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नेताओं के लिए पब्लिक कचरा....अपनों को खोने वालों के दर्द को कब समझेगी सरकार?
पुणे और मुंबई में बीते दिनों हुई घटनाओं से लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा है. क्योंकि रसूखदरों से जुड़े मामलों में पूरा सिस्टम पंगु बन जाता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
महाराष्ट्र में हिट-एंड-रन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. पुणे, मुंबई और अब नासिक . पुणे में एक रईसजादे ने दो युवाओं को अपनी लग्जरी कार से रौंद दिया. मुंबई में सत्ताधारी शिवसेना लीडर के लड़के ने BMW से एक महिला की जान ले डाली. नासिक में भी एक महिला को तेज रफ्तार कार ने मौत की नींद सुला दिया. नासिक में इस वारदात को अंजाम देने वाला कौन है, इसका पता अब तक नहीं चल पाया है. यदि आरोपी कोई सामान्य व्यक्ति होगा तो उसे शायद अपने कर्मों की सजा मिल जाए , लेकिन पुणे और मुंबई की तरह यदि उसका नाता भी किसी रसूखवाले परिवार से है, तो फिर इसकी संभावना कम है.
गरीब होने की मिल रही सजा
मुंबई के BMW कांड का आरोपी मिहिर शाह दुर्घटना के 72 घंटे बाद पुलिस की गिरफ्तार में आया है. माना जा रहा है कि रसूख के चलते पुलिस ने उसे ढूंढने की दिल से कोशिश नहीं करी, ताकि ब्लड टेस्ट में अल्कोहल का पता चलने की संभावना दम तोड़ दे. इस हादसे में जान गंवाने वालीं कावेरी नखवा का भी यही आरोप है. वह इस पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली से बेहद नाराज हैं. प्रदीप नखवा का कहना है कि हमें गरीब होने की सजा मिल रही है, आखिर हमें न्याय दिलाने और समर्थन के लिए कौन आएगा? मिहिर के पिता राजेश शाह एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के दिग्गज लीडर हैं.
हमारी मदद कौन करेगा?
नेता का बेटा मिहिर शाह ने स्कूटर से जा रहे कावेरी और प्रदीप को पीछे से टक्कर मारी थी. आरोपी कावेरी को काफी दूर तक घसीटता हुए ले गया. यदि वो कार रोक लेता तो शायद कावेरी की जान बच सकती थी. प्रदीप नखवा का कहना है कि वो मेरी पत्नी को कार से घसीटता ले गया. कोई भी वहां हमारी मदद को नहीं था.हम गरीब हैं, हमारी मदद के लिए कौन है? आज उसे जेल भेजा जाएगा. कल उसे अदालत में पेश करेंगे और फिर उसे बेल मिल जाएगी. यह लगातार मामला खिंचता रहेगा.
आपकी लाडली बहना मर गई
आंखों में आंसू लिए नखवा ने पूछा कि आखिर हमें केस लड़ने के लिए पैसा कहां से मिलेगा. हम आखिर वकील कहां से लाएंगे? हमारे लिए कौन है? नेता हमारी परवाह नहीं करते, उन्हें हमारी याद केवल वोट के लिए ही आती है. आरोपी नेता का बेटा है, उसके पास पैसा है लेकिन हमारे पास कुछ नहीं है. नेताओं के लिए पब्लिक केवल कचरा है. ये लोग लाडली बहना योजना की बात करते हैं, आपकी लाडली बहना मर गई है.
क्या मुख्यमंत्री मिलने आए?
प्रदीप ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि क्या एकनाथ शिंदे हमसे मिलने आए. क्या देवेंद्र फडणवीस या अजित पवार ने हमारा हाल पूछा? उन्होंने आगे कहा कि मिहिर शाह को तीन दिन के बाद गिरफ्तार किया गया. आखिर वो छिपा क्यों था? तीन बाद क्या उसके ब्लड में अल्कोहल मिलेगा? अपनी पत्नी को खोने वाले प्रदीप ने जो सवाल किए हैं उसका जवाब किसी के पास नहीं है. उनकी आशंका भी काफी हद तक सही है. प्रदीप के जैसा ही दुख पुणे में अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों का भी है. उन्हें भी अब तक न्याय नहीं मिला है.
