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उत्तर प्रदेश में निवेश को मिलेगी रफ्तार, 500 जीसीसी बनाने का लक्ष्य, 15 एमओयू पर हस्ताक्षर
उत्तर प्रदेश ने लखनऊ में आयोजित यूपी जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 में उद्योग जगत के साथ 15 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, पांच निवेशकों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए और 13 शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौते किए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2031 तक राज्य में 500 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
उत्तर प्रदेश को वैश्विक कारोबारी संचालन, उन्नत प्रौद्योगिकी, उत्पाद विकास और उच्च मूल्य वाले रोजगार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने 2031 तक 500 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
सोमवार को लखनऊ में आयोजित यूपी जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 में राज्य सरकार ने कंपनियों और टैलेंट पार्टनर्स के साथ 15 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इसके अलावा, संभावित निवेशकों को पांच लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए गए और 13 शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौतों का आदान-प्रदान किया गया. इन पहलों का उद्देश्य निवेश बढ़ाना, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग मजबूत करना तथा बदलती वैश्विक कारोबारी जरूरतों के अनुरूप कार्यबल तैयार करना है.
आईआईटी कानपुर एलुमनी एसोसिएशन ने इन्वेस्ट यूपी और एचसीएलटेक के सहयोग से होटल द सेंट्रम में इस समिट का आयोजन किया. इसमें कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, निवेशकों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अधिकारियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल बदलाव, उत्पाद आधारित नवाचार और वैश्विक कारोबारी सेवाओं के भविष्य पर चर्चा की.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य अब पारंपरिक कारोबारी गतिविधियों से आगे बढ़कर नवाचार, डिजाइन, इंजीनियरिंग और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए तैयार है. उन्होंने राज्य के औद्योगिक आधार, कुशल कार्यबल, बुनियादी ढांचे और निवेशक केंद्रित नीतियों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण बताया.
बुनियादी ढांचा और प्रतिभाशाली कार्यबल यूपी की ताकत
मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश के निवेश माहौल में आए बदलावों का उल्लेख किया. उन्होंने सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और प्रशासनिक दक्षता पर जोर देने को निवेशकों का भरोसा बढ़ाने वाला कदम बताया. उनके अनुसार, राज्य अपनी पहले की 'बीमारू' छवि से आगे बढ़कर राजस्व अधिशेष वाला राज्य बन गया है.
राज्य की प्रमुख बुनियादी और औद्योगिक सुविधाओं में व्यापक एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और 75,000 एकड़ से अधिक का औद्योगिक भूमि बैंक शामिल हैं. समिट में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत के मोबाइल विनिर्माण में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में 60 प्रतिशत है.
उत्तर प्रदेश में अनुमानित 6.7 लाख पेशेवर हैं, जिनमें तीन लाख प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े हैं. राज्य में 8,000 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान हैं और हर साल दो लाख से अधिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) स्नातक तैयार होते हैं. इससे जीसीसी स्थापित करने या अपने मौजूदा परिचालन का विस्तार करने वाली कंपनियों को कुशल प्रतिभाएं मिल सकती हैं.
आईआईटी कानपुर, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी, आईआईएम लखनऊ, आईआईआईटी लखनऊ और एमएनएनआईटी प्रयागराज जैसे संस्थान इंजीनियरिंग, एआई, एनालिटिक्स और प्रबंधन के क्षेत्र में विशेषज्ञता उपलब्ध कराते हैं.
राज्य सरकार स्टेट एआई मिशन, डीप-टेक हब, एआई सिटी और रोबोटिक्स क्लस्टर जैसी पहल भी आगे बढ़ा रही है. इनका उद्देश्य एआई आधारित जीसीसी, उत्पाद इंजीनियरिंग टीमों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और उन्नत कारोबारी सेवाओं को राज्य में आकर्षित करना है.
पांच निवेशकों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी
राज्य सरकार ने पांच कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए हैं. इनमें हैवेल्स इंडिया लिमिटेड, अमेरिकप्राइज इंडिया एलएलपी, मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशंस सपोर्ट सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डब्ल्यूएसपी कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.
डब्ल्यूएसपी कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को जारी किए जाने वाले लेटर ऑफ कम्फर्ट के लिए उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री की मंजूरी और औपचारिक पत्र जारी होना अभी बाकी है.
