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एलन मस्क भारतीय start-up में लगाएंगे पैसा, UN में भारत की स्‍थाई सदस्‍यता पर भी साथ

हालांकि इस मामले को लेकर जानकारों की राय बंटी हुई है. कुछ का मानना है कि उनकी राय का कुछ असर हो सकता है जबकि कुछ मानते हैं कि कोई असर नहीं होगा. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ में भारत की स्‍थाई सदस्‍यता का मामला लंबे समय से चल रहा है. अब तक दुनिया के कई देश इस मामले में भारत को स्‍थाई सदस्‍यता देने का समर्थन कर चुके हैं. लेकिन अब इस मामले में दुनिया के प्रभावशाली कारोबारी और अमीर शख्‍स एलेन मस्‍क ने इसे लेकर भारत का समर्थन किया है. एलेन मस्‍क ने कहा है कि यूएन में भारत को स्‍थाई सदस्‍यता न मिलना बेतुका है. उन्‍होंने कहा कि जिनके पास एक्‍सेस पॉवर है वो उसे छोड़ना नहीं चाहते हैं. 

एलन मस्‍क ने कही क्‍या बात? 
संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ में स्‍थाई सदस्‍यता को लेकर एलन मस्‍क ने ट्वीट करते हुए कहा कि, , संयुक्त राष्ट्र निकायों में संशोधन की आवश्यकता है. समस्या यह है कि जिनके पास अधिक शक्ति है वे इसे छोड़ना नहीं चाहते. धरती पर सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के बावजूद भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट न मिलना बेतुका है. अफ़्रीका को सामूहिक रूप से आईएमओ की एक स्थायी सीट भी मिलनी चाहिए.  

वहीं एलन मस्‍क के इस ट्वीट पर अपनी बात कहते हुए यूएन सिक्‍योरिटी काउंसिल के सेक्रेट्री जनरल हम यह कैसे स्वीकार कर सकते हैं कि अफ़्रीका के पास अभी भी सुरक्षा परिषद में एक भी स्थायी सदस्य का अभाव है? संस्थानों को आज की दुनिया को प्रतिबिंबित करना चाहिए, न कि 80 साल पहले की दुनिया को. सितंबर का भविष्य शिखर सम्मेलन वैश्विक शासन सुधारों पर विचार करने और विश्वास के पुनर्निर्माण का अवसर होगा.

क्‍या वास्‍तव में होगा एलन मस्‍क की बात का असर 
सबसे अहम बात ये है कि भारत में कारोबार करने की इच्‍छा रखने वाले एलन मस्‍क की बात का कोई असर भी होगा या उन्‍होंने ये बयान बिजनेस महत्‍वाकांक्षाओं के चलते दिया है. क्‍योंकि भारत के पक्ष में इससे पहले कई देश इस तरह का बयान दे चुके हैं. मौजूदा समय में यूएनएससी (संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद) में पांच देश ऐसे हैं जिनके पास स्‍थाई सदस्‍यता है और वीटो पावर का अधिकार है. इनमें अमेरिका, फ्रांस, रसिया, चाइना और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं. लेकिन पूरी दुनिया में लंबे समय से इसमें बदलाव की वकालत हो रही है. 

ये भी पढ़ें: आलिया भट्ट और साक्षी मलिक ने पाई ये उपलब्धि, जानिए क्‍यों मिला ये सम्‍मान?

लगातार बढ़ रही है भारत की ताकत 
विदेश मामलों के जानकार संजीव श्रीवास्‍तव कहते हैं कि आज के मौजूदा हालात में भारत का पूरी दुनिया में एक अलग स्‍थान हो चुका है पूरी दुनिया में भारत का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है. अगर इंडो पैसिफिक रीजन की बात करें तो वहां और भी ज्‍यादा भारत का प्रभाव है. इस वक्‍त दुनिया के जिन क्षेत्रों में तनाव चल रहा है वहां भी भारत का बड़ा प्रभाव है. हर जगह भारत को एक महत्‍व के साथ देखा जाता है. मीडिल ईस्‍ट के देश भी भारत के साथ मित्रता बढ़ाना चाहते हैं. पाकिस्‍तान और चाइना के द्वारा किए जाने वाले प्रोपेगेंडा के बावजूद भारत का प्रभाव बढ़ रहा है. ऐसी भूमिकाओं के बीच अगर भारत की भूमिका यूएनएससी में न हो तो वो भी अपनी भूमिका को सही से नहीं निभा सकता है. देखिए एलन मस्‍क एक विजनरी उद्योगपति हैं. उनके विचारों को गंभीरता से लिया जाता है, अब वो भले ही कारोबार की बात हो या दुनिया से जुड़े मामलों की बात हो.ये बात जरूर है कि उनके भारत में अपने हित हैं उन्‍हें वो आगे बढ़ाना चाहते हैं. मैं मानता हूं कि जो उन्‍होंने कहा है वो सच्‍चाई है. लेकिन वो दुनिया के हर मामले में अपनी राय रखते हैं जो कि बेहद अहम है. 

ये दुर्भाग्‍यपूण है लेकिन सच है
The ImageIndia Institute के अध्‍यक्ष और विदेश मामलों के जानकार रोबिन्‍द्र सचदेव कहते हैं कि देखिए मेरा मानना है कि ये महत्‍वपूर्ण तो बहुत है लेकिन मेरा मानना है कि इसका कोई ज्‍यादा असर नहीं होगा. उनका कहना है मौजूदा समय में उनका जो एक्जिस्टिंग सिस्‍टम है इतना जटिल है अपने सिस्‍टम को लेकर कोई भी मेंबर अपने वीटो को नहीं छोड़ेगा और न ही वीटो के लिए किसी और देश को साथ में लाएगा. उनका कहना है कि यूएन की दूसरी एजेंसियों की बात अलग है लेकिन यूएन सिक्‍योरिटी काउंसिल में बदलाव करना अपने आप में बड़ी बात है. मुझे ये असंभव सा दिखाई देता है. पांच में से कोई भी अपनी पावर को छोड़ना नहीं चाहेगा. ये दुर्भाग्‍यपूण है लेकिन सच है. इंडिया एक आकर्षक बाजार है वो इंडिया के साथ गुडविल भी बनाना चाहता है, उनका मानना है कि वो जिस देश में कारोबार करने जा रहे हैं वहां की स्थितियां उनके अनुकूल हों.  


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