करोड़ रुपए का बकाया चुकाया है. यह लेनदारों के लिए 83% की वसूली है, यानी अभी बियानी को और भी कर्ज चुकाना है. इस मॉल को K रहेजा कॉर्प ने खरीदा है. इसके लिए 28.56 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी का भुगतान किया गया है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि K रहेजा कॉर्प ने बंसी मॉल मैनेजमेंट कंपनी के लेंडर्स बैंकों को सीधे भुगतान किया जिसके बदले में मॉल कंपनी को ट्रांसफर कर दिया गया. K रहेजा की ग्रुप कंपनी K रहेजा कॉर्प रियल एस्टेट ने लगभग 150,000 वर्ग फुट के पट्टे योग्य क्षेत्र के साथ मॉल का अधिग्रहण कर लिया है. 

दक्षिण मुंबई में है मॉल
Sobo सेंट्रल देश का पहला मॉल है, जो 1990 के दशक के अंत में दक्षिण मुंबई के हाजी अली इलाके में खोला गया था. यह डील फ्यूचर ग्रुप के कर्जदाताओं के लिए राहत जैसी है, क्योंकि उन्हें बड़े पैमाने पर नुकसान का सामना करना पड़ा है. फ्यूचर रिटेल और फ्यूचर एंटरप्राइजेज को दिए कर्ज की पूरी रिकवरी अब तक नहीं हो पाई है. Bansi Mall Management Company, फ्यूचर ग्रुप का ही हिस्सा है. इसकी पैरेंट कंपनी Future Corporate Resources Limited है. बंसी मॉल मैनेजमेंट के कर्ज को चुकाने के लिए ही किशोर बियानी ने अपना मॉल बेचा है. 

छिन गया रिटेल किंग का ताज
किशोर बियानी ने बड़ी मेहनत से फ्यूचर रिटेल को खड़ा किया था. बियानी को रिटेल किंग कहा जाता था, उन्होंने ऐसे समय इस सेक्टर में कदम रखा जब इसके भविष्य को लेकर कोई भी बड़ा दावा मुश्किल था. फ्यूचर रिटेल 'बिग बाजार' चेन की पैरंट कंपनी है, वही बिग बाजार जिसने थोड़े ही समय में पूरे देश का दिल जीत लिया था. जिससे सामान खरीदने के लिए हर रोज सैकड़ों लोगों की लाइन लगती थी, लेकिन अब सबकुछ बदल चुका है. फ्यूचर रिटेल दिवालिया घोषित हो चुकी है. 'बिग बाजार' के अधिकांश स्टोर बंद हो गए हैं और किशोर बियानी के सिर से रिटेल किंग का ताज लगभग छिन गया है.

इस तरह की थी शुरुआत
कुछ वक्त पहले आई एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूचर ग्रुप (Future Group) पर करीब 29000 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें फ्यूचर रिटेल की हिस्सेदारी 21000 करोड़ है. समूह की कंपनी फ्यूचर एंटरप्राइजेज भी कर्ज के बोझ में दबी है. किशोर बियानी, जिन्होंने अपने दम पर इतना बड़ा साम्राज्य स्थापित किया, कैसे अपनी कंपनियों को कर्ज में ले आए, यह सबसे बड़ा सवाल है. बियानी ने 1980 के दशक में मुंबई में स्टोन वॉश डेनिम फैब्रिक बेचने से अपना कारोबारी सफर शुरू किया था. उसके बाद उन्होंने Erstwhile Manz Wear नाम से रिटेल कारोबार में कदम रखा. बाद में इसका नाम बदलकर पैंटालून्स किया गया.  

2001 में खोला पहला स्टोर
किशोर बियानी धीरे-धीरे तरक्की की सीढ़ी चढ़ते गए 1987 में फ्यूचर ग्रुप अस्तित्व में आया. 2001 में समूह ने भारत में पहला 'बिग बाजार स्टोर' खोला. बियानी का यह कांसेप्ट लोगों को इतना पसंद आया कि 6 साल के अंदर देश में इसके लगभग 100 स्टोर हो गए. इस सफलता के बाद बियानी के 'फ्यूचर ग्रुप' ने दूसरे सेक्टर्स में पैर फैलाना शुरू किया और 2007 में फ्यूचर जनरल इंश्योरेंस को लॉन्च किया गया. उसी साल फ्यूचर कैपिटल भी अस्तित्व में आई. बियानी के लिए यहां तक सबकुछ ठीक चल रहा था, फिर आने वाले सालों में उनका मुश्किल दौर शुरू हो गया.

