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ये दो भाई बनाते हैं आपकी दिवाली धमाकेदार! पटाखों से जुड़ी ये कहानी नहीं जानते होंगे आप
मुर्गा छाप पटाखों की इस इंडस्ट्री में अलग ही पहचान है. आज की तारीख में कई पटाखा कंपनियां हैं, लेकिन देश में पटाखा कारोबार खड़ा करने में दो भाईयों की कहानी अहम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: दिवाली में पटाखों (Diwali Firecrackers) के बिना मजा नहीं, बचपन से हम सुतली बम, फुलझड़ी, अनार, रॉकेट और न जाने कितने तरह के बम फोड़ते आए हैं. पटाखों की सतरंगी रौशनी और धमाके की आवाज के बिना दिवाली अधूरी सी लगती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली के इन पटाखों के पीछे कौन है?
मुर्गा छाप पटाखों की धमक
आप अगर गौर करेंगे तो आपको पता चलेगा कि इन पटाखों पर ज्यादातर मुर्गा छाप ब्रांड लिखा होता है. क्या आपको पता है कि इसकी शुरुआत कब हुई थी, और क्यों इसके सामने दूसरे पटाखे फीके लगते हैं. भारत में पटाखों का व्यापार करोड़ों रुपये का है. सिर्फ दिवाली ही नहीं, कई दूसरे मौकों पर भी पटाखों की डिमांड रहती है, जैसे - शादी, चुनावी सेलिब्रेशन वगैरह. दुनिया में सबसे ज्यादा पटाखे चीन में बनाए जाते हैं, भारत इसमें दूसरे नंबर है. चेन्नई से 500 किलोमीटर दूर एक जगह है शिवाकाशी, यहां पर भारत के 80 परसेंट पटाखों का निर्माण होता है. यहां पर करीब 1000 पटाखा इंडस्ट्रीज हैं.
माचिस से शुरू हुई दो भाईयों की कहानी
मुर्गा छाप (Cock Brand) पटाखों की इस इंडस्ट्री में अलग ही पहचान है. आज की तारीख में कई पटाखा कंपनियां हैं, लेकिन देश में पटाखा कारोबार खड़ा करने में दो भाईयों की कहानी अहम है. ये दोनों चचेरे भाई हैं- शनमुगा नाडर और अय्या नाडर. ये दोनों तमिलनाडु के शिवाकाशी गांव में रहते थे. इन दोनों भाइयों को शिवाकाशी गांव को पटाखों के हब के रूप में विकसित करने का श्रेय जाता है. हालांकि इन दोनों भाइयों ने शुरुआत पटाखे बनाने से नहीं की थी, इन्होंने पहले माचिस बनाने के कारोबार से शुरुआत की. 1922 में दोनों भाई कलकत्ता गए, वहां इन्होंने 8 महीने तक माचिस कारोबार के बारे में समझा और काम सीखा. इसके बाद दोनों भाई शिवाकाशी लौटकर आए, उन्होंने हाथ से बनी माचिस का बिजनेस (National Matches) शुरू किया. इसके बाद इन्होंने जर्मनी से मशीनें मंगवाई और बिजनेस को आगे बढ़ाया.
पटाखा कारोबार की शुरुआत
1923 में इन्होंने पटाखे का बिजनेस शुरू किया, और ये बिजनेस ऐसा चला कि आजतक इस कारोबार में नंबर वन है. आज दोनों भाईयों की पटाखा कंपनियां स्टैंडर्ड फायर वर्क्स और श्री कालिश्वरी फायर वर्क्स (Sri Kaliswari Fireworks) के नाम से भारत की सबसे बड़ी पटाखा निर्माता कंपनी जानी जाती हैं. श्री कालिश्वरी फायर वर्क्स ही "Cock" ब्रांड या मुर्गा छाप पटाखे बनाती है. पटाखों के अलावा कंपनी और कई क्षेत्रों में भी अपना कारोबार फैला चुकी है. कंपनी काका और कालीकॉक के नाम से माचिस बनाती है, कॉलेज चलाती हैज जिसमें मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट्स शामिल हैं, कंपनी होटल व्यवसाय में भी है, सड़क निर्माण का भी काम करती है.
आज प्रदूषण की वजह से कई राज्यों में पटाखों पर बैन है, और पटाखा इंडस्ट्री को इससे नुकसान भी हुआ है. लेकिन अय्या नाडर और शनमुगा भाइयों को इस बात का श्रेय जरूर जाता है कि उन्होंने गरीबी से जूझ रही शिवाकाशी की जनता को एक समृद्ध गांव बना दिया, जिसे "Mini Japan of India" भी कहा जाता है.
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