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Iran के राष्ट्रपति की मौत ने क्यों बढ़ाई दुनिया की टेंशन, कितने बिगड़ सकते हैं हालात? 

ईरान और इजरायल कुछ वक्त पहले युद्ध की दहलीज पर पहुंच गए थे. अब वो आशंका फिर से उत्पन्न हो गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी (Ebrahim Raisi) की तलाश आखिरकार खत्म हो गई है. हालांकि, तलाश जिस मोड़ पर आकर खत्म हुई है, वैसी उम्मीद किसी ने नहीं की थी. सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने 63 वर्षीय रईसी के निधन की पुष्टि कर दी है. इब्राहिम रईसी का हेलिकॉप्टर रविवार शाम दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, तभी से उनकी तलाश की जा रही थी. इस हादसे में ईरान विदेश मंत्री होसैन अमीराब्दुल्लाहियन सहित हेलिकॉप्टर में सवार सभी 9 लोगों की मौत हो गई है. इस घटना ने पूरी दुनिया को टेंशन में डाल दिया है, जो कुछ वक्त पहले ही ईरान-इजरायल के बीच युद्ध (Iran-Israel War) की आशंका से बाहर निकली है. 

ईरान के दुख से इजरायल खुश
इब्राहिम रईसी का हेलिकॉप्टर कैसे क्रैश हुआ, यह जांच में स्पष्ट हो जाएगा. लेकिन जिस तरह से इजरायल के धर्मगुरुओं ने रईसी के निधन पर खुशी जाहिर की है, उससे दोनों मुल्कों के बीच विवाद गहराने की आशंका है. इजरायल के धर्मगुरुओं ने दुर्घटना को ईश्वर का न्याय बताया है. रब्बी मीर अबुतबुल ने एक फेसबुक पोस्ट में रईसी को 'तेहरान का जल्लाद' बताते लिखा है - यह यहूदियों को फांसी देना चाहता था, इसलिए ईश्वर ने उन्हें और उनके पूरे इजरायल विरोधी दल को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में नष्ट कर दिया. ये हादसा ईश्वर की सजा का एक रूप है. इसी तरह एक अन्य रब्बी यित्जचक बत्जरी ने लिखा है - दुष्ट हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया.

ट्रेंड कर रहा है #Mossad 
इजरायल और ईरान हाल ही में युद्ध की दहलीज पर पहुंच गए थे. हालांकि, किसी तरह बार संभली और दुनिया इस खौफ से बाहर आई. दोनों मुल्क एक -दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे हैं. इब्राहिम रईसी की मौत के बाद ट्विटर पर #Mossad ट्रेंड कर रहा है. मोसाद इजरायल की एजेंसी है, जिसके बारे में मशहूर है कि वो अपने दुश्मनों को खोज-खोजकर मारती है. चूंकि दोनों देश एक-दूसरे के खून के प्यासे रहे हैं, इसलिए रईसी की मौत में इजरायल वाले एंगल से फिलहाल तो इनकार नहीं किया जा सकता. यदि ईरान की जांच में ऐसा कुछ भी सामने आता है, जो इजरायल या उसके सहयोगियों की तरफ इशारा करता है, तो फिर हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं. 

इतिहास में दर्ज हैं घटनाएं
ईरान के राष्ट्रपति जिस हेलिकॉप्टर में सवार थे, वो अमेरिका में बना बेल 212 है. दो ब्लेड वाले इस मीडियम साइज हेलिकॉप्टर में पायलट सहित 15 लोग बैठ सकते हैं. अमेरिका का झुकाव इजरायल की तरफ रहा है, इसलिए ईरान के लिए वो भी एक दुश्मन की तरह है. ईरान ने अपना सर्वोच्च लीडर खोया है, जाहिर है ऐसे में वह हर एंगल की बारीकी से जांच करेगा. वैसे भी इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, जब अपने दुश्मनों को ठिकाने लगाने के लिए बड़ी साजिशें रची गई हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दुश्मन येवगेनी प्रिगोझिन की विमान दुर्घटना में मौत को भी इसी नजरिये से देखे जाता है. 

इस तरह बिगड़ सकते हैं हालात 
अब सवाल यह है कि अगर ईरान और इजरायल फिर से आमने-सामने आते हैं, तो क्या ये केवल दो देशों का युद्ध रहेगा? इसका जवाब है 'नहीं'. ईरान और इजरायल में युद्ध का मतलब होगा दुनिया का दो हिस्सों में बंट जाना. इराक, सीरिया, लेबनान, तुर्किए, कतर, जॉर्डन आदि मुस्लिम ईरान का साथ दे सकते हैं. जबकि अमेरिका-ब्रिटेन और उनके सहयोगी देश इजरायल के साथ हैं. इस युद्ध में रूस की भी एंट्री हो सकती है. रूस पहले से ही ईरान का सैन्य सहयोगी रहा है. यूक्रेन युद्ध के चलते अमेरिका सहित अन्य यूरोपीय एवं पश्चिमी देशों से रूस की ठनी हुई है. इसलिए उसके ईरान के पाले में जाने की संभावना काफी ज्यादा है. यह भी संभव है कि रूस अपने मित्र देश चीन और उत्तर कोरिया को भी ईरान के पक्ष में लामबंद कर ले. वैसे, पाकिस्तान और सऊदी अरब ईरान को पसंद नहीं करते, लेकिन इनके बारे में कुछ साफ-साफ नहीं कहा जा सकता. भारत हमेशा की तरह इस मामले में तटस्थ भूमिका निभा सकता है.

भारत पर ऐसे पड़ सकता है असर
अगर हालत बिगड़ते हैं, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है. जैसे-जैसे संघर्ष का दायरा बढ़ेगा, दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होना शुरू हो जाएंगी. तेल की कीमतों में आग से महंगाई भड़क जाएगी. दुनिया को ऊर्जा और खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है. भारत की बात करें, तो उसके ईरान और इजरायल देशों के साथ व्यापारिक संबंध हैं, संघर्ष की स्थिति में उनका प्रभावित होना लाजमी है. ईरान के साथ हमारे व्यापार में भले ही पहले के मुकाबले कुछ कमी आई है, लेकिन व्यापारिक रिश्ते कायम हैं और उनके प्रभावित होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. जबकि एशिया में इजरायल के लिए भारत तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. भारत के कुल व्यापारिक निर्यात में इजरायल की हिस्सेदारी 1.8% है.


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