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रतन टाटा से मिलने की जिद, 12 घंटे इंतजार और बदल गई किस्मत
अदिति भोसले वालुंज मोबाइल एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन स्टार्टअप रेपोस एनर्जी की फाउंडर हैं और वह चाहती थीं कि उन्हें रतन टाटा जैसा मेंटर मिले.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
जाने-माने उद्योगपति रतन टाटा (Ratan Tata) के बारे में कहा जाता है कि वह भले ही अपने मन की करें, लेकिन सुनते सबकी हैं. इसी सुनने-सुनाने में कभी-कभी उन्हें कुछ ऐसा मिल जाता है कि उस 'कुछ' से जुड़े लोगों की किस्मत बदल जाती है. पुणे में रहने वालीं अदिति भोसले वालुंज के साथ भी यही हुआ. अदिति मोबाइल एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन स्टार्टअप रेपोस एनर्जी की फाउंडर हैं और वह चाहती थीं कि उन्हें रतन टाटा जैसा मेंटर मिले, जो उन्हें आगे बढ़ने का हुनर सिखा सके. अदिति भोसले वालुंज का ये सपना आज पूरा हो गया है. उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर अपने सपने के हकीकत बनने की कहानी बयां की है.
ऐसे आया ख्याल
रेपोस एनर्जी ने हाल ही में ऑर्गेनिक कचरे से चलने वाला एक मोबाइल इलेक्ट्रिक चार्जिंग व्हीकल लॉन्च किया है. कंपनी की फाउंडर अदिति भोसले वालुंज का कहना है कि रतन टाटा के एक फोन ने उनकी किस्मत बदल दी. अपने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट में उन्होंने बताया है कि कुछ साल पहले उन्होंने चेतन वालुंज के साथ मिलकर रेपोस एनर्जी की शुरुआत की थी. लेकिन आगे बढ़ने के लिए उन्हें किसी के मार्गदर्शन की ज़रूरत थी. तब उनके दिमाग में रतन टाटा का नाम आया. हालांकि, सभी ने अदिति को सलाह दी कि कोई दूसरा नाम सोचें, क्योंकि रतन टाटा के पास इतना समय नहीं होगा.
पहले नहीं हुई मुलाकात
अदिति भोसले वालुंज का कहना है कि लोगों ने हतोत्साहित किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने प्रोजेक्ट से जुड़ा प्रिजेंटेशन तैयार किया और पत्र के साथ उसे रतन टाटा को भेज दिया. लेकिन काफी दिनों तक कोई जवाब नहीं आया. इसके बाद अदिति और चेतन ने मुंबई जाकर रतन टाटा से मिलने का फैसला किया. वह उनके घर तक पहुंच गए, मगर मुलाकात नहीं हुई. करीब 12 घंटे तक इंतजार करने के बाद दोनों वापस होटल आ गए.
फिर हुआ चमत्कार
इसके बाद जो हुआ उस पर अदिति को कुछ देर तक विश्वास ही नहीं हुआ. उन्होंने बताया, 'होटल वापस पहुंचते ही मुझे एक फोन आया. मैंने फोन उठाया तो दूसरी तरफ से आवाज आई, 'क्या मैं अदिति से बात कर सकता हूं'. इस पर मैंने पूछा कि आप कौन बोल रहे हैं, आवाज आई - 'मैं रतन टाटा बोल रहा हूं, मुझे तुम्हारा पत्र मिला, क्या हम मिल सकते हैं'.
टाटा ने किया निवेश
अगले दिन अदिति और चेतन निर्धारित समय पर रतन टाटा से मिलने पहुंच गए. दोपहर 11 बजे शुरू हुई बैठक तीन घंटे चली. इस दौरान अदिति और चेतन ने उन्हें अपनी कंपनी का पूरा प्लान समझाया. रतन टाटा को दोनों का प्लान पसंद आया और उसके बाद रेपोस एनर्जी की किस्मत ही बदल गई. टाटा ग्रुप की ओर से रेपोस एनर्जी को 2019 में पहला और 2022 में दूसरा निवेश मिला.
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