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निर्यातकों को बड़ी राहत: मार्च 2027 तक बढ़ी RELIEF योजना की अवधि, माल ढुलाई और बीमा लागत पर मिलेगी सुरक्षा
योजना का दूसरा घटक 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई ECGC की अलग-अलग और समग्र कारोबार वाली बीमा पॉलिसियों पर लागू होता है. इसके तहत पात्र माल की विभिन्न प्रकार की खेपों को शामिल किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 hours ago
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री माल परिवहन में बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने निर्यातकों को राहत दी है. सरकार ने RELIEF योजना के दूसरे घटक की अवधि छह महीने बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी है. इस योजना के तहत पात्र निर्यातकों को 95 फीसदी तक जोखिम सुरक्षा मिल सकती है. इसका उद्देश्य बढ़ती माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और युद्ध संबंधी जोखिमों के कारण निर्यातकों पर पड़ रहे वित्तीय दबाव को कम करना है.
31 मार्च 2027 तक मिलेगा योजना का लाभ
वाणिज्य विभाग ने सोमवार को बताया कि Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation (RELIEF) योजना के दूसरे घटक की अवधि बढ़ाई गई है. इस विस्तार का उद्देश्य निर्यातकों को पात्र खेपों के लिए भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) से बीमा कवर लेने के लिए प्रोत्साहित करना है. योजना का लाभ लेने के इच्छुक निर्यातकों को अपने दावे और संबंधित दस्तावेज ECGC के ग्राहक पोर्टल पर जमा करने होंगे.
सरकार ने ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निर्यातकों को राहत देने के लिए 19 मार्च 2026 को यह योजना शुरू की थी. अब इसकी अवधि बढ़ने से पात्र निर्यातकों को अतिरिक्त समय मिलेगा.
बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी से भी सुरक्षा
वाणिज्य विभाग के अनुसार, RELIEF योजना के तहत पात्र निर्यातकों को 95 फीसदी तक जोखिम सुरक्षा मिल सकती है. इसके अलावा, संकट से पहले के स्तर की तुलना में बीमा प्रीमियम में हुई बढ़ोतरी से भी निर्धारित शर्तों के तहत सुरक्षा उपलब्ध है.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों पर माल परिवहन प्रभावित हुआ है. इससे भारतीय निर्यातकों के लिए माल ढुलाई की लागत, बीमा प्रीमियम और युद्ध संबंधी जोखिम बढ़ गए हैं. योजना की अवधि बढ़ाने का उद्देश्य इन अतिरिक्त लागतों के असर को कम करना और निर्यात गतिविधियों को समर्थन देना है.
किन निर्यातकों और खेपों को मिलेगा लाभ?
योजना का दूसरा घटक 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई ECGC की अलग-अलग और समग्र कारोबार वाली बीमा पॉलिसियों पर लागू होता है. इसके तहत पात्र माल की विभिन्न प्रकार की खेपों को शामिल किया गया है.
इसमें पूर्ण कंटेनर लोड (FCL), आंशिक कंटेनर लोड (LCL) और रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों के जरिये भेजे जाने वाले पात्र माल शामिल हैं. हालांकि, ऊर्जा से संबंधित खेपों को योजना के इस घटक के दायरे से बाहर रखा गया है.
497 करोड़ रुपये के बजट वाली योजना
RELIEF योजना सरकार के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का हिस्सा है. इसका कुल बजट 497 करोड़ रुपये है. इसका उद्देश्य ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों पर व्यवधान के कारण लॉजिस्टिक्स लागत में हुई असाधारण बढ़ोतरी तथा निर्यात संबंधी जोखिमों से भारतीय निर्यातकों को निपटने में मदद करना है.
योजना को निर्यातकों की अलग-अलग श्रेणियों की जरूरतों के अनुसार तीन घटकों में बांटा गया है. पहला घटक मौजूदा ECGC पॉलिसीधारकों के लिए है, जबकि दूसरा घटक भविष्य में किए जाने वाले निर्यात के लिए सहायता प्रदान करता है. तीसरा घटक उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को लक्षित करता है, जिनके पास ECGC क्रेडिट बीमा नहीं है.
योजना की अवधि बढ़ाए जाने से पश्चिम एशिया संकट के बीच पात्र निर्यातकों को जोखिम प्रबंधन और बीमा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा. इससे बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत के दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
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