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कभी नहीं लिया लोन, फिर भी काट ली किस्त, अब इस बैंक को देना पड़ेगा 1 लाख का जुर्माना
आईडीएफसी (IDFC) बैंक को अपने ग्राहक के अकाउंट से अवैध रूप से EMI काटना भारी पड़ गया है. अब बैंक को अपने उस ग्राहक को 1 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
आपने कभी कोई लोन नहीं लिया हो और बैंक आपके अकाउंट से पैसे काट ले, तो आप क्या करेंगे? दरअसल ऐसा मुंबई के रहने के एक व्यक्ति के साथ हुआ है. साल 2020 में आईडीएफसी (IDFC) बैंक ने एक व्यक्ति के अकाउंट से ऐसे कर्ज के लिए किस्त (EMI) काट ली, जो उसने कभी लिया ही नहीं था. इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (मुंबई उपनगर) ने अब बैंक के खिलाफ फैसला सुनाते हुए भारी जुर्माना भरने के निर्देश दिए हैं. तो चलिए जानते हैं क्या ये पूरा मामला?
बैंक ने क्यों काटे पैसे?
नवी मुंबई में रहने वाले एक व्यक्ति ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग को आईडीएफसी बैंक के खिलाफ शिकायत देते हुए ये दावा किया कि बैंक ने फरवरी, 2020 में अपनी पनवेल शाखा में उसके अकाउंट से उस लोन के लिए ईएमआई काट ली है, जो उसने लिया नहीं था. पूछताछ करने पर बैंक ने शिकायतकर्ता को बताया कि उसे एक ईमेल भेजकर बताया गया था कि यह एक ईसीएस भुगतान था. वह व्यक्ति जब बैंक शाखा में गए, तो उन्हें एक लोन खाता दिया गया. हालांकि, जब उन्होंने खाते में लॉग इन किया, तो उन्हें ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन का एक खत्म हो चुका वाउचर मिला. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आईडीएफसी बैंक ने अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किए बिना और हस्ताक्षर प्राप्त किए बिना धोखाधड़ी से लोन स्वीकृत किया.
बैंक ने पर्सनल जानकारी का किया दुरुपयोग
शिकातकर्ता ने दावा किया कि बैंक ने व्यक्तिगत विवरण (Personal Detail) का दुरुपयोग करके अवैध रूप से 1,892 रुपये की मासिक ईएमआई के साथ 20 महीने की अवधि के लिए 20,000 रुपये का लोन मंजूर किया था. उसके खाते से ये राशि तीन बार काटी गई, ऐसे में कुल 5,676 रुपये की ईएमआई राशि उसके खाते से काटी गई.
बैंक को ब्याज सहित चुकानी होगा मुआवजा
आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता के अमेजन के साथ पत्राचार से पता चला कि उसे वाउचर के लिए बैंक से कोई राशि नहीं मिली है. बैंक का यह बर्ताव एक अनुचित व्यापार व्यवहार के अलावा और कुछ नहीं है. ऐसे गैरकानूनी प्रक्रिया के चलते ईएमआई का भुगतान न करने पर शिकायतकर्ता का सिबिल स्कोर खराब हो गया. आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को काटी गई 5,676 रुपये की ईएमआई ब्याज सहित वापस करे और आदेश मिलने के 60 दिन के भीतर उन्हें सेवा में कमी और मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के लिए मुआवजे के रूप में 1 लाख रुपये का भुगतान करे.
शिकायतकर्ता का सिबिल रिकॉर्ड साफ करने के भी दिए निर्देश
इसके अलावा बैंक को शिकायतकर्ता के मुकदमे में लगे 10,000 रुपये का भुगतान करने और शिकायत से संबंधित सिबिल रिकॉर्ड को साफ करने का निर्देश भी दिया गया.
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