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गुरु की सीख, शिष्य की साधना और साकार हो गया अरंगेत्रम का सपना
गीता चंद्रन की शिष्या महक चावला ने महाशिवरात्रि के मौके पर अरंगेत्रम की प्रस्तुति देकर सबको मोहित कर दिया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भरतनाट्यम नृत्यांगना महक चावला ने महाशिवरात्रि के मौके पर अरंगेत्रम (Arangetram) की प्रस्तुति देकर सबको मोहित कर दिया. महक भरतनाट्यम की पहचान बन चुकीं पद्मश्री गीता चंद्रन की स्टूडेंट हैं. गीता चंद्रन के लिए यह 50वां अरंगेत्रम था, जो उनके सम्मान में उनकी शिष्या द्वारा आयोजित किया गया था. वह पिछले 35 सालों से भरतनाट्यम सिखा रही हैं.
12 साल की कड़ी मेहनत
महक के लिए यह पहली एकल प्रस्तुति थी. वह 12 साल की उम्र से भरतनाट्यम सीख रही हैं. वह MANSA डांस फेस्टिवल, ओडिशा प्रबा फेस्टिवल जैसे कई डांस फेस्टिवल में परफॉर्म कर चुकी हैं. उन्होंने इंटरनेशनल योग फेस्टिवल में भी प्रस्तुति दी है. इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार-वर्कशॉप भी आयोजित की है. महाशिवरात्रि पर अपनी प्रस्तुति के दौरान उन्होंने अपनी गुरु गीता चंद्रन को धन्यवाद दिया.
गुरु की तारीफ
महक ने कहा कि मैं बहुत उत्साहित हूं कि महाशिवरात्रि के दिन मैं अपनी एकल प्रस्तुति दे रही हूं और यह सब मेरी गीता अक्का की बदौलत संभव ही पाया है. उनमें मुझे एक सच्चा गुरु मिला है, जिन्होंने मुझे सही दिशा दिखाई. वहीं, गीता चंद्रन ने कहा कि महक ने अपनी एकल प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. उनका नृत्य अभिनय उनके कौशल को दर्शाता है. बता दें कि गीता चंद्रन ने 1991 में NATYA VRIKSHA के स्थापना की थी, तब से वह लगातार अपने स्टूडेंट्स को भरतनाट्यम के गुर सिखा रही हैं. उनके इस संस्थान में अभी 200 विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं.
क्या होता है अरंगेत्रम?
किसी भी भरतनाट्यम नर्तक के करियर में अरंगेत्रम एक महत्वपूर्ण अवसर होता है. बारह वर्षों के बाद, कभी-कभी दशकों के कठिन प्रशिक्षण के बाद, जब गुरु को विश्वास हो जाता है कि शिष्य एकल प्रस्तुति देने के लिए तैयार है, तो अरंगेत्रम की घोषणा की जाती है. यह गुरु के लिए एक सम्मान होता है. महक द्वारा की गई अरंगेत्रम की प्रस्तुति, 50वीं प्रस्तुति थी जिसे गीता चंद्रन के स्टूडेंट द्वारा पेश किया गया. इस लिहाज से यह उनके लिए भी बड़ा दिन था.
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