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Madhya Pradesh: क्या शिवराज सिंह को CM न बनाने की गलती करना चाहेंगे Modi?

मोदी-शाह की जोड़ी चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए पहचानी जाती है. इसलिए कोई भी सटीक तौर पर कुछ कहने की स्थिति में नहीं है.

नीरज नैयर 2 years ago

मध्य प्रदेश के चुनाव परिणाम उम्मीदों के एकदम विपरीत रहे. माना जा रहा था कि कांग्रेस को एंटी-इनकम्बेंसी फैक्टर का लाभ मिलेगा और वो भाजपा के विजय रथ को रोकने की स्थिति में होगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. परिणाम एकतरफा आए और भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की. आमतौर पर विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री के नाम और काम पर वोट मांगे जाते हैं. मगर मध्य प्रदेश में नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगे गए. 'एमपी के मन में मोदी', 'मोदी के मन में एमपी' नारों की गूंज पूरे चुनाव में सुनाई देती रही. इतना ही नहीं, विज्ञापनों में नल में पानी जैसे सामान्य कार्यों का श्रेय भी स्थानीय सरकार के बजाए नरेंद्र मोदी को दिया गया. शिवराज सिंह के चुनाव लड़ने को लेकर भी काफी समय तक सस्पेंस बना रहा. उम्मीदवारों की लिस्ट में उनका नाम आखिरी सूची में आया. शायद केंद्रीय नेतृत्व को कहीं न कहीं डर था कि शिवराज सिंह के नाम के साथ चुनावी मैदान में उतरना जोखिम भरा हो सकता है. लेकिन चुनाव परिणामों ने इस डर को कुछ हद तक दूर जरूर किया होगा.

जीत का सेहरा किसके सिर?  
तमाम राजनीतिक पंडितों का मानना है कि चुनाव में शिवराज सिंह चौहान की लाडली बहना योजना गेम चेंजर रही. इसके अलावा, जनता के साथ उनका जुड़ाव, खासतौर पर महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और प्रचार के दौरान उनके भावनात्मक भाषण लोगों को पोलिंग बूथ तक लाने में सफल रहे. हालांकि, ये बात अलग है कि चुनाव जीतने वाले BJP के कुछ बड़े नेता इस कामयाबी का सेहरा सिर्फ नरेंद्र मोदी के सिर बांध रहे हैं. इसे इन नेताओं की मजबूरी भी समझा जा सकता है, क्योंकि वो अपने सिर CM का सेहरा बंधते देखना चाहते हैं. ऐसे में शिवराज को जीत का क्रेडिट देकर अपनी राह मुश्किल नहीं कर सकते. मध्य प्रदेश में फ़िलहाल यही सबसे बड़ी चर्चा है कि प्रदेश की कमान किसे मिलेगी? क्या जिस तरह चुनाव के दौरान शिवराज सिंह को हाशिये पर धकेल दिया गया था, वैसे ही जीत के बाद भी उन्हें किनारे लगा दिया जाएगा? क्या बीजेपी कोई चौंकाने वाला नाम सामने लाएगी?

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ये भी हैं CM की दौड़ में शामिल
कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद सिंह पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया CM की दौड़ में शामिल हैं. अब इसमें एक नया नाम राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी का भी जुड़ गया है. सोलंकी को पीएम मोदी का करीबी माना जाता है और संघ के साथ भी उनके रिश्ते मधुर हैं. सबसे खास बात ये है कि वह प्रदेश में बड़ा आदिवासी चेहरा हैं. वहीं, भाजपा ने ग्वालियर-चंबल में पिछली बार की तुलना में इस बार काफी अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसका क्रेडिट ज्योतिरादित्य सिंधिया के मैनेजमेंट को दिया जा रहा है. इसी तरह, कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद सिंह पटेल और नरेंद्र सिंह तोमर भी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी रहे हैं. इनके अलावा, आदिवासी नेता होने के नाते चर्चा फग्गन सिंह कुलस्ते को लेकर भी है. हालांकि, वह अपनी सीट बचाने में सफल नहीं रहे हैं. मोदी-शाह की जोड़ी चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए पहचानी जाती है. इसलिए कोई भी सटीक तौर पर कुछ कहने की स्थिति में नहीं है. लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले जनाधार वाले शिवराज सिंह को दरकिनार करने का जोखिम लेना चाहेगी?

एकमात्र मास लीडर हैं शिवराज
केंद्रीय नेतृत्व शिवराज सिंह को लेकर जो भी सोच रखता हो, लेकिन प्रचंड जीत के बाद उन्हें यूं नजरअंदाज़ करना आसान नहीं होगा. शिवराज सिंह मध्यप्रदेश में अकेले मास लीडर हैं. इसमें कोई दोराय नहीं है कि कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद सिंह पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के दिग्गज नेता हैं, लेकिन इनकी पकड़ केवल अपने क्षेत्रों तक ही सीमित है, जबकि शिवराज पूरे प्रदेश पर पकड़ रखते हैं. आज के समय में प्रदेश BJP में उनसे ज्यादा लोकप्रिय नेता कोई नहीं है. ऐसे में अगर उन्हें CM नहीं बनाया जाता, तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. क्योंकि वोट उन लाडली बहनों को भी देने हैं, जिन्होंने प्रदेश के चुनाव में शिवराज को आशीर्वाद दिया है. शिवराज खुद भी जानते हैं कि आलाकमान के लिए उन्हें किनारे लगाना आसान होगा, इसलिए वह इशारों ही इशारों में CM की कुर्सी पर अपनी दावेदारी जता रहे हैं. यह जानते हुए भी कि मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला होना अभी बाकी है बहना को लखपति बनाने का ऐलान, उनकी इच्छा को दर्शाता है. और मुझे लगता है कि इसमें कुछ गलत भी नहीं है. लगातार इतने सालों से प्रदेश में BJP कार्यकर्ताओं का जोश हाई रखने के ऐवज में वह इतने की इच्छा तो रख ही सकते हैं. वैसे, ये भी संभव है कि आलाकमान लोकसभा चुनाव तक शिवराज की ताजपोशी कर दे और फिर उन्हें केंद्र में कोई जिम्मेदारी सौंप दी जाए. 


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