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मध्य प्रदेश की मंडियों में करोड़ों का घोटाला, टैक्स चोरी कर किसानों और सरकार के साथ की जा रही बेईमानी
इंदौर सहित मध्य प्रदेश की 254 मंडियों में आड़त प्रथा के विरोध और करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में मंगलवार को मध्य प्रदेश भारयती किसान यूनियन ने मध्य प्रदेश की मंडियों में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के विरोध में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया. प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से मध्य प्रदेश भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष अनिल यादव और किसानों के हितकारी मुकेश सोमानी मौजूद रहे. इस दौरान किसान यूनियन ने मध्य प्रदेश की मंडियों में हुई करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का मुद्दा भी उठाया.
मंडी में टैक्स चोरी का आरोप
अनिय यादव ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी कि इंदौर की देवी अहिल्याबाई मंडी में किसानों के साथ करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है. मंडी में आड़त प्रथा की आड़ में मंडी टैक्स की चोरी कर किसानों को भाव पत्रक, तोल पत्रक, और भुगतान पत्रक नहीं दिए जाते, जिससे उससे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
15 हजार करोड़ का घोटाला
अनिल यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की 254 मंडियों में से इंदौर, उज्जैन, बदनावर, और शाजापुर मंडियों में किसानों और सरकार से लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला किया गया है. इन मंडियों में व्यापारियों द्वारा अपने ही कानून लागू किए जाते हैं, जिससे सरकार और किसान दोनों को लूटा जा रहा है. किसानों की शिकायतों के बावजूद शासन-प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. उन्होंने कहा कि किसानों के हित के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा और उम्मीद है कि शासन-प्रशासन जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा, जिससे किसानों को फायदा मिल सकेगा और सरकार के राजस्व में भी बढ़ोत्तरी हो सकेगी.
6 महीने बाद पलट दिया आड़त प्रथा बंद करने का फैसले
मुकेश सोमानी ने बताया कि उन्होंने आड़त प्रथा को लेकर 2006 में इंदौर हाई कोर्ट में केस दायर किया था. 2007 में हाई कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला लेते हुए अवैध वसूली को बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन 2015 में मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड के डायरेक्टर अरुण पांडे ने कोर्ट के फैसले को पलट दिया. इसके बाद 23 जनवरी 2024 को कोर्ट की डबल बेंच ने फिर से किसानों के हित में फैसला देते हुए आड़त प्रथा को बंद किया, लेकिन 6 महीने बाद उसी बेंच ने अपना फैसला पलटते हुए आड़तियों के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे किसानों को बहुत निराशा हुई.
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किसान यूनियन ने भी उठाई थी मांग
अनिल यादव ने बताया कि किसान यूनियन ने भी मांग की थी कि आड़तियों द्वारा की जा रही अवैध वसूली बंद की जाए. उनकी प्रमुख मांग है कि इंदौर मंडी को मध्य प्रदेश की अन्य शासकीय मंडियों की तरह संचालित किया जाए. हालांकि इंदौर मंडी के आडतियों ने अपनी एक अलग प्रथा है, जिसे बंद करवाने की कोशिशें बार-बार विफल हो जाती हैं.
किसानों की मदद के लिए किया दिल्ली का रुख
भारतीय किसान यूनियन के उपाध्यक्ष सुभाष मल्होत्रा ने कहा कि लंबे समय से यह लड़ाई लड़ी जा रही है, सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि किसानों के साथ सरकार के राजस्व को भी इससे नुकसान हो रहा है. वहीं, सचिव संजय सकल्ले ने कहा कि इंदौर मंडी में आड़त प्रथा के माध्यम से मंडी टैक्स की चोरी कर किसानों को ठगा जा रहा है. किसानों को भाव पत्रक, तोलपत्रक, और भुगतान पत्रक नहीं दिए जा रहे हैं. सरकार और किसानों को लूटने का काम मंडियों में हो रहा है. ऐसे में किसानों की मदद के लिए ही अब दिल्ली का रूख किया गया है.
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