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Bharat के लिए क्यों जरूरी है Israel-Hamas War का जल्द थम जाना? 

इजरायल और हमास के बीच युद्ध जारी है. यदि जल्द ही इस युद्ध का अंत नहीं होता, तो कच्चे तेल के दामों में और उछाल देखने को मिल सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

इजरायल और हमास (Israel-Hamas War) के बीच चल रहे युद्ध से भारत (India) का कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इसके बावजूद युद्ध के लंबा खिंचने से उसके माथे पर परेशानियों की रेखाएं जरूर चौड़ी हो सकती हैं. दरअसल, मौजूदा समय में दुनिया का हर देश किसी न किसी तरह से एक-दूसरे से कनेक्टेड है. ऐसे में किसी एक के संकट में फंसने का असर बाकियों पर पड़ना लाजमी है. भारत की स्थिति थोड़ी अलग इसलिए है, क्योंकि उसके इजरायल के साथ संबंध कुछ दूसरे देशों के मुकाबले काफी अच्छे हैं. दोनों देशों के बीच केवल राजनैतिक ही नहीं, व्यापारिक रिश्ते भी मजबूत हैं. अब यदि युद्ध जल्द खत्म नहीं होता, तो कारोबार का प्रभावित होना तय है.

किस तरह पड़ेगा प्रभाव?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि युद्ध के लंबा खिंचने की स्थिति में भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. भारत का आयात-निर्यात प्रभावित होगा और इसका असर देश में महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है. कच्चे तेल का उत्पादन पहले से ही कम हो रहा है. ऐसे में इस युद्ध के चलते क्रूड ऑयल के दाम आने वाले दिनों में रॉकेट की रफ्तार से बढ़ सकते हैं. इससे भारत को ज्यादा नुकसान इसलिए होगा, क्योंकि वो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है. युद्ध से पहले तक पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती के आसार बन रहे थे, लेकिन अब उनके महंगा होने की आशंका उत्पन्न हो गई है. डीजल का सीधा कनेक्शन महंगाई से है. यदि फिर से दाम बढ़े, तो महंगाई का चक्का भी तेजी से घूमेगा, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है.

कितना है कारोबार?  
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एशिया में इजरायल के लिए भारत तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. उसकी कंपनियों ने यहां निवेश किया हुआ है, जिसके युद्ध लंबा खिंचने की स्थिति में प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता. भारत के कुल व्यापारिक निर्यात में इजरायल की हिस्सेदारी 1.8% है. इजरायल भारत से लगभग 5.5 से 6 बिलियन डॉलर के परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद (Refined Petroleum Products) खरीदता है. वित्तवर्ष 23 में, इजराइल को भारत का कुल निर्यात 8.4 बिलियन डॉलर था. जबकि आयात 2.3 बिलियन डॉलर रहा. इस तरह, दोनों देशों के बीच करीब 10 बिलियन डॉलर का कारोबार होता है. 

कौन, क्या मंगवाता है?
इजरायल भारत से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ ज्लैवरी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग से जुड़े प्रोडक्ट्स मंगाता है. जबकि भारत मोती, हीरे, डिफेंस मशीनरी, पेट्रोलियम ऑयल्स, फर्टिलाइजर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट आदि आयात करता है. एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2000 से मार्च 2023 के दौरान, भारत में इजरायल का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI 284.96 मिलियन अमेरिकी डॉलर था. कई भारतीय कंपनियों ने भी इजरायल में बड़ा निवेश किया हुआ है. भले ही अभी ज्यादा असर नजर नहीं आ रहा, लेकिन यदि युद्ध जल्द खत्म नहीं होता तो नुकसान के आंकड़े दिखाई देने शुरू हो जाएंगे. 

यहां भी होगा नुकसान
इजरायल के साथ-साथ भारत के फिलिस्तीन के साथ भी व्यापारिक रिश्ते हैं. हालांकि, भारत और फिलिस्तीन के बीच व्यापार इजरायल के जरिए होता है. 2020 में भारत-फिलिस्तीन ट्रेड वॉल्यूम करीब 67.77 मिलियन डॉलर था. भारत से वहां मार्बल और ग्रेनाइट, सीमेंट, बासमती चावल, मेडिकल एवं सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स आदि जाता है. जबकि भारत ताजा और सूखे खजूर, बेस मेटल्स से बनी वस्तुएं इम्पोर्ट करता है. युद्ध बढ़ने की स्थिति में भारत के फिलिस्तीन के साथ आयात-निर्यात पर भी असर पड़ेगा. वहीं, भारतीय एक्सपोर्ट्स को आशंका है कि युद्ध जारी रहने पर उन्हें इजरायल भेजे जाने वाले माल के लिए ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम और बढ़ी हुई शिपिंग कॉस्ट वहन करनी पड़ेगी. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि ये युद्ध घरेलू निर्यातकों के मुनाफे को कम कर सकता है और अगर युद्ध जल्द नहीं थमता को ट्रेड वॉल्यूम का प्रभावित होना भी लाजमी है. इसलिए भारत चाहेगा कि युद्ध की ये आग जल्द शांत हो जाए.
 


टैग्स Hamas. गाजा पट्टी
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