पुणे में भी नहीं मिला न्याय
पुणे में नामी बिल्डर के नाबालिग बेटे ने शराब के नशे में दो युवाओं को मौत के घाट उतार दिया था. आरोपी को बचाने में पूरा सिस्टम जुट गया, लेकिन लोगों के आक्रोश के चलते कुछ कार्रवाई हुई. हालांकि, आरोपी की उम्र उसके लिए ढाल बनी और कानून का हवाला देते हुए उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया. हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट से पीड़ित परिवारों को बड़ा झटका देते हुए नाबालिग आरोपी को बेल दी है. दो जजों की बेंच ने कहा कि हादसा गंभीर था मगर हमारे हाथ बंधे हुए हैं. 2 लोगों की जान चली गई. यह बहुत ही दर्दनाक हादसा था ही, मगर बच्चा भी मेंटल ट्रॉमा में था. उसे कुछ समय दीजिए.
फैसले से बिखरीं उम्मीदें
पुणे के कल्याणी नगर में 19 मई को शहर के नामी बिल्डर के नाबालिग बेटे ने अपनी तेज रफ्तार कार से मध्य प्रदेश के 2 आईटी पेशेवरों को मौत के घाट उतार दिया था. नाबालिग कार कथित तौर पर नशे में चला रहा था. किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य एलएन दानवाड़े ने सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने लिखने की शर्त के साथ आरोपी को जमानत दे दी गई, जिसे लेकर काफी बवाल मचा. लोगों के भारी दबाव के चलते पुलिस को भी इस मामले में सख्त एक्शन लेना पड़ा. पीड़ित परिवारों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें न्याय मिलेगा. हालांकि, हाई कोर्ट के फैसले से उनकी उम्मीदें बिखर गई हैं. नाबालिग आरोपी के बिल्डर पिता विशाल अग्रवाल को भी जमानत चुकी है. हालांकि, उसे फिलहाल जेल में ही रहेगा क्योंकि वह घटना से संबंधित अन्य मामलों में भी आरोपी है. अग्रवाल पर अल्कोहल टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल में हेरफेर करने और दुर्घटना का दोष लेने के लिए अपने ड्राइवर पर दबाव डालने का भी आरोप है.
हमारा दर्द क्यों नहीं दिखा?
पीड़ित परिवार अदालत के इस फैसले से आहत हैं. मृतक अनीश अवधिया की मां का कहना है कि जज साहब और पूरे सिस्टम को सिर्फ नाबालिग आरोपी की तकलीफ दिख रही है. हमारा दर्द क्यों नहीं दिख रहा? हम कोर्ट के इस फैसले से बेहद निराश हैं. हम नहीं चाहते कि आरोपी को फांसी हो, लेकिन इतनी सजा तो जरूर मिलनी चाहिए कि वो दोबारा ऐसी गलती न करे.उन्होंने आगे कहा कि नाबालिग आरोपी को रिहा नहीं करना चाहिए था. कोर्ट ने उसकी परेशानी देखकर उसे रिहा कर दिया, मगर हमारा क्या? उस नाबालिग के कारण दो घरों के चिराग बुझ गए. इस फैसले इ क्या हमें खुश होना चाहिए? पुणे कांड को लेकर भी लोगों में नेताओं, खासकर सरकार को लेकर नाराजगी है.
पिता की फ़रियाद नहीं सुनी
इसी तरह, कुछ साल पहले पुणे में इंजीनियर अभिषेक रॉय की मौत हो गई थी. मूलरूप से भोपाल निवासी अभिषेक के परिजनों ने हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला. पुलिस ने मामले को रफादफा कर दिया, जबकि अभिषेक के पिता लगातार कहते रहे कि उनके बेटे का मर्डर हुआ है. पीड़ित परिवार ने महाराष्ट्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार से लेकर प्रधानमंत्री मोदी को भी पत्र लिखे मगर कोई जवाब नहीं आया. BW हिंदी से बातचीत में शरतचंद्र रॉय ने बताया कि पुणे के वाघोली में 2 जून 2014 को अभिषेक की हत्या कर दी गई थी. उन्होंने कुछ लोगों पर शक जाहिर किया किया था, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी. रॉय ने कहा कि न पुलिस ने उनकी सुनी और न ही सरकार ने. उन्होंने प्रदीप नखवा की बातों पर सहमति जताते हुए कहा कि नेताओं की नजर में आम जनता की जान का कोई मोल नहीं.
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