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हीरो नहीं है 'राबिनहुड', गरीबों को पढ़ाता है बेईमानी का पाठ!

किसी अमीर व्यक्ति की मेहनत से बनी संपत्ति को लूटकर गरीबों में बांटने वाला न केवल खुद एक लुटेरा है, बल्कि वह गरीबों को मेहनत का नहीं, आलस्य और बेईमानी का पाठ पढ़ाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • पीके. खुराना, हैपीनेस गुरू 

पश्चिमी देशों की कथा-कहानियों का एक प्रसिद्ध पात्र राबिनहुड है, जो समृद्ध लोगों की संपदा लूटकर गरीबों में बांट देता था. भारतवर्ष में भी “मिस्टर इंडिया” सरीखी ऐसी कई फिल्मों का बोलबाला रहा है. भारतीय फिल्मों में भी हीरो अगर डाकू होता था तो वह गरीबों का हमदर्द और अमीरों के लिए यमराज होता था. आम जनता में ऐसी फिल्में खूब लोकप्रिय होती थीं, क्योंकि अभावों से ग्रस्त आमजन को ऐसे डाकू में भी अपना मसीहा नजर आता था.
अगर हम गौर करें तो पायेंगे कि रिश्वत देना हमने अपनी आराधना में भी जोड़ लिया है. हम हमेशा भगवान से कुछ न कुछ मांगते रहते हैं और बदले में उन्हें कुछ चढ़ावा चढ़ाते हैं. “हे भगवान, मेरे बेटे की नौकरी लग जाए तो चांदी का मुकुट चढ़ाउंगा” जैसी मन्नतें भारतवर्ष में आम हैं.

सफलता के लिए बैसाखियां
आशय यह है कि हम कहीं न कहीं खुद पर और अपनी काबलियत पर अविश्वास करते हैं और अपनी उन्नति के लिए भगवान या किसी राबिनहुड का सहारा चाहते हैं. धार्मिक होना, आध्यात्मिक होना, भगवान पर विश्वास करना एक अलग बात है पर अपनी सफलता के लिए बैसाखियां ढूंढ़ना बिल्कुल अलग. किसी अमीर व्यक्ति की मेहनत से बनी संपत्ति को लूटकर गरीबों में बांटने वाला न केवल खुद एक लुटेरा है, बल्कि वह गरीबों को मेहनत का नहीं, आलस्य और बेईमानी का पाठ पढ़ाता है. गरीबों का असली हमदर्द वह है जो उन्हें गरीबी के दुष्चक्र से निकाल कर अमीर बनने का रास्ता दिखाये.

इन नियमों को अपनाएं
गरीबी से पार पाने के 6 निश्चित नियम हैं और इन नियमों का पालन करके कोई भी व्यक्ति गरीबी से छुटकारा पा सकता है. इन नियमों का पालन किसी साधना की तरह कठिन भी है और लंबे समय तक चलने वाला भी, पर गरीबी से पार पाने का यह एक जांचा-परखा उपाय है. इनमें से पहला नियम है, छोटी-छोटी बचत करके रुपये जुटाकर उन्हें एक छोटे निवेश में बदल देना. दूसरा नियम है, उस बचत को किसी बैंक के बचत खाते में निट्ठली रखने के बजाए उस धनराशि का व्यापार अथवा संपत्ति में निवेश करके अपने लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बनाना. 

एक से अधिक हल खोजें
मेरे अध्ययन में शामिल एक व्यक्ति ने अपना रिक्शा खरीदा और नौकरी के बाद सवारियां ढोता रहा, किसी ने मूंगफली की रेहड़ी लगाई, किसी ने अपनी बचत से छोटी सी लाइब्रेरी बनाई और लोगों को पुस्तकें और पत्रिकाएं किराए पर देनी शुरू कर दीं, किसी ने मधुमक्खियां या मुर्गियां पालीं और किसी ने रेहड़ी-फड़ी के दुकानदारों को माल सप्लाई करने का काम शुरू किया. तीसरा नियम है कि बढ़ी हुई आय पर ही संतुष्ट नहीं होकर शेष समय में अतिरिक्त पढ़ाई करके या कोई नया हुनर सीखकर नौकरी में प्रमोशन पाना या अपने नये ज्ञान के बल पर अपने व्यवसाय में विस्तार करना. चौथा नियम है कि किसी भी समस्या अथवा चुनौती से घबराने के बजाए उसके समाधान के एक से अधिक हल खोजने का प्रयास करके सबसे बेहतर विकल्प को आजमाना. पांचवां नियम या गुण यह कि मित्रों और सहकर्मियों को अपने साथ जोड़े रखने में कुशलता हासिल करना. अपने साथियों के लाभ का ध्यान रखते हुए उनकी निष्ठा जीतना और उनसे बेहतर काम लेना. इस गुण से नौकरी में प्रमोशन मिलती है और व्यवसाय में तरक्की. हम जानते ही हैं कि जैसे-जैसे आप सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हैं, वैसे-वैसे तकनीकी योग्यताओं का महत्व कम और कल्पनाशक्ति के प्रयोग से समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने और लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता का महत्व बढ़ता चला जाता है. 

अब चुनाव आपको करना है
सफल होने का छठा नियम है- अपने लिए किसी ऐसी आय का जुगाड़ करना जहां हमारी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक न हो. मकान या दुकान किराये पर चढ़ाना, कार खरीद कर उसे ओला-उबर जैसी सेवा से जोड़कर ड्राइवर रख लेना आदि इसके उदाहरण हैं. अब यह चुनाव हमें करना है कि हम दूसरों की दया पर निर्भर रहना चाहते हैं या खुद समर्थ होकर अपने साथियों की प्रगति में सहायक होना चाहते हैं. हम राबिनहुड बनकर गरीबों में खैरात बांटना चाहते हैं या गरीबों को समृद्ध बनाकर अपना और उनका आत्मसम्मान बढ़ाना चाहते हैं. 

 


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