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बृजभूषण के बहाने कहीं PM मोदी तो नहीं हैं निशाने पर? 

नारी सशक्तिकारण को अहमियत देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के नारे के दायरे में ही आता है, लेकिन प्रधानमंत्री इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • अमर आनंद, वरिष्ठ पत्रकार

यह भी एक अजीब तरह का खेल है, जिसका मकसद खेल के माहौल को बेहतर बनाना कम और सियासत का खेल खेलना ज्यादा है. 2024 से पहले इस खेल को परवान चढ़ाने की पूरी कोशिश की जा रही है और बृजभूषण के बहाने सत्ताधारी पार्टी और इसके मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने की पूरी कोशिश हो रही है. इस मामले में सताधारी बीजेपी की स्थिति असमंजस वाली हो गई है. न तो वो बृजभूषण का बचाव कर पा रही है और  न ही खिलाड़ियों का साथ दे पा रही है.

PM के पास नहीं समय
बिना जांच की रिपोर्ट आए न तो बृजभूषण को बेकसूर कहा जा सकता हैं और न ही महिला खिलाड़ियों के आरोप बेबुनियाद हैं. दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं और अपने अपने सबूत. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण पर दिल्ली पुलिस केस दर्ज कर जांच कर रही है. जंतर मंतर पर एक बार फिर से बजरंग पुनिया जैसे हरियाणा के चर्चित खिलाड़ियों और कथित रूप से पीड़ित खिलाड़ियों ने मोर्चा खोल रखा है. उनका आंदोलन आक्रामक होता जा रहा है, दिल्ली पुलिस की सख्ती भी बढ़ती जा रही है. खिलाड़ियों में विनेश फोगट भी शामिल हैं जिनके मेडल जीतने पर खुश होकर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अपनी बेटी बताया था लेकिन आज केरल और कर्नाटक तक चुनावी दौरा करके दिल्ली लौटने वाले प्रधानमंत्री के पास विनेश फोगट और बाकी खिलाड़ियों से मिलने का समय नहीं है.

बेहद संजीदा है मामला
महिला खिलाड़ियों के उत्पीड़न का मामला देश के लिए बेहद संजीदा है. नारी सशक्तिकारण को अहमियत देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के नारे के दायरे में ही आता है, लेकिन प्रधानमंत्री इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं इसलिए विपक्षी दल बहुत ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं. विपक्ष के नेता यहां पर अपनी मौजूदगी और विरोध दर्ज करा रहे हैं. जो नेता जंतर मंतर पर पहुंच रहे हैं उनकी प्रधानमंत्री से अपनी खुंदक है. प्रियंका गांधी के भाई राहुल गांधी को बेघर कर दिया गया है तो केजरीवाल के घर के नवीनीकरण पर बीजेपी बवाल कर रही है. इससे पहले पार्टी के नेताओं और खुद पर सीबीआई और ईडी की कार्रवाई को लेकर तो केजरीवाल पहले से ही आक्रामक हैं. रही बात सत्यपाल मलिक की तो वो राज्यपाल के पद से रिटायर होने के बाद मोदी और शाह के खिलाफ पुलवामा के मुद्दे पर मुखर होकर सामने आए हैं. किसानों का मुद्दा भी उन्होंने फिर से उठाना शुरू कर दिया है. इसमें संयोग कम और प्रयोग ज्यादा नजर आ रहा है कि एक ही साथ पुलवामा, किसान और महिला खिलाडियों का उत्पीड़न उन सारे मुद्दों को एक एक कर पिरोए जाने के प्रयास हो रहे हैं जो सरकार पर न सिर्फ सवाल उठाते हैं, बल्कि उसे असहज करते हैं.

मोदी की खामोशी, विपक्ष का शोरगुल
सत्यपाल मालिक से लेकर साक्षी मालिक तक और प्रियंका से लेकर केजरीवाल तक सब जुटे हुए हैं. प्रयास ये है 2024 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सियासी किरदार को कमजोर किया जाए. उनके कथित अडानी प्रेम की पोल खोली जाए, देशप्रेम पर सवाल खड़े किए जाएं, किसान प्रेम को कटघरे में लाया जाए और नारी सशक्तिकरण के दावों को झूठा साबित किया जाए. ऐसा करके ये नेता और इनके साथ और पीछे खड़े कई नेता दरअसल 2024 से पहले मोदी के खिलाफ माहौल बनाने में लगे हैं. यह एक सियासी अवसर है, जिसे भुनाने की पूरी कोशिश की जा रही है. महिला खिलाड़ियों के मामले में हर तरफ रणनीति अपना काम कर रही है. मोदी की खामोशी में भी और विपक्ष के शोरगुल में भी. 