कई बार बेचनी पड़ी संपत्ति
2008 की आर्थिक मंदी और कुछ गलत फैसलों ने फ्यूचर समूह को प्रभावित किया, लेकिन इससे भी बुरा समय आगे आने वाला था. फ्यूचर रिटेल के साथ फ्यूचर समूह पर कर्ज का बोझ बढ़ने लगा. जिसके चलते उन्होंने 2012 में 'पैंटालून्स' में अपनी अधिकांश हिस्सेदारी आदित्य बिड़ला ग्रुप को बेच दी. इसके साथ ही उन्हें फ्यूचर कैपिटल होल्डिंग्स में भी अपनी ज़्यादातर हिस्सेदारी अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी Warburg Pincus को बेचनी पड़ी. यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, 2019 में किशोर बियानी ने फ्यूचर कूपन्स में 49 फीसदी हिस्सेदारी Amazon को बेची. इससे बियानी को कर्ज के बोझ को कुछ कम करने में मदद जरूर मिली, लेकिन यही फैसला उनके लिए मुश्किलों का पहाड़ बनकर सामने आया.

संकट, उम्मीद और नाकामी
'फ्यूचर ग्रुप' पर वित्तीय संकट 2020 की शुरुआत में तब बढ़ा, जब फ्यूचर रिटेल डेट रीपेमेंट यानी कर्ज चुकाने में असफल रही और कर्जदाताओं ने शेयरों को गिरवीं रखने की बात कही. कोरोना महामारी ने बियानी की रही-सही उम्मीद को भी खत्म कर दिया. मार्च 2020 के आखिरी हफ्ते में देशभर में लगे लॉकडाउन ने 'बिग बाजार' की कमर तोड़ दी. इसके बाद स्थिति बयानी के हाथों से निकलती चली गई. तभी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की तरफ से फ्यूचर रिटेल को मिला ऑफर उसके लिए एक बेहतरीन समाधान की तरह नजर आया, मगर भविष्य को कुछ और ही मंजूर था. कई महीनों के मोलभाव के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने फ्यूचर ग्रुप की संपत्ति 24,713 करोड़ में खरीदने का फैसला किया. फ्यूचर रिटेल लिमिटेड पहले अपने 19 कारोबार को रिलायंस रिटेल के साथ मर्ज करने को तैयार हो गया. हालांकि, फ्यूचर ग्रुप की संपत्ति रिलायंस के पास आने के बाद भी इसे किशोर बियानी ही चलाते. उसी वक्त Amazon और किशोर बियानी के बीच हुई एक डील सामने आ गई और रिलायंस से उनकी डील खटाई में पड़ गई.

किराया भरने के भी पैसे नहीं
इसके बाद कई फ्यूचर स्टोर शटरडॉउन होते चले गए. स्थिति ये पहुंच गई कि किशोर बयानी के पास स्टोर्स का किराया देने के भी पैसे नहीं थे. नतीजतन उनके कई स्टोर्स रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के हाथों में चले गए. इस बीच, बैंक ऑफ इंडिया ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में याचिका दायर करते हुए फ्यूचर रिटेल के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की अपील की, जिसे NCLT ने स्वीकार कर लिया. हालांकि, अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन नहीं चाहती थी कि फ्यूचर रिटेल को दिवालिया घोषित किया जाए. उसने इसे बैंक और कंपनी की मिलीभगत करार दिया था. अमेजन ने दिवालिया प्रक्रिया रोकने के लिए NCLT में अपील की, उसने कहा कि अभी इस मामले में फ्यूचर रिटेल को दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई शुरू करने से उसके अधिकारों के साथ ‘समझौता’ होगा, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ.

एक डील बनी बियानी की मुसीबत
किशोर बियानी चाहते थे कि रिलायंस को कुछ हिस्सेदारी बेचकर जो पैसा आएगा, उससे वह कर्ज का बोझ कम करके फिर से खुद को खड़ा करने की कोशिश कर पाएंगे. लेकिन अमेजन से की गई डील ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. 2019 में अमेजन ने फ्यूचर समूह की कंपनी फ्यूचर कूपंस की 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी. यह डील 1431 करोड़ रुपए में फाइनल हुई थी और फ्यूचर कूपंस की फ्यूचर रिटेल में 9.8 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके अलावा 2019 की डील में इस बात पर सहमति बनी थी कि अगले 3-10 साल के भीतर अमेजन, फ्यूचर रिटेल की हिस्सेदारी खरीदने की हकदार होगी. ऐसे में जब बयानी ने रिलायंस से समझौता किया, तो अमेजन ने उसे कानूनी लड़ाई में उलझा दिया. इसे देखते हुए रिलायंस भी उसका साथ छोड़ गई, उल्टा कंपनी ने किराया नहीं मिलने पर फ्यूचर ग्रुप के कई स्टोर्स बंद करवा दिए. इस तरह, फर्श से अर्श पर पहुंचने वाले किशोर बयानी वापस फर्श पर आ गए.


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