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अब 100% एथेनॉल से चल सकेंगी गाड़ियां, सरकार ने बदले मोटर वाहन नियम
E100 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को मिली मंजूरी, E85 के साथ उत्सर्जन प्रमाणन नियमों में शामिल हुआ E100; कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
सरकार ने 100 फीसदी एथेनॉल (E100) से चलने वाले वाहनों को अनुमति देने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) में संशोधन किया है. इस कदम का उद्देश्य फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बढ़ावा देना और कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सोमवार को नियमों में बदलाव करते हुए उत्सर्जन प्रमाणन से जुड़े प्रावधानों में E85 के साथ E100 को भी शामिल किया. इन ईंधनों से चलने वाले वाहनों को अपनी संबंधित श्रेणियों के उत्सर्जन और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा.
E85 के साथ E100 को भी नियमों में जगह
मंत्रालय का यह फैसला अप्रैल में जारी मसौदा अधिसूचना के बाद आया है. उस समय मंत्रालय ने परीक्षण और प्रमाणन मानकों में E100 को शामिल करने का प्रस्ताव दिया था. इससे पहले संबंधित प्रावधानों में केवल E85 का उल्लेख था.
E85 पेट्रोल और एथेनॉल का मिश्रण है, जिसमें मात्रा के आधार पर 85 फीसदी तक एथेनॉल होता है. वहीं, E100 में 100 फीसदी एथेनॉल होता है. हालांकि, इन दोनों ईंधनों का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें इनके अनुरूप डिजाइन और प्रमाणित किया गया है.
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि E10 या E20 पेट्रोल के अनुकूल होने का मतलब यह नहीं है कि कोई वाहन E85 या E100 से भी चल सकता है. वाहन मालिकों को ईंधन चुनने से पहले अपने वाहन पर लगे फ्यूल कम्पैटिबिलिटी स्टिकर की जांच करनी चाहिए और निर्माता की ओर से दी गई निर्देश पुस्तिका का पालन करना चाहिए.
मौजूदा वाहन मालिकों को बदलाव की जरूरत नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए संशोधन के तहत मौजूदा वाहन मालिकों को अपने वाहनों में E85 या E100 ईंधन का इस्तेमाल शुरू करने अथवा वाहन में बदलाव कराने की जरूरत नहीं है. यह अनिवार्यता अभी भी नहीं है और भविष्य में भी इस अधिसूचना के तहत ऐसी कोई जरूरत नहीं होगी.
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन इस तरह तैयार किए जाते हैं कि उनके फ्यूल सिस्टम के पुर्जे और उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री E20 से लेकर E100 तक के एथेनॉल मिश्रण को संभाल सके. इस तकनीक का उद्देश्य अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों के पुर्जों और अन्य सामग्रियों में होने वाली अनुकूलता संबंधी समस्याओं से बचना है.
E20 पेट्रोल के बाद अब ज्यादा एथेनॉल इस्तेमाल पर जोर
फिलहाल तेल विपणन कंपनियां E20 पेट्रोल बेच रही हैं, जिसमें 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाता है. सरकार घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके और देश में तैयार ईंधन का उपयोग बढ़ाया जा सके.
हालांकि, E20 पेट्रोल के व्यापक इस्तेमाल के बाद कुछ वाहन मालिकों ने गाड़ियों के पुर्जों को संभावित नुकसान पहुंचने को लेकर चिंता जताई है. ऐसे में E85 और E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों के इस्तेमाल के लिए वाहनों की उपयुक्तता और निर्माता के दिशानिर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा.
प्रदूषण घटाने में मिल सकती है मदद
मंत्रालय के मुताबिक, एथेनॉल का जीवाश्म कार्बन फुटप्रिंट पेट्रोल की तुलना में कम होता है. अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन उपयुक्त वाहनों में इस्तेमाल किए जाने पर कार्बन मोनोऑक्साइड और कुछ हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकते हैं.
इसके अलावा, एथेनॉल के उत्पादन और इस्तेमाल के पूरे चक्र में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि एथेनॉल किस कच्चे माल से और किस उत्पादन प्रक्रिया के जरिए तैयार किया गया है.
सरकार का मानना है कि घरेलू एथेनॉल का अधिक इस्तेमाल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है.
बायोडीजल नियमों में भी संशोधन
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में किए गए संशोधन के तहत बायोडीजल से संबंधित कुछ प्रावधानों को भी अपडेट किया गया है. इसके अलावा, कुछ तकनीकी सुधार भी किए गए हैं. अलग से केंद्र सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिश्रण को बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है.
ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का पहले से इस्तेमाल हो रहा है. अब भारत भी अपने मौजूदा एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के साथ इस तकनीक का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है.
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