इन पत्रों का उद्देश्य निवेशकों की रुचि को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना और जीसीसी बाजार में उत्तर प्रदेश की स्थिति मजबूत करना है. हालांकि, ये निवेश को सुविधाजनक बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं. इनसे यह पुष्टि नहीं होती कि सभी प्रस्तावित परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं.
जीसीसी और कौशल विकास के लिए 15 समझौते
उद्योग जगत के साथ किए गए 15 एमओयू में जीसीसी के विस्तार, प्रौद्योगिकी आधारित निवेश और प्रतिभा विकास से जुड़े सहयोग शामिल हैं. इनमें ईवाई जीडीएस, एएमएल राइटसोर्स, कंप्यूटासेंटर, मेटलाइफ, डीएसवी, डैमैक, अल्ट्रुइस्ट और स्मार्टवर्क्स जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं.
स्मार्टवर्क्स लखनऊ में दो समर्पित कैंपस स्थापित करने की योजना बना रही है. राज्य ने जीसीसी की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए पेटीएम, एडब्ल्यूएस, बार्कलेज, आईबीएम और नौकरी के साथ भी साझेदारी की है. पेटीएम ने इस सहयोग के तहत दो एमओयू पर हस्ताक्षर किए.
इन साझेदारियों का उद्देश्य वैश्विक कारोबारी परिचालन के विस्तार के साथ कंपनियों को प्रासंगिक तकनीकी और प्रबंधकीय कौशल वाले पेशेवर उपलब्ध कराना है. जीसीसी अब पारंपरिक सपोर्ट और डिलीवरी सेवाओं से आगे बढ़कर विशेषज्ञता आधारित काम भी कर रहे हैं.
13 शैक्षणिक संस्थान भी सहयोग में शामिल
उत्तर प्रदेश ने 13 शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौतों का आदान-प्रदान किया. इनमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, शिव नाडर विश्वविद्यालय, एमएनएनआईटी इलाहाबाद, लखनऊ विश्वविद्यालय, आईआईआईटी इलाहाबाद, आईआईआईटी लखनऊ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय शामिल हैं.
इन साझेदारियों का उद्देश्य शैक्षणिक कार्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाना और व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा उद्योग आधारित कौशल विकास के अवसर बढ़ाना है. विश्वविद्यालयों और कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल से विद्यार्थियों को एआई, एनालिटिक्स, उत्पाद इंजीनियरिंग और वैश्विक कारोबारी सेवाओं से जुड़े रोजगार के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
जीसीसी के भविष्य पर सात सत्रों में चर्चा
समिट में निवेश संबंधी फैसलों, एआई के इस्तेमाल, नवाचार और कार्यबल विकास पर सात विषय आधारित सत्र आयोजित किए गए. इनमें जीसीसी स्थापित करने के लिए कंपनियों के स्थान चयन के कारकों, भविष्य के केंद्रों के लिए उत्तर प्रदेश को चुनने के कारणों और एआई आधारित जीसीसी विकसित करने के अनुभवों पर चर्चा हुई.
अन्य सत्रों में सेवा वितरण से उत्पाद स्वामित्व की ओर बढ़ने, स्टार्टअप के साथ जीसीसी की साझेदारी, उत्कृष्टता केंद्रों, एआई के दौर में विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित किए जाने वाले कौशल और कार्यबल को नए कौशल सिखाने जैसे विषय शामिल रहे.
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' ने भी राज्य के जीसीसी इकोसिस्टम, बुनियादी ढांचे और प्रतिभाशाली कार्यबल पर अपने विचार साझा किए.
कंपनियों ने निवेश के अनुभव साझा किए
समिट में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टवर्क्स, माइक्रोसॉफ्ट और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश की नीतियों, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सहयोग की सराहना की. कंपनियों ने राज्य में चल रही परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं की जानकारी भी दी.
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रतिनिधि बृजेश शर्मा ने बताया कि कंपनी अपने इको सॉल्यूशंस जीसीसी में 634 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है और 2026 के अंत तक इसका परिचालन शुरू करने का लक्ष्य है. यह केंद्र हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी), हीट पंप तकनीक और उन्नत उत्पाद विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा. प्रतिभा विकास और प्रशिक्षण के माध्यम से 500 से अधिक उच्च मूल्य वाले रोजगार सृजित करने की योजना है. कंपनी एआई आधारित डेटा सेंटर कूलिंग तकनीकों में अनुसंधान एवं विकास का भी विस्तार करना चाहती है.