ये है सबसे बड़ा सवाल 
महिला खिलाड़ियों के उत्पीड़न का मामला है तो उस पर सरकार में सुनवाई होती, तो भला सुप्रीम कोर्ट को क्यों दखल देना पड़ता. खेल मंत्री की ओर से एक जांच कमेटी बनाकर खानापूर्ति कर ली गई, जिसे पीड़ितों की ओर से नाकाफी माना गया. महिला खिलाड़ियों के उत्पीड़न का सच सामने आना चाहिए यह देश का हर सच्चा नागरिक चाहेगा. हालांकि एक सवाल यह भी है कि अगर 2012 से यह उत्पीड़न जारी है और पीड़ितों की संख्या 1000 तक पहुंचने की बात कही जा रही, तो यह मामला इतनी देर से क्यों उठाया गया? इस मामले के पीड़ित एक ही राज्य से क्यों हैं? क्या खेल के नियम बदले जाने की वजह भी इस बवाल की जद में है और इन सब बातों की परत दर परत जांच होनी चाहिए. 

छह बार के हैं सांसद
महिला खिलाडियों के उत्पीड़न के आरोपी बृजभूषण शरण सिंह आज सबसे ज्यादा चर्चित नाम है, लेकिन चर्चा सकारात्मक नहीं नकारात्मक है. बृजभूषण शरण सिंह का नाम आते ही उनका बाहुबल, उनके स्कूल, उनके घोड़े, उनके हथियार और उनका हेलीकॉप्टर सबकुछ सामने आ जाता है. अवध से लेकर पूर्वांचल तक में ठाकुरों के दबंग और असरदार नेता माने जाने वाले बृजभूषण के प्रोफाइल में छह बार का सांसद होने के साथ - साथ रामभक्त होना भी जोड़ दिया जाता है. अयोध्या के निकट गोंडा के एक गांव में रहने वाले बृजभूषण खुद को कारसेवकों की श्रेणी में भी रखते हैं और कारसेवकों पर गोली चलाने वाले मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की पार्टी में भी रह चुके हैं. हाल ही में उन्हें अयोध्या के राम लला के मंदिर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगवानी करते हुए भी देखा गया था. फसनवीस ने इस मौके पर उनकी तारीफ भी की थी. 

3 दर्शन से ज्यादा मामले
गोंडा से लेकर दिल्ली तक, यूपी से लेकर देश तक और कुश्ती संघ के जरिए दुनिया भर में अपना नाम रौशन करने वाले और अटल प्रिय से लेकर मोदी प्रिय तक रहे बृजभूषण की खासियतें और भी हैं. 1996 में हथियार प्रेमी बृजभूषण के घर पर एके 47 बरामद की गई थी और उनका नाम दाऊद इब्राहिम से भी जोड़ा जाता है. वह खुलेआम मीडिया कैमरे पर मर्डर की बात करते रहे हैं. माफिया की श्रेणी में समझे और माने जाने वाले कैसरगंज के बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह जिस दौर में विरोधियों के निशाने पर हैं, उस दौर में उत्तर प्रदेश में माफिया को मिट्टी में मिलाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काम कर रहे हैं. हालांकि तीन दर्जन से ज्यादा मामले वाले बृजभूषण सरकारी माफिया सूची से बाहर हैं. मुख्यमंत्री योगी के स्वजातीय बृजभूषण एक दबंग नेता हैं और पार्टी और सरकार के अंदर अपनी सहमति और असहमति खुल कर जाहिर करते हैं. 

मुकम्मल जांच होनी चाहिए
कहा यह जाता है कि गोंडा समेत तकरीबन दस लोकसभा सीटों पर अपनी पकड़ रखने वाले बृजभूषण अक्सर पार्टी पर भारी पड़ते हैं इसलिए पार्टी उनकी असहमतियों को नजरंदाज ही करती रही है, लेकिन जहां तक बात खिलाड़ियों के उत्पीड़न की है तो यह महज सियासी, चुनावी या क्षेत्रीय मामला नहीं है. बल्कि इसके साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि का भी सवाल है, इसलिए इसकी मुकम्मल जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर बृजभूषण को इसकी सजा मिलनी चाहिए.


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