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दिव्यांगों के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है: डॉ.अनुराग बत्रा
डॉ.अनुराग बत्रा ने कहा कि हमारे इस कार्यक्रम का मकसद ये है कि हम किस तरह से इस महत्वपूर्ण विषय को मुख्य धारा में लेकर आएं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
बिजनेस वर्ल्ड के BW People Disability positive Summit & Awards 2023 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए BW Businessworld के चेयरमैन & एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया के संस्थापक डॉ.अनुराग बत्रा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कई अहम बातें कहीं. उन्होंने कहा 2016 में सामने आए राइट टू डिसेबिलिटी बिल ने दिव्यांगों को कई तरह के अधिकार देने का काम किया है लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में बहुत कुछ किया जाना बाकी है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योजनाओं का आखिरी आदमी तक पहुंचना भी बेहद जरूरी है.
कौन-कौन रहे कार्यक्रम में मौजूद
बिजनेस वर्ल्ड के इस कार्यक्रम में कई नामी अतिथि मौजदू रहे. इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और पद्म पुरस्कार जीतने वाली डॉ. नीरू कुमार सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे. डॉ.अनुराग बत्रा ने सभी मेहमानों का इस अभियान को सहयोग देने के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने डॉ.नीरू कुमार और राजीव कुमार का विशेष तौर पर ऐसे विषय पर सहयोग के लिए आभार जताया. उन्होंने कहा कि नीरू कुमार जोकि पद्म पुरस्कार जीत चुकी हैं और आप इस क्षेत्र में बीते कई वर्षों से काम कर रही हैं.
राइट टू डिसेबिलिटी ने निभाई अहम भूमिका
डॉ.अनुराग बत्रा ने कहा कि 2016 में दो महत्वपूर्ण कानून पास हुए थे, जिसमे राइट ऑफ डिसेबिलिटी कानून था जो पास हुआ था. इस कानून में सभी दिव्यांग लोगों को शिक्षा से लेकर रोजगार देने को लेकर कई तरह के प्रावधान किए गए थे. इसके अतिरिक्त इस बिल में दिव्यांग लोगों के लिए कई तरह की अलग-अलग क्षेत्रों में सुविधाओं का विकास करने के लिए प्रावधान किया गया था. डॉ.अनुराग बत्रा ने कहा कि 7 साल पहले जब कानून पास हुआ उसके बाद अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. आज हमारे साथ कई नामी लोग मौजूद हैं जिनके जरिए हमें पता चल पाएगा कि आखिर सरकार इस दिशा में क्या काम कर रही है. जैसा कि हम जानते हैं सरकार ने इस दिशा में पिछले सात सालों में बहुत कुछ किया है लेकिन अभी भी किया जाना बाकी है.
हमें टोकनिज्म से बाहर निकलना होगा
डॉ.अनुराग बत्रा ने कहा कि हमें टोकनिज्म से बाहर निकलना होगा. हमारी पॉलिसी ग्राउंड तक पहुंच रही है या नहीं ये हमें गंभीरता से देखना होगा. सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को आखिरी इंसान तक पहुंचाने की है. सबसे बड़ी चुनौती दिव्यांग लोगों को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने की है. इन्हीं गाइडलाइन के कारण आज हम देख रहे हैं कि अलग-अलग सेक्टरों में जिसमें रेलवे पर्यटन में साइन भाषा का इस्तेमाल बढ़ा है. इसके अतिरिक्त हमारी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में भी इसे शामिल किया गया है. अब जैसा कि हम देख रहे हैं कि देश में जी 20 की मीटिंग हो रही है तो ऐसे में इसे लेकर भी हाई वर्किंग ग्रुप काम कर रहा है, जो दिव्यांगों को मुख्य धारा में लाने को लेकर काम कर रहा है. हम इस समिट को कोरोना महामारी के बाद कर रहे हैं.
महामारी ने हमें बहुत कुछ सिखाया
डॉ.अनुराग बत्रा ने कहा कि इस महामारी ने हमें सिखाया है कि किस तरह से दिव्यांगों के लिए और क्या काम किए जाने की जरूरत है, और जो भी काम किए जाने चाहिए वो जमीन पर दिख रहे हैं या नहीं. आज bw People के इस पूरे कार्यक्रम का मकसद यही है कि कैसे इस महत्वपूर्ण विषय को मुख्य धारा में चर्चा का विषय बनाया जाए. हमारी कोशिश यही रहेगी कि आने वाले समय में हम इसे दो से तीन दिन का समिट करें जिससे आपके सामने ज्यादा CHO और दूसरे नामी लोगों को सामने ला सकें, जिससे इस मोमेंटम को और तेजी से आगे बढ़ाया जा सके. सभी क्षेत्रों में दिव्यांगों के लिए अवसर पैदा किए जा सकें.
महामारी के दौरान हमें कुछ बातें सीखने को मिली हैं जिसमें पहला ये है कि हमें दिव्यांगों के मामलो को प्राथमिकता पर लेने की आवश्यकता है, हमें क्लाइमेट चेंज और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर काम करने की जरूरत है जिसके कारण ये सब हो रहा है. आज का ये कार्यक्रम उसी दिशा में एक पॉजिटिव कार्यक्रम है. आज के हमारे जो अवॉर्डी हैं उनका चयन ज्यूरी चेयर के जरिए किया गया है. जो कि एक बहुत हाई पॉवर ज्यूरी है और ऐसे लोगों के द्वारा की गई है जो इस क्षेत्र की चुनौतियों को भली भांति जानते हैं. मुझे आशा है कि हम आज के इस कार्यक्रम में इस विषय से जुड़े सभी क्षेत्रों को कवर कर पाएंगे. मैं एक बार फिर नीरू कुमार का आभार व्यक्त करता है.
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