होम / एक्सप्लेनर / BW Marketing Whitebook: तकनीक से इस तरह भारत में बनाये जा रहे हैं लीडर्स!

BW Marketing Whitebook: तकनीक से इस तरह भारत में बनाये जा रहे हैं लीडर्स!

समय-समय पर BW बिजनेसवर्ल्ड अक्सर ऐसे कई आयोजन करता रहता है जिनके द्वारा बहुत कुछ सीखने को मिलता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

लीडर हर व्यक्ति नहीं होता बल्कि वह व्यक्ति होता है जो सही रूप से अपने क्षेत्र के बारे में अवगत होता है और अपनी संस्था को अपने क्षेत्र में आगे लेकर जाता है. आज मुंबई में BW बिजनेसवर्ल्ड द्वारा BW मार्केटिंग वाइटबुक (BW Marketing Whitebook) के 18वें एडिशन का आयोजन किया गया था और इस दौरान बहुत से महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर प्रमुख वक्ताओं और एक्सपर्ट्स ने अपने विचार प्रस्तुत किये. इस कार्यक्रम के दौरान भविष्य में तकनीक की मदद से लीडर्स बानाने के विषय पर भी बात की गई और इस दौरान ICEAI एजुकेशनल संस्थाओं के डायरेक्टर सुधाकर राव ने तकनीक की बदौलत लीडर्स बनाये जाने के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किये. 

AI बना मार्केटिंग का अभिन्न हिस्सा
अपने संबोधन की शुरुआत सुधाकर ने BW बिजनेसवर्ल्ड को आभार प्रकट करते हुए की. उन्होंने कहा कि समय-समय पर BW बिजनेसवर्ल्ड अक्सर ऐसे कई आयोजन करता रहता है जिनके द्वारा बहुत कुछ सीखने को मिलता है और यह बेहद आवश्यक है कि इन आयोजनों का हिस्सा बनकर सीखा जाए. इसके साथ ही उन्होंने BW बिजनेसवर्ल्ड को उन्हें आमंत्रित करने के लिए आभार भी प्रकट किया. सुधाकर कहते हैं कि अब AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ग्लोबल मार्केटिंग की ग्लोबल दुनिया का प्रमुख हिस्सा बनता जा रहा है. इससे पहले कि तकनीक के इस्तेमाल से लीडर्स बनाये जाने के बारे में बात की जाए सुधाकर ने वर्तमान व्यवस्था में मौजूद कुछ कमियों से अवगत करवाया. 

AI की तरफ बढ़ रही दुनिया
सुधाकर कहते हैं कि मेरे विचार में हमारे द्वारा पढ़ाये जाने वाले कोर्स बहुत ही सैद्धांतिक और मौलिक हैं जबकि इस वक्त हमें नौकरी में इस्तेमाल होने वाली स्किल्स की जरूरत है. वह कहते हैं कि नौकरी से संबंधित स्किल्स को व्यक्तिगत तौर पर सीखा जाना चाहिए जबकि कोर्स ज्यादा सामाजिक होते हैं और इन्हें कक्षाओं में सिखाया जाता है. सुधाकर बताते हैं कि अब हम धीरे-धीरे डिजिटलाइजेशन से AI की दुनिया की तरफ बढ़ रहे हैं, अब हमारे पास चीजों को मापने के बेहतर साधन मौजूद हैं, हम चीजों को ज्यादा कस्टमाइज भी कर सकते हैं. 

अब आगे क्या?
सुधाकर कहते हैं कि तकनीक को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए इस वक्त की जरूरत है कि हम विविध डोमेन से संबंधित विशेष स्किल्स को सीखें. सुधाकर बताते हैं कि उनकी संस्थाओं में इसके लिए विशेष केसों को भी पढ़ाया जाता है और हार्वर्ड के बाद अगर किसी संस्था में इतने ज्यादा केस विकसित किये गए हैं तो वह ICEAI ही है.
 

यह भी पढ़ें: Adani, Parle को पछाड़ते हुए ITC ने अपने नाम किया ये मुकाम!


टैग्स
सम्बंधित खबरें

समझिए: भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण क्यों नहीं माना जाता?

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट कानूनी रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण.

26-June-2026

क्या है 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता, जिससे पाकिस्तान में मचेगा हाहाकार, कितना होगा असर?

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ 1960 से चले आ रहे जल समझौते का बोझ आगे नहीं ढोएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को प्रभावी रूप से बंद नहीं कर देता है.

24-April-2025

अमेरिका के टैरिफ लगाने से भारत के किस सेक्टर्स पर क्या होगा असर? जानिए डिटेल्स

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को बड़ा झटका दिया है. ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. जिससे भारत के निर्यात पर गहरा असर देखने को मिल सकता है.

03-April-2025

भारत की तरक्की को कई गुना बढ़ा रही महिला एंटरप्रेन्योर, NeoGrowth की रिपोर्ट में आया सामने

3,000 से अधिक महिला उद्यमियों के सर्वेक्षण पर आधारित इस रिपोर्ट में महिलाओं की व्यापारिक सफलता और उनके सामने आने वाली चुनौतियों दोनों को दिखाया गया है.

06-March-2025

अडानी परिवार की शादी का उत्सव: परंपरा, आधुनिकता और समाज सेवा का संगम

यह शादी सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अडानी परिवार की समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें हर पहलू में कला, परंपरा और सशक्तिकरण जुड़ा हुआ है.

24-February-2025


बड़ी खबरें

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

9 hours ago

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

6 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

7 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

7 hours ago

भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.924 अरब डॉलर की गिरावट, 10 हफ्तों की बढ़त पर लगा ब्रेक

विदेशी मुद्रा आस्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है.

14 hours ago