स्मार्टवर्क्स के प्रतिनिधि हर्ष बिनानी ने कहा कि कंपनी नोएडा में 20 लाख वर्ग फुट से अधिक कार्यालय क्षेत्र का प्रबंधन करती है, जहां 110 से अधिक कंपनियां काम कर रही हैं. कंपनी अब लखनऊ में भी विस्तार कर रही है. उन्होंने बताया कि बीबीडी टाइम्स स्क्वायर में दो लाख वर्ग फुट का जीसीसी हब विकसित किया गया है.
बिनानी ने कहा कि लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर जैसे शहरों के युवाओं के लिए करियर के अवसर तैयार करना महत्वपूर्ण है. उन्होंने जोर दिया कि ध्यान केवल एमओयू पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि परियोजनाओं को जमीन पर उतारने और रोजगार पैदा करने पर भी होना चाहिए.
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के प्रतिनिधि राजीव कुमार ने राज्य में उपलब्ध प्रतिभाओं, कर्मचारियों की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और नीतिगत सहयोग को निवेश के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि जब माइक्रोसॉफ्ट नोएडा में अपना केंद्र स्थापित कर रही थी, तब नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितु माहेश्वरी के साथ बातचीत के बाद लगभग छह सप्ताह के भीतर जमीन उपलब्ध करा दी गई थी.
कुमार के अनुसार, केंद्र में पहले वर्ष लगभग 600 कर्मचारी थे, जिनकी संख्या तीन वर्षों में बढ़कर करीब 3,000 हो गई. लगभग 2,500 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित इस कैंपस ने वर्ड, एक्सेल, पावरपॉइंट और कोपायलट जैसी तकनीकों के विकास में योगदान दिया है.
एचसीएल टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधि किरण चेरुकुरी ने राज्य की जीसीसी नीति और निवेश प्रोत्साहनों के क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि एचसीएल ने लगभग एक दशक पहले लखनऊ में अपना कैंपस स्थापित किया था और वर्तमान में वहां करीब 1,500 लोग कार्यरत हैं. उन्होंने अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) के सहयोग से कैंपस में शुरू किए गए एआई आधारित जीसीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उन्नत क्लाउड और कंप्यूटिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
एआई पर श्वेत पत्र जारी, निवेश प्रोत्साहनों पर जोर
समिट के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'द ट्रू इकोनॉमिक्स ऑफ एआई एडॉप्शन इन जीसीसी' शीर्षक से एक श्वेत पत्र जारी किया. इसे एचसीएल और आईआईटी कानपुर के बीच डीप-टेक नवाचार सहयोग के तहत तैयार किया गया है. इस श्वेत पत्र के जरिए जीसीसी में एआई के इस्तेमाल और उसके कारोबारी प्रभावों को प्रमुखता दी गई.
उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति 2024 के तहत पात्र निवेशकों को 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी और 50 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी का प्रावधान है. इसके अलावा, नीति के प्रावधानों और पात्रता मानदंडों के अधीन परिचालन संबंधी सहायता भी दी जाती है. इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ाना और कंपनियों को राज्य में उच्च मूल्य वाले परिचालन स्थापित करने या उनका विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना है.
कार्यक्रम में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' और संसदीय कार्य एवं औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी उपस्थित रहे. वरिष्ठ अधिकारियों में आईआईडीसी दीपक कुमार, उद्योग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख सचिव आलोक कुमार, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय किरण आनंद, इन्वेस्ट यूपी की एसीईओ प्रेरणा शर्मा और गजल भारद्वाज तथा आईआईटी कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल शामिल थे.
उत्तर प्रदेश का 2031 तक 500 जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य देश की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना है. अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश प्रतिबद्धताओं, संस्थागत साझेदारियों और नीतिगत प्रोत्साहनों को किस हद तक वास्तविक परिचालन केंद्रों, निरंतर भर्ती और राज्यभर में कुशल पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसरों में बदला जाता है.
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