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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया विश्वंभर सिंह द्वार का अनावरण
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सहारनपुर में विश्वंभर सिंह द्वार का अनावरण किया. इस दौरान योग गुरु स्वामी भारत भूषण भी मौजूद रहे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सहारनपुर में विश्वंभर सिंह द्वार का अनावरण किया. इस दौरान उन्होंने पंडितजी से जुड़ी यादें भी साझा की. इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति को 'मोक्षायतन' का सर्वोच्च सम्मान भारत योग स्वास्थ्यश्री से सम्मानित किया गया. रामनाथ कोविंद से पहले पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह को भी इस सम्मान से नवाजा गया था. योग गुरु स्वामी भारत भूषण ने रामनाथ कोविंद को परंपरागत पगड़ी पहनाई और स्वास्थ्यश्री सम्मान एवं सनद उन्हें भेंट की.
'मोक्षायतन' से जुड़ना गौरवपूर्ण
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 'मोक्षायतन' से जुड़ने को गौरवपूर्ण अहसास बताया. इस अवसर पर संस्थान की गुरु माता इष्ट शर्मा ने पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद का स्वागत रुद्राक्ष माला, दोशाला और गोवत्सा भेंट कर किया. इस दौरान, परंपरागत भारत योग परिवार की चौथी पीढ़ी के राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विजेता योग साधक-साधिकाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया. पूर्व राष्ट्रपति ने 10 साल की उम्र से कला, संगीत, काव्य और संरचना में गहरी पैठ रखते हुए हर साल नई संरचना देने वाली 13 वर्षीया देवी प्रत्यक्षा के तीसरे गीत 'कान्हा मेरे कान्हा' का ऑडियो भी रिलीज किया. साथ ही मोक्षायतन योग संस्थान की वार्षिकी सिंहावलोकन का विमोचन भी किया.
कई बार गए जलगोबिंद मठ
रामनाथ कोविंद ने बताया कि वह कई बार जलगोबिंद मठ गए थे. वह बिशंबर दास से विश्वंभर सिंह बने थे पंडित जी से बेहद प्रभावित रहे हैं. उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए योग गुरु स्वामी भारत भूषण ने नेशन बिल्डर्स अकादमी और मोक्षायतन योग संस्थान की स्थापना की है. महज 21 वर्ष की उम्र में एक अंतरराष्ट्रीय योग संस्थान बनाने का सपना पूरा कर देना योगी स्वामी भारत भूषण की दूरदर्शी सोच और संकल्पशक्ति को दर्शाता है.
योग को वैश्विक पहचान दिलाई
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी भारत भूषण ने 1990 में ही अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की शुरुआत करके योग को वैश्विक पहचान दिलाई. उसी के परिणामस्वरूप वह ऐसे पहले योगी बन गए, जिन्हें मात्र 39 साल की उम्र में योग के क्षेत्र में पहला पद्मश्री सम्मान दिया गया. उन्होंने राष्ट्रीयता और अध्यात्म संस्कारों को अपनाने पर जोर देते हुए राष्ट्रगान में सिर्फ शांत खड़े होने के बजाय उसे समवेत रूप में गाने पर बल दिया.
सूरीनाम का किया जिक्र
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि पंडितजी की गुरु परंपरा को उनके पुत्र योग गुरु स्वामी भारत भूषण और आगे की दो पीढ़ियों ने विश्व पटल तक पहुंचाया. उन्होंने दक्षिणी अमेरिकी देश सूरीनाम का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास में पहली बार दो देशों के राष्ट्र अध्यक्षों ने एकसाथ योगाभ्यास किया था, वह भी गुरु भारत भूषण की योग कक्षा में.
उन्होंने आगे कहा कि मैं तीन साल से मोक्षायतन योग संस्थान में आना चाहता था, लेकिन कोरोना के चलते कार्यक्रम स्थगित होता रहा, आखिरकार आज मैं आपके बीच हूं.
'मुझे उनसे ईर्ष्या होती है'
इस अवसर पर बोलते हुए अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु स्वामी भारत भूषण ने अपने खास अंदाज में कहा कि यद्यपि योग मार्ग में ईर्ष्या के लिए कोई स्थान नहीं है फिर भी रामनाथ कोविंद के भाग्य से मुझे थोड़ी ईर्ष्या हो रही है. मेरे पूज्य पिता पंडित विश्वंभर सिंह जिस जलगोविद मठ के पीठाधीश्वर हुआ करते थे, हमने तो सिर्फ उसका नाम ही सुना है, लेकिन महामहिम के रूप में कोविंदजी ने उस मठ के दर्शन भी किए हैं.
इनकी रही उपस्थिति
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के बेरी बाग में पंडित विश्वंभर सिंह के आवास की ओर जाने वाले मार्ग का नाम उनके नाम पर रखते हुए यहीं मुख्य मार्ग पर नगर का विशालतम विश्वंभरसिंह द्वार बनाया गया है, जिसका लोकार्पण पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी धर्मपत्नी सविता कोविंद ने किया. इस अवसर पर संसदीय कार्य व उद्योग मंत्री जसवंत सिंह, पूर्व राजनयिक आचार्या प्रतिष्ठा, सांसद प्रदीप चौधरी, महापौर संजीव वालिया, नगर विधायक राजीव गुंबर, नकूड़ विधायक मुकेश चौधरी, जिलाधिकारी अखिलेश सिंह आदि मौजूद रहे.
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