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27 अक्टूबर को होगा राष्ट्रीय गुर्जर महासम्मेलन, सामाजिक सुधार और युवाओं के भविष्य पर रहेगा जोर
टॉकाटोरा स्टेडियम में आयोजित होने वाले सम्मेलन में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और सामाजिक कुरीतियों पर चर्चा होगी. अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से मांगें उठाने की बात कही.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 17 hours ago
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के टॉकाटोरा स्टेडियम में राष्ट्रीय गुर्जर महासम्मेलन आयोजित करेगी. सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सुधार, युवाओं के भविष्य और समुदाय के उचित प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. महासभा ने शुक्रवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी.
वर्ष 1908 में स्थापित महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि सम्मेलन में शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने से जुड़े प्रस्ताव रखे जाएंगे. महासभा ने स्पष्ट किया कि वह अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से आगे बढ़ाएगी.
राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री हरीश चंद्र भाटी ने स्वतंत्रता संग्राम में गुर्जर समुदाय के योगदान और बलिदान को उचित पहचान देने की मांग की. उन्होंने औपनिवेशिक शासन के दौरान लागू क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून के तहत समुदाय के लोगों को अपराधी के रूप में चिह्नित किए जाने से कई परिवारों को विस्थापन और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा. उन्होंने इस ऐतिहासिक कलंक के सामाजिक और शैक्षिक प्रभावों को दूर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत बताई.
भाटी ने राजनीतिक और संस्थागत प्रतिनिधित्व पर चिंता जताते हुए दावा किया कि देशभर में लगभग 4,600 विधायकों के बीच गुर्जर समुदाय के केवल 20 विधायक हैं और केंद्रीय मंत्रिमंडल में समुदाय का कोई मंत्री नहीं है. उन्होंने उच्चतम न्यायालय और मीडिया में भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने की बात कही. उनके अनुसार, शिक्षा, नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में समुदाय को समान अवसर मिलने चाहिए.
उन्होंने गुर्जर रेजिमेंट के गठन की मांग पर भी जोर दिया. भाटी ने कहा कि गुर्जर समुदाय ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन अब तक उसके नाम पर रेजिमेंट का गठन नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में समुदाय के लिए अपना राजनीतिक मंच बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी. महासभा का अनुमान है कि सम्मेलन में करीब एक लाख लोग शामिल हो सकते हैं.
युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने पर जोर
महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सविंदर सिंह भाटी ने कहा कि भारत और विदेशों में युवाओं के आंदोलनों को देखते हुए संगठन बच्चों और युवाओं को सही दिशा देने के लिए अभियान चला रहा है. उन्होंने युवाओं से हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से दूर रहने तथा अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से रखने की अपील की.
उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुशासन, सामाजिक सेवा और उपलब्धियों के माध्यम से समुदाय के प्रति बनी नकारात्मक धारणाओं को बदला जा सकता है. उन्होंने आईएएस, आईपीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को मार्गदर्शन और सहयोग देने की जरूरत भी बताई.
महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के.पी. सिंह कसाना ने युवाओं को नशे और हिंसक गतिविधियों से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने में लगाया जाना चाहिए. इसके लिए परिवारों की भागीदारी, करियर मार्गदर्शन और उद्योग जगत में रोजगार के अवसरों से युवाओं को जोड़ना जरूरी है.
महासभा के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष सुंदर चौधरी ने भी शिक्षा, आपसी सहयोग और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कही. उन्होंने गुर्जर पहचान को केवल जाति तक सीमित न मानते हुए इसे संस्कृति, जीवनशैली और मूल्यों से जुड़ा बताया.
ऐतिहासिक विरासत और आरक्षण के मुद्दे उठेंगे
महासभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. रूप सिंह ने गुर्जर समुदाय की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की मांग की. उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से गुर्जर-प्रतिहार काल के ऐतिहासिक स्थलों पर पहचान और सूचना पट्ट दोबारा स्थापित करने तथा इन स्थलों के संरक्षण के लिए कदम उठाने की अपील की.
उन्होंने जाति जनगणना के आधार वर्ष में बदलाव, इदाते आयोग की सिफारिशों को लागू करने और अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) के आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी उठाई. इसके अलावा, गुर्जर आरक्षण से जुड़े लगभग 20 वर्षों से लंबित मामलों को वापस लेने की मांग की गई.
दहेज और मृत्युभोज के खिलाफ अभियान
महासभा के मुताबिक, 27 अक्टूबर को होने वाले सम्मेलन में दहेज लेने और देने की प्रथा समाप्त करने तथा सादगीपूर्ण, दहेज-मुक्त विवाह को बढ़ावा देने के प्रस्ताव रखे जाएंगे. संगठन ने कहा कि सामाजिक प्रतिष्ठा और दिखावे के नाम पर परिवारों पर पड़ने वाले अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करना जरूरी है.
महंगे मृत्युभोज को भी सम्मेलन में प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया जाएगा. महासभा इसके स्थान पर सादगीपूर्ण स्मरण और शोक संतप्त परिवारों की मदद को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रही है. युवाओं को नशे से बचाने, शिक्षा को बढ़ावा देने और सामाजिक सुधार से जुड़े प्रस्ताव भी रखे जाएंगे.
सरदार पटेल की जयंती पर एकता का संदेश
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में कुर्मी, पटेल और गुर्जर समुदायों के प्रतिनिधियों के एक साथ आने का प्रस्ताव है. इसे एकता और सहयोग का संदेश बताते हुए आयोजकों ने तीनों समुदायों को एक ही वृक्ष की शाखाओं के समान बताया.
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधिमंडलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी योजना है. महासभा ने कहा कि किसान, पशुपालक, सैनिक, विद्यार्थी, पेशेवर और उद्यमी देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
राष्ट्रीय गुर्जर महासम्मेलन 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के टॉकाटोरा स्टेडियम में आयोजित होगा. महासभा के अनुसार, इसका उद्देश्य सामाजिक सुधार, युवाओं के सशक्तीकरण, राष्ट्रीय एकता और समुदाय की मांगों पर सामूहिक चर्चा करना है.
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